अपर्णा गर्ग ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) का पदभार संभाला
अपर्णा गर्ग ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) का पदभार संभाला

अपर्णा गर्ग ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) का पदभार संभाला

भारतीय रेलवे के शीर्ष प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस (IRAS) की वरिष्ठ अधिकारी अर्पणा गर्ग ने 1 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से रेलवे बोर्ड की सदस्य (वित्त) का पदभार संभाल लिया है। 1987 बैच की अधिकारी अर्पणा गर्ग भारतीय रेल में तीन दशकों से अधिक समय से महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुकी हैं और रेलवे की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को गहराई से समझने वाली विशेषज्ञ मानी जाती हैं।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारतीय रेल अभूतपूर्व बदलावों से गुजर रही है—अवसंरचना विस्तार, उच्च गति रेल परियोजनाएँ, ग्रीन एनर्जी मिशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे कई बड़े कार्यक्रम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे दौर में मजबूत वित्तीय रणनीति और अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण है, जिसे संभालने की जिम्मेदारी अब अर्पणा गर्ग पर है।


कौन हैं अर्पणा गर्ग? 36 वर्षों का अनुभव और बेहतरीन प्रशासनिक पृष्ठभूमि

अर्पणा गर्ग IRAS की उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं जिनका प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन का अनुभव बेहद व्यापक है। भारतीय रेल के विभिन्न विभागों और जोन में उन्होंने उच्च स्तर की जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। इनमें शामिल हैं—

1. डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM), मैसूर

यह पद रेलवे संचालन, यात्री सेवाओं, माल ढुलाई, सुरक्षा और प्रशासन—सभी का नेतृत्व करता है। इस दौरान उन्होंने मैसूर डिविजन में कई संरचनात्मक सुधार किए।

2. प्रिंसिपल फाइनेंशियल एडवाइज़र, रेल व्हील फैक्टरी

यहाँ उनका काम उत्पादन इकाइयों में लागत प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करना था।

3. डायरेक्टर जनरल, इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (IRIFM)

उन्होंने रेलवे के नए फाइनेंस अधिकारियों को प्रशिक्षित करने वाली इस प्रमुख संस्था का नेतृत्व किया और आधुनिक वित्तीय प्रबंधन पद्धतियों का समावेश किया।

इन भूमिकाओं से उनका यह अनुभव साबित होता है कि वे संचालन, नीति क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने में माहिर हैं।


अंतरराष्ट्रीय योग्यता और प्रशिक्षण से समृद्ध प्रोफ़ाइल

अर्पणा गर्ग की शैक्षिक पृष्ठभूमि और वैश्विक exposure उन्हें भारतीय रेल की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाते हैं।

• चीवनिंग फ़ैलो (यूके सरकार की प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति)

यह फ़ैलोशिप वैश्विक नेतृत्व कौशल और पब्लिक पॉलिसी समझ के लिए जानी जाती है।

• यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स (UK) से ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिक्स में एडवांस्ड मास्टर्स

यह विशेषज्ञता उन्हें परिवहन वित्त, लागत विश्लेषण, PPP मॉडल और अवसंरचना अर्थशास्त्र को गहराई से समझने में सक्षम बनाती है।

• शीर्ष वैश्विक संस्थानों में प्रशिक्षण

  • बोकोनी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, मिलान

  • INSEAD, सिंगापुर

  • इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (ISB), हैदराबाद

इन संस्थानों में नेतृत्व, प्रबंधन और आधुनिक वित्त पद्धतियों का प्रशिक्षण उनके निर्णय-निर्माण और रणनीतिक सोच को और शक्तिशाली बनाता है।


उनके सामने नई जिम्मेदारियाँ – भारतीय रेल की वित्तीय कमान

रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) के रूप में वे ऐसे विभाग का नेतृत्व कर रही हैं, जो पूरे 68,000 km से अधिक नेटवर्क वाली भारतीय रेल का वित्तीय संचालन नियंत्रित करता है। उनके प्रमुख दायित्व होंगे—

1. बजट निर्माण और व्यय नियंत्रण

पूरे रेलवे सिस्टम के लिए वार्षिक बजट तैयार करना एवं खर्चों को नियंत्रित करना।

2. निवेश योजना और परियोजना मूल्यांकन

नई रेल परियोजनाओं, हाई-स्पीड ट्रेन सिस्टम, स्टेशन पुनर्विकास और लॉजिस्टिक हब में निवेश का मूल्यांकन।

3. संसाधन जुटाना और अतिरिक्त-बजटीय वित्त

बॉन्ड, विदेशी निवेश, PPP मॉडल और राज्य सरकारों के सहयोग से अतिरिक्त संसाधन जुटाना।

4. आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की वित्तीय रूपरेखा तैयार करना

स्वदेशी वंदे भारत ट्रेनें, कारखानों के आधुनिकीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए वित्तीय रणनीतियाँ बनाना।

5. PM Gati Shakti और विकसित भारत 2047 विज़न को वित्तीय समर्थन देना

लॉजिस्टिक्स सुधार, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और नई तकनीकों में निवेश को समर्थन।

उनका अनुभव भारतीय रेल की तेज़ी से बढ़ती परियोजनाओं को वित्तीय गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


क्यों महत्वपूर्ण है उनकी नियुक्ति?

अर्पणा गर्ग का रेलवे बोर्ड में आना इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि—

 भारतीय रेल 2030 तक पूरी तरह विद्युतीकरण, हाई-स्पीड कॉरिडोर और नए आधुनिक माल-ढुलाई नेटवर्क पर काम कर रही है।
 रेलवे का पूंजीगत निवेश पिछले पाँच वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है।
 वित्तीय अनुशासन के साथ तेज़ विकास—दोनों को संभालने के लिए अनुभवी नेतृत्व आवश्यक है।

उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलकर रेलवे के वित्तीय ढांचे को और मजबूत बनाएगा।

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