पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार योजना के 10 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मनाने की घोषणा की है। यह पहल न केवल सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के बहुमूल्य योगदान को सम्मानित करती है, बल्कि भारत के प्रशासनिक इतिहास को उनके व्यक्तिगत संस्मरणों के माध्यम से दस्तावेज़ के रूप में संरक्षित करने का भी एक सशक्त माध्यम है।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य
राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार की नींव वर्ष 2015 में रखी गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार, यह योजना इस विचार से शुरू हुई कि सरकारी सेवा में दशकों का अनुभव और संस्थागत स्मृति किसी भी राष्ट्र के लिए अनमोल धरोहर है। अनुभव पोर्टल इसी सोच का परिणाम है, जहां सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी अपने संस्मरण साझा करते हैं।
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कौन भाग ले सकता है: कोई भी सरकारी कर्मचारी, जो सेवानिवृत्ति से 8 माह पहले या सेवानिवृत्ति के 3 वर्षों के भीतर है, अपने अनुभव और सुझावों पर आधारित लेख जमा कर सकता है।
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प्रक्रिया: लेख संबंधित मंत्रालय द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं और फिर पुरस्कार के लिए उनका मूल्यांकन किया जाता है।
योजना का विकास और विस्तार (2015–2025)
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2015: केवल 05 राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कारों के साथ शुरुआत।
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2022: अनुभव अवार्डीज़ स्पीक वेबिनार श्रृंखला की शुरुआत, जिसमें पुरस्कार विजेता अपने अनुभव साझा कर नए सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को प्रेरित करते हैं।
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2023: मुख्य 05 पुरस्कारों के अतिरिक्त 10 अनुभव जूरी पुरस्कार जोड़े गए, साथ ही तीन वेतन स्तर समूह (स्तर 1–6, 7–12, और 13+) में आरक्षण का प्रावधान किया गया।
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2024: अंक प्रणाली लागू की गई ताकि चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके। साथ ही 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSEs) को भी योजना में शामिल किया गया।
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2025: अंक प्रणाली में प्रतिभागियों के सुझाव और प्रतिक्रिया भी जोड़ी गई। राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार योजना 2026 का आधिकारिक अधिसूचना जारी।
पिछले दस वर्षों की उपलब्धियां और प्रभाव
दस साल की यात्रा में राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार योजना ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है:
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12,500+ संस्मरण अनुभव पोर्टल पर प्रकाशित।
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7 समारोह सफलतापूर्वक आयोजित (COVID-19 के कारण 2020–21 में नहीं हो सके)।
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अब तक 59 अनुभव पुरस्कार और 19 जूरी पुरस्कार प्रदान किए गए।
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शीर्ष योगदानकर्ता संस्थान: सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, डीआरडीओ।
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सबसे अधिक विजेता देने वाले विभाग: डीआरडीओ, सीआरपीएफ, रेल मंत्रालय।
इन संस्मरणों ने न केवल प्रशासनिक तंत्र के अंदरूनी पहलुओं को सामने लाया है, बल्कि नीतिगत सुधारों और संगठनात्मक विकास में भी योगदान दिया है।
राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार 2025 की मुख्य झलकियां
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समारोह की तारीख: 18 अगस्त 2025
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स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली
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मुख्य अतिथि: केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह
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सम्मानित विजेता: 11 मंत्रालयों/विभागों के 15 विजेता
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भागीदारी का दायरा: 42 मंत्रालय/विभाग/संगठन
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2025 में प्रकाशित संस्मरण: लगभग 1500
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चयन प्रक्रिया: गहन समीक्षा और अंक प्रणाली के आधार पर चयन
2025 के नए आयाम
इस वर्ष के आयोजन में कई महत्वपूर्ण ‘पहली बार’ की उपलब्धियां शामिल हैं:
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के कर्मचारी पहली बार विजेताओं में शामिल हुए हैं।
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महिला भागीदारी में वृद्धि: एक-तिहाई विजेता महिलाएं हैं, जो शासन और प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।
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संस्मरणों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल परिवर्तन, और लोक सेवा की पारदर्शिता को बढ़ावा देने के व्यावहारिक सुझाव शामिल हैं।
योजना का व्यापक प्रभाव
राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार योजना ने तीन प्रमुख स्तरों पर प्रभाव डाला है:
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संस्थागत स्मृति का संरक्षण: वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दिशानिर्देश बन गए हैं।
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प्रेरणा और सीख: विजेताओं की कहानियां नए कर्मचारियों को प्रेरित करती हैं और उन्हें सेवा के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक तरीके बताती हैं।
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नीतिगत सुधार: कई मंत्रालयों ने प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रक्रियाओं में बदलाव और सुधार लागू किए हैं।
आगे की राह
2026 से, योजना को और व्यापक बनाने के लिए निजी क्षेत्र के पेंशनभोगियों और राज्य सरकारों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, संस्मरणों को डिजिटल आर्काइव और ओपन एक्सेस नॉलेज प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है, ताकि आम जनता भी उनसे लाभान्वित हो सके।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार योजना सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रशासनिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। यह पहल दिखाती है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों का अनुभव और ज्ञान राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है। 2025 का समारोह इस यात्रा का एक स्वर्णिम पड़ाव है, जो अगले दशक में और भी गहरी छाप छोड़ने के लिए तैयार है।

