भारत के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटलीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 10 नवंबर 2025 को दो नए मोबाइल एप्लिकेशन — ‘सहकार डिजी पे (Sahakar Digi Pay)’ और ‘सहकार डिजी लोन (Sahakar Digi Loan)’ लॉन्च किए। यह पहल देश में शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks – UCBs) को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
यह लॉन्च शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र पर आयोजित एक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुआ। शाह ने कहा कि “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से कैशलेस होती जा रही है, और सहकारी बैंकों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना ही होगा।”
शहरी सहकारी बैंकों का डिजिटल परिवर्तन
भारत में करीब 1,500 से अधिक शहरी सहकारी बैंक लाखों ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं। लेकिन अब तक इनमें से अधिकांश बैंक डिजिटल रूपांतरण की प्रक्रिया में पीछे रहे हैं।
‘सहकार डिजी पे’ और ‘सहकार डिजी लोन’ जैसे ऐप्स की शुरुआत इस क्षेत्र को डिजिटल युग में प्रवेश दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
सहकार डिजी पे और सहकार डिजी लोन: क्या हैं ये ऐप्स?
1. सहकार डिजी पे (Sahakar Digi Pay):
यह एक डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म है जो UCB ग्राहकों को तेज़, सुरक्षित और सरल ऑनलाइन लेन-देन की सुविधा देगा। इसके माध्यम से ग्राहक यूपीआई (UPI), कार्ड पेमेंट और QR कोड स्कैनिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इसका उद्देश्य सहकारी बैंकों को डिजिटल इंडिया मिशन से जोड़ना और नकदरहित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाना है।
2. सहकार डिजी लोन (Sahakar Digi Loan):
यह ऐप व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को तेज़ और पेपरलेस ऋण प्रक्रिया प्रदान करेगा। इसके जरिए ग्राहक ऑनलाइन आवेदन, स्वीकृति और मॉनिटरिंग जैसी सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।
यह खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं में समय या दस्तावेज़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
लॉन्च के उद्देश्य और लक्ष्य
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शहरी सहकारी बैंकों में तेज़ डिजिटल अपनाने को प्रोत्साहित करना।
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आने वाले दो वर्षों में 1,500 UCBs को इन दोनों डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से जोड़ना।
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डिजिटल ऋण और भुगतान सेवाओं के माध्यम से वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना।
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ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आसान बैंकिंग पहुंच सुनिश्चित करना।
अमित शाह ने यह भी कहा कि आने वाले पांच वर्षों में, जिन शहरों की आबादी दो लाख से अधिक है, उनमें कम से कम एक नया शहरी सहकारी बैंक (UCB) स्थापित किया जाएगा।
विकास और विस्तार की रणनीति
सरकार की नई रणनीति के तहत, सफल सहकारी ऋण समितियों (Credit Societies) को शहरी सहकारी बैंकों में परिवर्तित किया जाएगा।
इससे बैंकिंग प्रणाली में स्थिरता और स्थानीय वित्तीय ढांचे को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, प्राथमिकता युवा उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दी जाएगी ताकि वे डिजिटल ऋण और भुगतान सेवाओं के माध्यम से अपनी वित्तीय स्थिति सशक्त कर सकें।
वित्तीय सुधार और उपलब्धियाँ
अमित शाह ने बताया कि शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है —
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गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA) 2.8% से घटकर 0.6% रह गई हैं।
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सहकारी बैंकों की कंप्यूटरीकरण परियोजनाएँ लगभग पूरी हो चुकी हैं।
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प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मॉडल उपनियम अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए हैं, जिससे नीतिगत एकरूपता सुनिश्चित हो रही है।
वैश्विक मान्यता और भारत की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सहकारी संस्थाओं की साख लगातार बढ़ रही है।
अमूल (Amul) और IFFCO को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) द्वारा विश्व के शीर्ष दो सहकारी संगठनों में शामिल किया गया है।
यह भारत के सहकारी मॉडल की विश्वसनीयता और प्रभाव को दर्शाता है।
चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा
हालांकि यह डिजिटल पहल उत्साहजनक है, परंतु चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं:
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करीब 20 शहरी सहकारी बैंक फिलहाल वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
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उन्हें पुनर्गठित करने के लिए यस बैंक पुनर्निर्माण मॉडल जैसे सफल उदाहरणों से सीख ली जा सकती है।
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सहकारी बैंक राज्य सरकारों के अधीन होते हैं, लेकिन केंद्र सरकार नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता के माध्यम से इनकी दिशा तय कर रही है।
मुख्य स्थिर तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लॉन्च तिथि | 10 नवंबर 2025 |
| मंत्री | अमित शाह, केंद्रीय सहकारिता मंत्री |
| डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स | सहकार डिजी पे और सहकार डिजी लोन |
| लक्षित शहर | 2 लाख से अधिक आबादी वाले शहर |
| NPA में गिरावट | 2.8% → 0.6% |
| डिजिटल अपनाने का लक्ष्य | 1,500 UCBs (2 वर्षों में) |
| वैश्विक मान्यता | अमूल और IFFCO – विश्व के शीर्ष सहकारी संस्थान |

