अक्कई पद्मशाली इतिहास रचते हुए बनीं सुप्रीम कोर्ट समिति की पहली ट्रांसजेंडर सदस्य
अक्कई पद्मशाली इतिहास रचते हुए बनीं सुप्रीम कोर्ट समिति की पहली ट्रांसजेंडर सदस्य

अक्कई पद्मशाली इतिहास रचते हुए बनीं सुप्रीम कोर्ट समिति की पहली ट्रांसजेंडर सदस्य

भारत में लैंगिक समानता और ट्रांसजेंडर अधिकारों की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता अक्कई पद्मशाली को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उस विशेष पैनल में शामिल किया गया है जो ट्रांसजेंडर अधिकारों की रक्षा के लिए समान अवसर नीति (Equal Opportunity Policy) तैयार करेगा। यह समिति देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों, अवसरों और न्यायिक सुरक्षा को सशक्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

अक्कई पद्मशाली ऐसी समिति में शामिल होने वाली कर्नाटक की पहली ट्रांसजेंडर सदस्य बनी हैं। यह न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और योगदान की पहचान है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व और समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।


नियुक्ति का महत्व

1. राष्ट्रीय स्तर पर अवसर

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह समिति ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित नीतियों और अधिकारों को आकार देने का अवसर प्रदान करती है। इस समिति में अक्कई की भागीदारी से यह सुनिश्चित होगा कि नीतियाँ केवल कागज़ी दस्तावेज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि समुदाय की ज़मीनी वास्तविकताओं को भी शामिल करें।

2. प्रतिनिधित्व में मील का पत्थर

यह पहली बार है जब सर्वोच्च न्यायालय की किसी समिति में ट्रांसजेंडर समुदाय का सीधा प्रतिनिधित्व हुआ है। यह न केवल प्रतीकात्मक महत्व रखता है, बल्कि यह दर्शाता है कि न्यायपालिका अब नीतिगत स्तर पर समावेशन की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

3. समानता की दिशा में पहल

अक्कई पद्मशाली ने अपनी नियुक्ति के बाद कहा कि वे डॉ. भीमराव अंबेडकर के समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से प्रेरित होकर कार्य करेंगी। उनका उद्देश्य न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को आगे बढ़ाना है, बल्कि पूरे समाज में समानता, गरिमा और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करना भी है।


पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों को कानूनी मान्यता मिलने की यात्रा लंबी और संघर्षपूर्ण रही है।

NALSA बनाम भारत संघ (2014)

इस ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को “तीसरा लिंग” के रूप में मान्यता दी थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी लैंगिक पहचान चुनने और उसे व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। यह फैसला भारतीय न्यायिक इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

2018 का फैसला – समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाया गया

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाकर लैंगिक और यौन अल्पसंख्यकों को वैधानिक संरक्षण प्रदान किया। यह निर्णय भारतीय समाज में समानता, सम्मान और स्वीकृति की दिशा में एक और बड़ा कदम था।

अब भी बनी हुई चुनौतियाँ

हालांकि इन फैसलों ने कानूनी स्तर पर रास्ता खोला, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ट्रांसजेंडर समुदाय को अभी भी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकृति जैसे क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अक्कई पद्मशाली जैसी हस्तियाँ इन चुनौतियों को नीतिगत स्तर पर हल करने की दिशा में काम कर रही हैं।


लक्ष्य और योजनाएँ

सुप्रीम कोर्ट समिति का उद्देश्य केवल नीति बनाना नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। अक्कई पद्मशाली ने अपने वक्तव्य में बताया कि समिति निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर काम करेगी:

  • समुदाय आधारित परामर्श और चर्चा: विभिन्न राज्यों के ट्रांसजेंडर संगठनों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर नीति निर्माण में उनकी राय को शामिल किया जाएगा।

  • न्यायालय के निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन: NALSA और अन्य फैसलों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ठोस ढाँचा तैयार किया जाएगा।

  • आंदोलन का दायरा बढ़ाना: ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ-साथ ट्रांसमेन और इंटरसेक्स समुदायों को भी नीति प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व दिलाने पर ज़ोर दिया जाएगा।

अक्कई का मानना है कि जब तक नीति निर्माण में समुदाय स्वयं शामिल नहीं होगा, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।


समिति की संरचना

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आशा मेनन कर रही हैं। समिति में कई प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं।

समिति के सदस्य:

  • ग्रेस बानू – दलित एवं ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता

  • वैजयंती वसंथा मोगली – तेलंगाना की ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता

  • सौरव मंडल – एसोसिएट प्रोफेसर, जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी

  • नित्या राजशेखर – सीनियर एसोसिएट, सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी, बेंगलुरु

  • संजय शर्मा – सेवानिवृत्त सीईओ, एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ इन इंडिया

यह विविध संरचना सुनिश्चित करती है कि समिति न केवल कानूनी पहलुओं पर, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ी ज़रूरतों पर भी ध्यान देगी।


अक्कई पद्मशाली – संघर्ष से नेतृत्व तक

अक्कई पद्मशाली कर्नाटक की जानी-मानी ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हैं जिन्होंने वर्षों से शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने “Ondede Foundation” की स्थापना की, जो जेंडर, यौनिकता और मानवाधिकारों के मुद्दों पर कार्य करती है।

उन्हें 2015 में राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और 2017 में उन्होंने राष्ट्रपति भवन में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति से मिलकर ट्रांसजेंडर अधिकारों पर चर्चा की थी। अक्कई का यह नया दायित्व न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सम्मान और प्रेरणा का स्रोत है।

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