केंद्र सरकार ने उच्च न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों से जुड़े मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। ये फैसले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर लिए गए हैं और इसका उद्देश्य उच्च न्यायालयों में नेतृत्व की निरंतरता, न्यायिक स्थिरता और सुचारु कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना है।
इन नियुक्तियों को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब देश की न्यायिक व्यवस्था लंबित मामलों के बोझ, न्यायिक सुधारों और संस्थागत दक्षता को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
खबर में क्यों?
केंद्र सरकार ने केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण से संबंधित अधिसूचना जारी की है। ये निर्णय दिसंबर 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में की गई सिफारिशों के अनुरूप हैं।
इससे उच्च न्यायालयों में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अनिश्चितता समाप्त होगी और न्यायिक कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
नियुक्तियों का संवैधानिक आधार
उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण भारतीय संविधान के स्पष्ट प्रावधानों के तहत किए जाते हैं—
अनुच्छेद 217
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं, की नियुक्ति से संबंधित है। इसके तहत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की जाती है, जिसमें—
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भारत के मुख्य न्यायाधीश
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संबंधित राज्य के राज्यपाल
से परामर्श अनिवार्य होता है।
अनुच्छेद 222
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण कर सकें।
इन दोनों अनुच्छेदों का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना है।
केरल उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश
केरल हाई कोर्ट के लिए एक अहम स्थानांतरण किया गया है—
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न्यायमूर्ति सौमेन सेन, जो वर्तमान में मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं, को स्थानांतरित कर केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
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वे 9 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन मधुकर जमदार के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।
केरल हाई कोर्ट देश के सबसे व्यस्त उच्च न्यायालयों में से एक है, जहाँ संवैधानिक, पर्यावरण और मानवाधिकार से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में न्यायमूर्ति सौमेन सेन से लंबित मामलों के निपटारे और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।
पटना उच्च न्यायालय के लिए नई नियुक्ति
पटना उच्च न्यायालय को भी नया मुख्य न्यायाधीश मिला है—
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न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू, जो वर्तमान में ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, को पटना हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
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उनकी नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।
बिहार जैसे बड़े और जनसंख्या-घनत्व वाले राज्य में आपराधिक, सेवा और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में यह नियुक्ति न्यायिक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
मेघालय उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश
न्यायमूर्ति सौमेन सेन के स्थानांतरण के बाद—
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न्यायमूर्ति रेवती प्रशांत मोहिते डेरे, जो वर्तमान में बॉम्बे उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, को मेघालय उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
मेघालय हाई कोर्ट पूर्वोत्तर भारत में जनजातीय अधिकारों, भूमि विवादों और संविधान की छठी अनुसूची से जुड़े मामलों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस नियुक्ति से क्षेत्र में न्यायिक प्रशासन की निरंतरता बनी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका
इन सभी नियुक्तियों और स्थानांतरणों की सिफारिशें 18 दिसंबर 2025 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में की गई थीं।
कॉलेजियम प्रणाली—
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न्यायिक नियुक्तियों में सर्वोच्च भूमिका निभाती है
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कार्यपालिका के प्रभाव से न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने का माध्यम मानी जाती है
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योग्यता, वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देती है
हालांकि कॉलेजियम प्रणाली पर समय-समय पर बहस होती रही है, लेकिन वर्तमान में यही उच्च न्यायिक नियुक्तियों की मान्य प्रक्रिया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत प्रक्रिया इस प्रकार होती है—
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प्रस्ताव की शुरुआत संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा
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दो वरिष्ठतम सहयोगी न्यायाधीशों से परामर्श
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प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री को भेजा जाता है
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राज्यपाल के माध्यम से केंद्रीय कानून मंत्री तक भेजा जाता है
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अंततः सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है
नीति के अनुसार, किसी राज्य के हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश आमतौर पर उसी राज्य के बाहर से नियुक्त किया जाता है, ताकि स्थानीय प्रभाव से निष्पक्षता बनी रहे।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियुक्तियाँ?
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उच्च न्यायालयों में प्रशासनिक स्थिरता आएगी
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लंबित मामलों के निपटारे में तेजी संभव
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निचली अदालतों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा
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न्यायिक सुधारों और डिजिटल पहल को बढ़ावा

