कपास उत्पादकता में वृद्धि हेतु विशेष मिशन

चर्चा में क्यों है कपास उत्पादकता मिशन?

भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में एक दूरदर्शी पहल करते हुए ‘कपास उत्पादकता मिशन’ की शुरुआत की है। यह मिशन भारत के वस्त्र उद्योग को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और देश को कपड़ा निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने की दृष्टि से शुरू किया गया है। यह पहल ‘वस्त्र विजन 2030’ के अंतर्गत आती है, जिसका उद्देश्य है — वर्ष 2030 तक भारत को 250 अरब अमेरिकी डॉलर के वस्त्र उद्योग और 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ एक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण हब में परिवर्तित करना।


कपास उत्पादकता मिशन क्या है?

‘कपास उत्पादकता मिशन’ एक पाँच वर्षीय केंद्रित कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत में कपास की उत्पादकता को वैज्ञानिक, तकनीकी और संस्थागत उपायों के माध्यम से बढ़ाना है। यह मिशन किसानों को उन्नत बीज, कीट प्रबंधन तकनीकों, जलवायु-स्मार्ट खेती और आधुनिक कृषि यंत्रों से सुसज्जित करेगा। यह प्रयास भारत सरकार के 5F विज़न (Farm to Fiber to Factory to Fashion to Foreign) के अनुरूप है।

इस मिशन का संचालन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) द्वारा किया जाएगा, जबकि वस्त्र मंत्रालय इसमें मुख्य भागीदार के रूप में भूमिका निभाएगा।


मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

  • उन्नत बीज विकास: उच्च उत्पादकता वाली, कीट-रोधी, जलवायु-अनुकूल और विशेष रूप से एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास किस्मों का विकास।

  • फाइबर गुणवत्ता में सुधार: आधुनिक प्रजनन तकनीकों, जैव प्रौद्योगिकी (Biotech Tools) और ट्रेसबिलिटी तकनीकों का उपयोग।

  • किसानों की सशक्तिकरण: खेत स्तर पर आधुनिक उपकरणों और डिजिटल समाधानों जैसे AI-आधारित कीट चेतावनी, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉकचेन ट्रेसबिलिटी।

  • कृषि मूल्य शृंखला का आधुनिकीकरण: पूरे कपास पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक कुशल, टिकाऊ और निर्यातोन्मुख बनाना।


इस मिशन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

कम उत्पादकता की समस्या

भारत भले ही कपास के क्षेत्रफल में विश्व में अग्रणी है (130.61 लाख हेक्टेयर), लेकिन उत्पादकता में यह 39वें स्थान पर है। भारतीय किसानों की औसत उपज लगभग 447 किलोग्राम/हेक्टेयर है, जो अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देशों से काफी कम है।

आयात पर बढ़ती निर्भरता

कपास का आयात लगातार बढ़ रहा है — वर्ष 2024–25 में यह 1.04 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि निर्यात में गिरावट देखी गई है।

PBW संक्रमण और तकनीकी ठहराव

बीटी कपास (Bt Cotton) की सफलता के बाद, भारत में कोई नई GM किस्म 2006 से अब तक मंजूर नहीं हुई है। वहीं, गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) कीट ने Bt प्रोटीन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है।

वैश्विक अवसरों का नुकसान

ब्राज़ील और अमेरिका जैसे देश उन्नत जैव-प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत के पूर्व निर्यात बाजारों में पैठ बना चुके हैं।


भारत में कपास उत्पादन की स्थिति

भारत कपास उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2022-23 में भारत का कुल उत्पादन लगभग 343.47 लाख बेल (5.84 मिलियन मीट्रिक टन) रहा। फिर भी उत्पादकता में हम पीछे हैं। भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पंजाब हैं।

कपास एक संवेदनशील फसल है जिसे उच्च तापमान (43°C तक) सहन होता है, लेकिन 21°C से कम तापमान में इसकी वृद्धि प्रभावित होती है। इसकी सफलता के लिए उचित वर्षा, तापमान का अंतर और अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी आवश्यक होती है।


सरकार की अब तक की पहलें

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)

  • PM MITRA टेक्सटाइल पार्क

  • कस्तूरी कॉटन भारत कार्यक्रम

  • कॉट-एली मोबाइल ऐप

  • MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य)

  • भारतीय कपास निगम (CCI)


आत्मनिर्भरता हेतु आगे के उपाय

  1. जैव-प्रौद्योगिकी का शीघ्र अनुमोदन: Bt 3.0, RNAi तकनीक, और खरपतवार-प्रतिरोधी किस्मों को जल्द मंज़ूरी देना ज़रूरी है।

  2. ELS कपास का विस्तार: प्रीमियम MSP, क्लस्टर मॉडल और अनुबंध खेती से उच्च गुणवत्ता वाले कपास का उत्पादन बढ़ाना।

  3. IPM और PBW नियंत्रण: फेरोमोन ट्रैप, स्टेराइल मेल टेक्निक्स और क्रॉप रोटेशन अपनाना।

  4. डिजिटल कृषि समाधान: AI, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉकचेन से ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना।

  5. जलवायु-स्मार्ट खेती: माइक्रो इरिगेशन, जैविक खेती और सटीक पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना।


निष्कर्ष:

भारत का ‘कपास उत्पादकता मिशन’ केवल कृषि सुधार नहीं, बल्कि आर्थिक और निर्यात नीति का हिस्सा है। यदि इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, कृषक हित और तकनीकी नवाचारों के साथ लागू किया जाए, तो यह:

  • भारत को कपास क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है

  • निर्यात में फिर से भारत की स्थिति को मज़बूत कर सकता है

  • किसानों की आमदनी को बढ़ा सकता है

  • वस्त्र क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकता है

यह मिशन भारत को SDG-2 (शून्य भूख), SDG-8 (आर्थिक विकास), SDG-9 (नवाचार) जैसे सतत् विकास लक्ष्यों की दिशा में भी आगे बढ़ाता है।

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