रक्षा मंत्रालय ने 1 अगस्त 2025 को घोषणा की कि डॉ. मयंक शर्मा ने आधिकारिक रूप से वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवा) के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वे भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS) के 1989 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं और तीन दशकों से अधिक का प्रशासनिक, वित्तीय और रणनीतिक अनुभव अपने साथ लेकर आए हैं।
उनकी नियुक्ति न केवल रक्षा क्षेत्र के भीतर वित्तीय अनुशासन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभवी और बहुआयामी नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।
सरकारी सेवा में एक विशिष्ट करियर
डॉ. मयंक शर्मा का कार्यकाल विभिन्न प्रतिष्ठित और रणनीतिक पदों पर रहा है। उन्होंने नियंत्रक जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (CGDA) के रूप में कार्य करते हुए रक्षा सेवाओं में वित्तीय संसाधनों की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने रक्षा बजट, लेखा परीक्षा, और वित्तीय पारदर्शिता को प्राथमिकता दी।
उनका अनुभव केवल वित्त तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कैबिनेट सचिवालय में अवर सचिव, उप सचिव और संयुक्त सचिव के रूप में भी सेवाएँ दी हैं। इन भूमिकाओं में उन्होंने राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व
डॉ. शर्मा की विशेषज्ञता ने उन्हें वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिलाई है। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व निम्नलिखित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में किया:
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संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ और अपराध कार्यालय (UNODC)
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संयुक्त राष्ट्र अपराध निवारण और आपराधिक न्याय आयोग (CCPCJ)
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संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (UNCITRAL) में भारत के वैकल्पिक स्थायी प्रतिनिधि
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इंटरनेशनल एंटी-करप्शन एकेडमी, विएना
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डिप्लोमैटिक एकेडमी ऑफ विएना
इन सभी संस्थानों से जुड़े रहकर उन्होंने भारत की वैश्विक कूटनीतिक, विधिक और भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ किया। विशेष रूप से भ्रष्टाचार विरोधी मंचों पर उनकी भागीदारी से भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और परिप्रेक्ष्य प्राप्त हुआ।
रक्षा से परे, सार्वजनिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान
डॉ. मयंक शर्मा ने केवल रक्षा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और शहरी प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं:
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दिल्ली नगर निगम (MCD) में अतिरिक्त आयुक्त के रूप में उन्होंने शहरी सेवाओं के प्रबंधन में नेतृत्व किया।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में उप निदेशक (प्रशासन) और वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार के रूप में उन्होंने संस्थान की वित्तीय और मानव संसाधन रणनीतियों को मजबूती दी।
इन भूमिकाओं से स्पष्ट है कि वे वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ जटिल संगठनात्मक प्रणालियों को भी प्रभावशाली ढंग से संचालित करने में सक्षम हैं।
नवीन जिम्मेदारी में अपेक्षाएं और दृष्टिकोण
वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवा) का पद, रक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारी है, जो रक्षा बजट की योजना, निगरानी, लेखा और वित्तीय संसाधनों के कुशल उपयोग से संबंधित है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां रक्षा तैयारियों और रणनीतिक खर्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ऐसे में डॉ. मयंक शर्मा जैसे अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाती है।
उनकी पृष्ठभूमि से यह अपेक्षा की जाती है कि वे न केवल वित्तीय प्रक्रियाओं में दक्षता और पारदर्शिता लाएंगे, बल्कि नीतिगत सुधारों को भी आगे बढ़ाएंगे जो रक्षा क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता और क्षमता प्रदान करें।
निष्कर्ष: एक नई दिशा की शुरुआत
डॉ. मयंक शर्मा का पदभार ग्रहण करना भारत के रक्षा प्रशासनिक तंत्र के लिए एक प्रेरणादायक क्षण है। उनकी बहुआयामी पृष्ठभूमि — जिसमें वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक नेतृत्व, और अंतरराष्ट्रीय समझ शामिल है — उन्हें इस भूमिका के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त बनाती है।
यह नियुक्ति भारत सरकार की उस सोच को भी रेखांकित करती है जिसमें अनुभव, दूरदर्शिता और वैश्विक दृष्टिकोण वाले अधिकारियों को रणनीतिक पदों पर प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में डॉ. शर्मा का योगदान भारत की रक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

