देश में पूरी तरह डिजिटल नेशनल हाईवे टोलिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए National Highways Authority of India (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद करने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद देशभर में सभी टोल भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों—FASTag और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)—के ज़रिए ही किए जाएंगे।
NHAI के अनुसार, इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य टोल संचालन को अधिक कुशल बनाना, ट्रैफिक जाम को कम करना और राजस्व संग्रह में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। बीते कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, और अब नकद लेनदेन को पूरी तरह समाप्त कर भारत को कैशलेस हाईवे नेटवर्क की ओर ले जाया जा रहा है।
क्यों बंद किया जा रहा है नकद टोल भुगतान?
टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने के पीछे कई व्यावहारिक और तकनीकी कारण हैं, जो यात्रियों और प्रशासन—दोनों के लिए लाभकारी साबित होंगे।
1. तेज़ यातायात प्रवाह
डिजिटल भुगतान प्रणाली में वाहन को रुकने की ज़रूरत नहीं पड़ती। FASTag जैसी तकनीक से टोल शुल्क अपने आप कट जाता है, जिससे वाहन बिना रुके आगे बढ़ जाते हैं। इससे हाईवे पर यात्रा कहीं अधिक सुगम और तेज़ हो जाती है।
2. भीड़ और जाम में कमी
नकद लेनदेन में समय अधिक लगता है—पैसे गिनना, रसीद देना और वापस पैसे लौटाना प्रक्रिया को धीमा कर देता है। कैशलेस सिस्टम लंबी कतारों को कम करता है और टोल प्लाजा पर जाम की समस्या लगभग खत्म कर देता है।
3. पारदर्शिता और निगरानी में सुधार
डिजिटल लेनदेन पूरी तरह रिकॉर्ड में रहते हैं, जिससे राजस्व की चोरी या गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है। इससे सरकार और टोल एजेंसियों दोनों के लिए निगरानी आसान होती है।
4. बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव
ड्राइवरों को बार-बार रुकने, पैसे निकालने या छुट्टे की परेशानी से छुटकारा मिलेगा। एक सहज और आधुनिक यात्रा अनुभव देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
1 अप्रैल 2026 से कौन-कौन से डिजिटल माध्यम होंगे मान्य?
नकद भुगतान बंद होने के बाद मुख्य रूप से दो डिजिटल विकल्प उपलब्ध होंगे:
✔️ FASTag
यह एक रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली है, जो वाहन से जुड़े प्रीपेड या बैंक खाते से टोल शुल्क अपने आप काट लेती है।
✔️ UPI (Unified Payments Interface)
मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत भुगतान की सुविधा देने वाला यह सिस्टम भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है, जिसे National Payments Corporation of India संचालित करता है।
हालाँकि अधिकांश वाहनों के लिए FASTag पहले से अनिवार्य है, लेकिन अब यह पूरी तरह लागू किया जाएगा और नकद व डिजिटल लेन के मिश्रित मॉडल को समाप्त कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
वर्तमान में भारत में 1,150 से अधिक टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। पूर्ण डिजिटल टोलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद इसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे—
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यातायात प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार
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टोल प्लाजा पर प्रतीक्षा समय में भारी कमी
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सड़क सुरक्षा में वृद्धि
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परिवहन क्षेत्र में डिजिटल अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण
यह बदलाव भारत सरकार की डिजिटल इंडिया और स्मार्ट मोबिलिटी योजनाओं के अनुरूप है, जो देश को आधुनिक परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने का लक्ष्य रखती हैं।
FASTag क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक स्टिकर होता है, जिसे वाहन के शीशे पर लगाया जाता है। इसमें RFID तकनीक लगी होती है, जिससे टोल बूथ पर लगे सेंसर वाहन को पहचान लेते हैं और शुल्क स्वतः कट जाता है।
FASTag के प्रमुख लाभ:
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टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं
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तेज़ और स्वचालित भुगतान
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हर लेनदेन पर SMS अलर्ट
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कम ईंधन खपत और प्रदूषण में कमी
इन फायदों के कारण FASTag भारत में डिजिटल टोलिंग का आधार बन चुका है।
डिजिटल टोलिंग की दिशा में NHAI की यात्रा
NHAI ने पिछले एक दशक में टोल प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2019 में FASTag का राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोलआउट शुरू हुआ था, जिसे धीरे-धीरे सभी टोल प्लाजा पर अनिवार्य किया गया।
अब नकद भुगतान को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला इस प्रक्रिया का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इससे भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दुनिया के सबसे उन्नत डिजिटल हाईवे सिस्टम में शामिल हो सकेगा।

