केंद्र सरकार ने आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) की सचिव अनुराधा ठाकुर को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में नामित किया है। वह इस पद पर अजय सेठ का स्थान लेंगी। यह नियुक्ति ऐसे समय पर की गई है जब भारतीय रिज़र्व बैंक मूल्य स्थिरता बनाए रखने, बैंकिंग विनियमन को सुदृढ़ करने और आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक (4 से 6 अगस्त 2025) की तैयारियों में जुटा हुआ है।
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक का केंद्रीय निदेशक मंडल इसकी सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। इसमें आधिकारिक निदेशक (जैसे गवर्नर, डिप्टी गवर्नर और सरकार द्वारा नामित सदस्य) और विभिन्न क्षेत्रों से गैर-आधिकारिक निदेशक शामिल होते हैं। यह बोर्ड बैंक के सामान्य पर्यवेक्षण और संचालन की जिम्मेदारी निभाता है।
अनुराधा ठाकुर की इस बोर्ड में नियुक्ति से स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार नीतिगत समन्वय को सशक्त बनाते हुए केंद्रीय बैंक के आर्थिक दृष्टिकोण को और मजबूत बनाना चाहती है।
इस नियुक्ति का महत्व
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नीतिगत समन्वय को बढ़ावा: ठाकुर की नियुक्ति से वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे आर्थिक नीतियों को अधिक समन्वित तरीके से लागू किया जा सकेगा।
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प्रशासनिक अनुभव का लाभ: अनुराधा ठाकुर का व्यापक प्रशासनिक व आर्थिक मामलों का अनुभव, आरबीआई के निर्णयों में व्यावहारिक व रणनीतिक दृष्टिकोण को बल देगा।
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समयबद्ध निर्णय: MPC की आगामी बैठक से पहले यह नियुक्ति निरंतरता सुनिश्चित करने और मौद्रिक नीतियों में स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।
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मूल्य स्थिरता पर समर्थन: यह नियुक्ति मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन कायम रखने के आरबीआई प्रयासों को बल प्रदान करेगी।
आरबीआई केंद्रीय बोर्ड के उद्देश्य
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आर्थिक स्थिरता हेतु मौद्रिक नीतियों का निर्माण
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सुदृढ़ बैंकिंग प्रणाली हेतु नियमन और पर्यवेक्षण
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मूल्य स्थिरता और विकास के बीच संतुलन
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कॉर्पोरेट हितों के टकराव का सामंजस्यपूर्ण समाधान
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वैश्विक वित्तीय चुनौतियों के अनुरूप रणनीति निर्माण
आरबीआई की वर्तमान प्राथमिकताएं
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्फीति नियंत्रण है। इसके अलावा:
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MPC द्वारा लचीली मौद्रिक नीति अपनाई जा रही है
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NBFCs और बैंकों के नियमन पर सख्त निगरानी
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कॉर्पोरेट समूहों की गतिविधियों पर विशेष नजर, जो वित्तीय और वास्तविक क्षेत्रों दोनों में सक्रिय हैं
इस नियुक्ति से स्पष्ट होता है कि सरकार और आरबीआई आने वाले आर्थिक निर्णयों को ज्यादा सहयोगात्मक, पारदर्शी और स्थिरता-उन्मुख बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

