अमेरिका की व्यापार नीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। Donald Trump के नए टैरिफ आदेश को अमेरिकी Supreme Court of the United States ने 20 फरवरी 2026 को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी के ऊपर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने वाले नए आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।
यह नया टैरिफ करीब 5 महीने (150 दिन) के लिए लागू रहेगा और 25 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बावजूद ट्रंप अपनी सख्त ट्रेड पॉलिसी को किसी भी तरह आगे बढ़ाने के मूड में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप का टैरिफ क्यों रद्द किया?
सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के अनुसार—
-
राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर टैरिफ लगाए
-
कांग्रेस की भूमिका को दरकिनार किया गया
-
आपातकालीन शक्तियों का अनुचित उपयोग हुआ
इस फैसले के साथ ही ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए कई अंतरराष्ट्रीय टैरिफ स्वतः समाप्त हो गए और अमेरिका में वही पुरानी टैरिफ व्यवस्था वापस लागू हो गई जो ट्रंप के सत्ता में आने से पहले मौजूद थी।
उदाहरण के तौर पर, भारत पर पहले औसतन 3 से 4 प्रतिशत का ही टैरिफ लगता था, जो कोर्ट के फैसले के बाद फिर से लागू हो गया।
फिर ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ कैसे लगा दिया?
सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने अब एक अलग कानूनी रास्ता अपनाया। उन्होंने Trade Act of 1974 की धारा 122 का सहारा लिया।
इस कानून के तहत—
-
राष्ट्रपति 150 दिनों तक
-
अधिकतम 15% तक
-
अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं
अगर देश को भुगतान संतुलन (Balance of Payments) या भारी व्यापार घाटे की समस्या हो।
इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप ने सभी आयातों पर बिना किसी भेदभाव के 10% टैरिफ लागू करने का ऐलान किया।
यदि इसे 150 दिनों से आगे बढ़ाना होगा, तो कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी।
10% अमेरिकी आयात टैरिफ का मतलब क्या है?
इस नए आदेश के तहत अमेरिका में आने वाले हर विदेशी उत्पाद पर—
➡ पहले से लगे टैरिफ के अलावा
➡ अतिरिक्त 10% कर लगेगा
इसमें शामिल हैं:
-
राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत लगाए गए सेक्शन 232 टैरिफ
-
अनुचित व्यापार प्रथाओं पर आधारित सेक्शन 301 टैरिफ
इसके संभावित असर:
आयातित वस्तुएँ महंगी होंगी
अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा
निर्यातक देशों की प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी
जवाबी टैरिफ से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह कदम फिर से वैश्विक व्यापार युद्ध को हवा दे सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि भारत को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी। यानी भारत से अमेरिका जाने वाले सभी सामानों पर भी अतिरिक्त 10% टैक्स लगेगा।
सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर:
-
वस्त्र और परिधान उद्योग
-
इस्पात और धातु उत्पाद
-
इंजीनियरिंग सामान
-
ऑटो कंपोनेंट्स
पहले भी अमेरिका ने भारत पर कुछ उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बातचीत के जरिए करीब 18% तक कम किया गया था। अब नया 10% टैरिफ लागत को फिर से बढ़ा देगा।
👉 इससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे होंगे
👉 निर्यात मांग घट सकती है
👉 रोजगार और उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है
हालांकि कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि यह स्थिति भारत को “मेक इन इंडिया” के तहत घरेलू विनिर्माण को और मजबूत करने का अवसर भी दे सकती है।
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
ट्रंप का यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। इसके वैश्विक परिणाम हो सकते हैं—
चीन और यूरोपीय संघ की ओर से जवाबी टैरिफ
वैश्विक आर्थिक वृद्धि में सुस्ती
शेयर बाजारों में अस्थिरता
विकासशील देशों की मुद्राओं पर दबाव
विशेषज्ञों को डर है कि अगर बड़े देश आमने-सामने आ गए, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार लंबे समय तक प्रभावित हो सकता है।
मुख्य तथ्य एक नजर में
-
नया टैरिफ: सभी आयात पर 10%
-
कानूनी आधार: Trade Act of 1974 की धारा 122
-
अधिकतम अवधि: 150 दिन
-
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी 2026
-
टैरिफ लागू होने की तारीख: 25 फरवरी 2026
-
पहले चुनौती दिया गया कानून: IEEPA

