DRDO ने दूरदराज़ इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए पोर्टेबल वॉटर प्यूरीफायर विकसित किया

DRDO ने दूरदराज़ इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए पोर्टेबल वॉटर प्यूरीफायर विकसित किया

भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आधुनिक युद्ध और सीमा सुरक्षा केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में एक अहम उपलब्धि के रूप में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने एक पोर्टेबल और हाथ से संचालित जल शुद्धिकरण प्रणाली विकसित की है, जो खारे पानी को सुरक्षित पेयजल में बदलने में सक्षम है।

यह प्रणाली विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है जहाँ मीठे पानी की उपलब्धता अत्यंत सीमित है—जैसे तटीय इलाके, ऊँचे हिमालयी क्षेत्र और आंतरिक खारे जल वाले इलाके। यह नवाचार दूरदराज़ और कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों की आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य और परिचालन क्षमता को नई मजबूती देता है।


क्यों है यह ख़बरों में?

यह विकास इसलिए चर्चा में है क्योंकि DRDO ने—

  • हाथ से संचालित सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS) विकसित किया है

  • यह प्रणाली खारे पानी को पीने योग्य बनाती है

  • इसे दूरस्थ, तटीय और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए डिज़ाइन किया गया है

यह प्रणाली डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित की गई है, जो कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों के लिए रक्षा-उपयोगी तकनीकों के विकास में अग्रणी रही है।


SWaDeS क्या है?

सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS) एक हल्की, पोर्टेबल और फील्ड-अनुकूल जल शुद्धिकरण प्रणाली है, जिसका उद्देश्य—

  • खारे या लवणीय पानी को

  • सुरक्षित और मानक-अनुकूल पेयजल में बदलना

है।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि—

  • इसे मैन्युअल रूप से भी चलाया जा सकता है

  • और आवश्यकता पड़ने पर इंजन की सहायता से भी संचालित किया जा सकता है

इससे यह अलग-थलग तैनाती और आपात परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी बन जाती है।


प्रमुख विशेषताएँ और तकनीकी क्षमता

SWaDeS को सैनिकों की वास्तविक ज़मीनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • मैन्युअल संस्करण इतना हल्का है कि एक सैनिक इसे आसानी से उठा और संचालित कर सकता है

  • आपात स्थिति में 10–12 सैनिकों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम

  • इंजन-संचालित संस्करण 20–25 सैनिकों के लिए पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करा सकता है

  • लंबी दूरी की गश्त और अलग-थलग चौकियों के लिए उपयुक्त

  • पानी की लवणता को 35,000 mg/L TDS से घटाकर 500 mg/L से कम कर देता है

यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पेयजल मानकों के अनुरूप है, जिससे यह प्रणाली स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सुरक्षित मानी जाती है।


जल-अभाव वाले क्षेत्रों में एक बड़ा समाधान

भारत की सेनाएँ ऐसे कई इलाकों में तैनात रहती हैं जहाँ—

  • पानी के स्रोत खारे या प्रदूषित होते हैं

  • बोतलबंद पानी की आपूर्ति कठिन होती है

  • लॉजिस्टिक सप्लाई पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो जाती है

SWaDeS इस समस्या का स्थानीय और त्वरित समाधान प्रदान करता है। सैनिक अब आसपास उपलब्ध जल स्रोतों—चाहे वह समुद्री पानी हो या खारा झील जल—को उपयोग में ला सकते हैं।


संचालनात्मक और रणनीतिक उपयोग

SWaDeS की उपयोगिता केवल थल सेना तक सीमित नहीं है।

इसका प्रयोग किया जा सकता है—

  • नौसेना अभियानों और तटीय प्रतिष्ठानों में

  • सीमावर्ती द्वीपों और दूरस्थ चौकियों पर

  • आंतरिक खारे जल वाले क्षेत्रों जैसे पैंगोंग त्सो

  • ऊँचाई वाले हिमालयी इलाकों में, जहाँ मीठा पानी दुर्लभ है

यह प्रणाली उन परिस्थितियों में विशेष रूप से उपयोगी है, जहाँ सैनिकों को लंबे समय तक बिना नियमित आपूर्ति के तैनात रहना पड़ता है।


सैनिकों की आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्वच्छ पेयजल की अनुपलब्धता—

  • जलजनित रोगों

  • थकान और संक्रमण

  • और मिशन की प्रभावशीलता में कमी

का कारण बन सकती है।

SWaDeS—

  • सैनिकों की आत्मनिर्भरता बढ़ाता है

  • लॉजिस्टिक बोझ कम करता है

  • चिकित्सा जोखिमों को घटाता है

  • और लंबे अभियानों के दौरान ऑपरेशनल निरंतरता सुनिश्चित करता है

यह दिखाता है कि छोटे लेकिन व्यावहारिक तकनीकी समाधान भी लड़ाकू क्षमता पर बड़ा असर डाल सकते हैं।


आत्मनिर्भर भारत और DRDO की भूमिका

SWaDeS आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण है—

  • पूरी तरह स्वदेशी डिज़ाइन और विकास

  • आयातित जल-शुद्धिकरण प्रणालियों पर निर्भरता में कमी

  • भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित तकनीक

DRDO का यह प्रयास दर्शाता है कि संगठन केवल मिसाइल, रडार और हथियार प्रणालियाँ ही नहीं, बल्कि सैनिकों की दैनिक जीवन-समर्थन आवश्यकताओं पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।


भविष्य की संभावनाएँ

आने वाले समय में—

  • SWaDeS के अधिक क्षमता वाले संस्करण

  • सौर ऊर्जा आधारित मॉडल

  • आपदा राहत और अर्धसैनिक बलों के लिए अनुकूलन

संभव हैं। इससे यह तकनीक सैन्य-नागरिक दोहरे उपयोग (Dual-Use Technology) का भी उदाहरण बन सकती है।

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