केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र और गुजरात में ₹2,781 करोड़ के रेल मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंज़ूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र और गुजरात में ₹2,781 करोड़ के रेल मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंज़ूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र और गुजरात में ₹2,781 करोड़ के रेल मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंज़ूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक कार्य मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने 26 नवंबर 2025 को रेलवे अवसंरचना को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया। सरकार ने ₹2,781 करोड़ की दो महत्वपूर्ण रेल मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंज़ूरी प्रदान की है, जो महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में रेल क्षमता, कनेक्टिविटी और परिवहन दक्षता को नए स्तर पर ले जाएँगी।

इन परियोजनाओं से कुल 224 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा और महाराष्ट्र–गुजरात के 4 जिलों के 585 गाँवों में रह रहे 32 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही रेलवे की यात्री सेवाओं, माल ढुलाई गति, क्षेत्रीय विकास और पर्यटन में भी उल्लेखनीय सुधार होंगे।


1. देवभूमि द्वारका (ओखा) – कनालुस डबलिंग परियोजना

  • लंबाई: 141 किलोमीटर

  • राज्य: गुजरात

यह परियोजना गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। देवभूमि द्वारका, जिसे पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है, तक पहुँच को बेहतर बनाने में यह डबलिंग प्रोजेक्ट बड़ी भूमिका निभाएगा।

मुख्य लाभ और प्रभाव

1. धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

द्वारका धाम भारत के सबसे प्राचीन और प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। डबलिंग परियोजना से ट्रेन आवृत्ति और समयबद्धता में सुधार होगा, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।

2. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी

सौराष्ट्र क्षेत्र में सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी लंबे समय से एक प्रमुख आवश्यकता रही है। यह परियोजना वहाँ के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच तेज़ और सुचारू रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी।

3. माल ढुलाई में वृद्धि

थोक माल (Bulk Freight) — जैसे कृषि उपज, रसायन, पेट्रो-उत्पाद, और औद्योगिक सामग्री — की आवाजाही को इससे महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा। बेहतर लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाएगा और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देगा।


2. बदलापुर – कर्जत तीसरी और चौथी लाइन परियोजना

  • लंबाई: 32 किलोमीटर

  • राज्य: महाराष्ट्र

  • कैरिडोर: मुंबई उपनगरीय रेलवे नेटवर्क

मुंबई उपनगरीय रेलवे दुनिया के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोरों में से एक है। लाखों दैनिक यात्रियों की आवाजाही इसी नेटवर्क पर निर्भर है। बढ़ती मांग को देखते हुए तीसरी और चौथी लाइन परियोजना अत्यंत आवश्यक कदम है।

मुख्य लाभ और प्रभाव

1. भीड़-भाड़ में कमी

मुंबई स्थानीय ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ की समस्या लंबे समय से रही है। नई लाइनों के जुड़ने से यात्री भीड़ में राहत मिलेगी और ट्रेनें अधिक नियमित अंतराल पर चल सकेंगी।

2. दक्षिण भारत से बेहतर संपर्क

कर्जत जंक्शन दक्षिण भारत की ओर जाने वाले कई रेल मार्गों का मुख्य कनेक्टर है। बदलापुर–कर्जत सेक्शन को मजबूत होने से लंबी दूरी की ट्रेन संचालन क्षमता भी बढ़ेगी।

3. उपनगरीय यात्रियों को लाभ

मुंबई के मध्य, ठाणे और रायगड़ जिलों में कामकाजी यात्रियों को अधिक विश्वसनीय और समय पर सेवाएँ मिल सकेंगी। यह परियोजना शहर–उपनगर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में सहायक है।


PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से सीधा संबंध

ये दोनों रेल परियोजनाएँ PM Gati Shakti National Master Plan का हिस्सा हैं—एक ऐसी राष्ट्रीय योजना जो देश में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न परिवहन प्रणालियों को एकीकृत करने का लक्ष्य रखती है।

PM गति शक्ति के तहत इन परियोजनाओं के लाभ

  • सहज मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी: सड़क, समुद्री, हवाई और रेल परिवहन में बेहतर समन्वय।

  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: तेज़ माल ढुलाई से उद्योगों को लाभ।

  • परिवहन बाधाएँ कम होंगी: भीड़भाड़ वाले रूटों को वैकल्पिक क्षमता मिलेगी।

  • ईंधन की खपत में कमी: बेहतर और तेज़ रेल संचालन ऊर्जा दक्षता बढ़ाता है।

  • औद्योगिक और कृषि विकास: नई परियोजनाओं से जुड़े जिलों में निवेश और व्यापार को गति मिलेगी।


क्षेत्रीय विकास और रोजगार पर प्रभाव

इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र और गुजरात में—

  • रोजगार सृजन

  • निर्माण गतिविधियों में वृद्धि

  • छोटे कस्बों और गाँवों में आर्थिक गतिविधियाँ

  • पर्यटन और धार्मिक यात्राओं में तेजी

  • स्थानीय उद्योगों की सप्लाई चेन मजबूत होगी

लंबे समय में ये परियोजनाएँ रेल अवसंरचना को उच्च क्षमता वाले नेटवर्क में बदल देंगी, जो दोनों राज्यों के सामाजिक–आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।


मुख्य तथ्य — एक नज़र में

विवरण तथ्य
मंजूरी तिथि 26 नवंबर 2025
कुल लागत ₹2,781 करोड़
कुल नेटवर्क विस्तार 224 किमी
परियोजनाएँ ओखा–कनालुस डबलिंग (141 किमी) ; बदलापुर–कर्जत 3rd & 4th लाइन (32 किमी)
कवर राज्य महाराष्ट्र और गुजरात
लाभार्थी जनसंख्या 32 लाख से अधिक
लाभान्वित गाँव 585

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