वर्ष 2025 के अंत में भारत के श्रम बाज़ार (Labour Market) से जुड़े आँकड़े एक उत्साहजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। नवीनतम मासिक डेटा के अनुसार, दिसंबर 2025 में महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR) वर्ष के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गए, जबकि कुल बेरोज़गारी दर मोटे तौर पर स्थिर बनी रही।
ये आँकड़े संकेत देते हैं कि निरंतर आर्थिक गतिविधियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की स्थिति में धीरे-धीरे लेकिन ठोस सुधार हो रहा है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस रिकवरी का सबसे सकारात्मक पहलू मानी जा रही है।
क्यों चर्चा में है?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के दिसंबर 2025 मासिक बुलेटिन में बताया गया है कि:
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महिला LFPR और WPR वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए
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कुल बेरोज़गारी दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ
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ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी अपेक्षाकृत तेज़ रही
ये आँकड़े भारत की श्रम बाज़ार रिकवरी को लैंगिक और क्षेत्रीय दृष्टि से समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
PLFS मासिक बुलेटिन क्या है?
PLFS का संचालन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किया जाता है।
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जनवरी 2025 से PLFS की पद्धति में बदलाव किया गया
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इसके तहत अब मासिक और त्रैमासिक अनुमान जारी किए जा रहे हैं
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सर्वेक्षण में वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) पद्धति का उपयोग होता है
PLFS तीन प्रमुख श्रम बाज़ार संकेतक प्रकाशित करता है:
LFPR, WPR और बेरोज़गारी दर (UR)।
दिसंबर 2025 का बुलेटिन इस नई मासिक श्रृंखला का नौवां प्रकाशन है।
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में निरंतर बढ़ोतरी
15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के लिए कुल LFPR दिसंबर 2025 में बढ़कर 56.1% हो गया, जबकि नवंबर 2025 में यह 55.8% था। यह वर्ष का सबसे ऊँचा स्तर है।
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ग्रामीण LFPR बढ़कर 59.0%
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शहरी LFPR में हल्की गिरावट, यह 50.2% रहा
यह ट्रेंड बताता है कि कामकाजी आयु की आबादी, खासकर ग्रामीण भारत में, आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय हो रही है।
महिला LFPR वर्ष के उच्चतम स्तर पर
दिसंबर 2025 के बुलेटिन की सबसे अहम उपलब्धि महिला श्रम भागीदारी में सुधार है।
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15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए महिला LFPR बढ़कर 35.3%
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यह वर्ष का सर्वोच्च स्तर है
क्षेत्रीय रुझान:
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ग्रामीण महिला LFPR बढ़कर 40.1%
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शहरी महिला LFPR हल्की गिरावट के साथ 25.3%
ये आँकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण भारत में महिलाएँ तेजी से श्रम बाज़ार से जुड़ रही हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में सुधार अपेक्षाकृत धीमा है।
कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR) में सुधार
WPR, यानी वास्तव में कार्यरत जनसंख्या का अनुपात, में भी निरंतर वृद्धि देखी गई है।
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कुल WPR (15+ आयु) दिसंबर 2025 में 53.4%
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नवंबर 2025 में यह 53.2% था
ग्रामीण क्षेत्र:
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ग्रामीण पुरुष WPR: 76.0%
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ग्रामीण महिला WPR: 38.6%
शहरी क्षेत्र:
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शहरी पुरुष WPR: 70.4% (हल्की गिरावट)
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शहरी महिला WPR: लगभग 23%, लगभग स्थिर
कुल मिलाकर, महिला WPR बढ़कर 33.6% हो गया, जो महिला श्रमिकों के बेहतर रोज़गार अवशोषण को दर्शाता है।
बेरोज़गारी दर लगभग स्थिर
श्रम भागीदारी और रोज़गार में सुधार के बावजूद कुल बेरोज़गारी दर (UR) दिसंबर 2025 में 4.8% पर लगभग स्थिर रही, जबकि नवंबर में यह 4.7% थी।
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ग्रामीण UR: 3.9%, कोई बदलाव नहीं
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शहरी UR: बढ़कर 6.7%
एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत यह है कि:
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शहरी महिला बेरोज़गारी दर घटकर 9.1%
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अक्टूबर 2025 में यह 9.7% के वार्षिक उच्च स्तर पर थी
यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं पर रोजगार का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है।
लैंगिक और क्षेत्रीय रुझान
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ग्रामीण पुरुष बेरोज़गारी दर 4.1% पर निम्न और स्थिर
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शहरी महिलाओं में बेरोज़गारी में गिरावट, भले ही कुल शहरी UR बढ़ी हो
ये रुझान बताते हैं कि श्रम बाज़ार की रिकवरी:
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असमान है
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लेकिन धीरे-धीरे अधिक व्यापक और समावेशी होती जा रही है
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और इसमें ग्रामीण क्षेत्र नेतृत्व कर रहे हैं
प्रमुख श्रम बाज़ार संकेतकों का अर्थ
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LFPR: कार्यरत या काम की तलाश में लगे लोगों का अनुपात
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WPR: वास्तव में कार्यरत जनसंख्या का अनुपात
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UR: श्रम बल में शामिल लेकिन बेरोज़गार व्यक्तियों का प्रतिशत

