BRO द्वारा जम्मू-कश्मीर के चतरगला दर्रे पर उच्च-ऊँचाई बचाव अभियान और सड़क बहाली
BRO द्वारा जम्मू-कश्मीर के चतरगला दर्रे पर उच्च-ऊँचाई बचाव अभियान और सड़क बहाली

BRO द्वारा जम्मू-कश्मीर के चतरगला दर्रे पर उच्च-ऊँचाई बचाव अभियान और सड़क बहाली

सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि देश के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़कें केवल ढांचा नहीं, बल्कि जीवन रेखा होती हैं। जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के चतरगला दर्रे पर BRO द्वारा सफलतापूर्वक चलाया गया उच्च-ऊँचाई बचाव एवं सड़क बहाली अभियान न केवल तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता, सैन्य समन्वय और राष्ट्रसेवा की भावना को भी दर्शाता है।

अत्यधिक ठंड, खराब मौसम और भारी हिमपात के बीच किए गए इस अभियान में BRO ने फंसे हुए नागरिकों और सैनिकों को सुरक्षित निकाला और एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से खोलकर संभावित मानवीय संकट को टाल दिया।


क्यों समाचार में है चतरगला दर्रे का मामला?

23 जनवरी 2026 को जम्मू क्षेत्र में स्थित चतरगला दर्रा, जो लगभग 10,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, अचानक भारी बर्फबारी के कारण पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। इस दौरान क्षेत्र में 5 से 6 फीट तक हिमपात दर्ज किया गया, जिससे भद्रवाह–चतरगला मार्ग पर लगभग 38 किलोमीटर लंबा सड़क खंड बंद हो गया।

इस मार्ग के अवरुद्ध होने से:

  • आम नागरिकों की आवाजाही ठप हो गई

  • सुरक्षा बलों की तैनाती और रसद आपूर्ति बाधित हो गई

  • कठोर सर्दियों में अलग-थलग पड़ने का खतरा पैदा हो गया

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत BRO को अलर्ट किया गया।


चतरगला दर्रे का रणनीतिक और मानवीय महत्व

चतरगला दर्रा जम्मू क्षेत्र के दुर्गम इलाकों को आपस में जोड़ने वाला एक अहम संपर्क मार्ग है। यह न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यक है, बल्कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों की आवाजाही के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सर्दियों में इस क्षेत्र में:

  • तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है

  • हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा बना रहता है

  • सड़क संपर्क टूटने से आपात स्थितियाँ गंभीर रूप ले सकती हैं

इसी कारण इस मार्ग की त्वरित बहाली राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टि—दोनों से अनिवार्य थी।


बचाव एवं सड़क बहाली अभियान का क्रियान्वयन

BRO ने बिना समय गंवाए उच्च-ऊँचाई सड़क बहाली अभियान शुरू किया। यह कार्य:

  • 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी (RCC) द्वारा किया गया

  • यह इकाई 35 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (BRTF) के अंतर्गत

  • प्रोजेक्ट संपर्क (Project Sampark) का हिस्सा है

अभियान की प्रमुख विशेषताएँ:

  • कार्य की शुरुआत 24 जनवरी 2026 की सुबह हुई

  • तापमान शून्य से नीचे होने के बावजूद

  • BRO कर्मियों ने लगभग 40 घंटे तक लगातार काम किया

  • भारी बर्फ हटाने के लिए स्नो-कटर, बुलडोज़र और विशेष उपकरणों का उपयोग किया गया

इन अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद, BRO ने 25 जनवरी 2026 की शाम तक सड़क को यातायात के लिए फिर से खोल दिया।


निकासी और मानवीय सहायता

सड़क बहाल होते ही BRO ने बचाव अभियान के अगले चरण को अंजाम दिया। इसके तहत:

  • 20 फंसे हुए नागरिकों

  • राष्ट्रीय राइफल्स (National Rifles) के 40 सैनिकों

को उनके हथियारों और आवश्यक सामान के साथ सुरक्षित निकाला गया।

यह पूरा निकासी अभियान 26 जनवरी 2026 को सुबह 02:30 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई

यह उपलब्धि BRO कर्मियों की:

  • उत्कृष्ट योजना

  • प्रशिक्षण

  • मानसिक और शारीरिक दृढ़ता

को दर्शाती है।


भारतीय सेना के साथ घनिष्ठ समन्वय

यह पूरा अभियान भारतीय सेना के साथ घनिष्ठ समन्वय में संचालित किया गया। दोनों संस्थाओं के बीच:

  • बेहतर संचार व्यवस्था

  • सुरक्षा प्रबंधन

  • त्वरित निर्णय प्रक्रिया

सुनिश्चित की गई।

यह संयुक्त प्रयास इस बात को रेखांकित करता है कि उच्च-ऊँचाई और सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के लिए नागरिक–सैन्य सहयोग कितना आवश्यक है


सीमा सड़क संगठन (BRO): दुर्गम इलाकों में राष्ट्र निर्माण की धुरी

सीमा सड़क संगठन भारत की प्रमुख अवसंरचना निर्माण संस्थाओं में से एक है, जो:

  • सीमावर्ती

  • पर्वतीय

  • बर्फीले और

  • रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों

में सड़कों, पुलों और सुरंगों के निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाता है।

BRO का आदर्श वाक्य “श्रमेण सर्वं साध्यम्” (परिश्रम से सब कुछ संभव है) इस अभियान में पूरी तरह चरितार्थ हुआ। दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक हालात में काम करते हुए BRO न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती देता है, बल्कि आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय सहायता में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।

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