प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के पाँच वर्ष : उपलब्धियाँ और प्रभाव
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के पाँच वर्ष : उपलब्धियाँ और प्रभाव

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के पाँच वर्ष : उपलब्धियाँ और प्रभाव

भारत का मत्स्य क्षेत्र (Fisheries Sector) लंबे समय से ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और विदेशी मुद्रा अर्जन का आधार रहा है। लेकिन बिखरी हुई संरचना, अपर्याप्त अवसंरचना और असंगठित मूल्य श्रृंखला ने इसकी पूरी क्षमता को लंबे समय तक बाधित किया। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 10 सितम्बर 2020 को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) की शुरुआत की गई।

पाँच वर्षों में यह योजना भारत के मत्स्य क्षेत्र को एक पर्यावरणीय रूप से स्थायी, आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से समावेशी उद्योग के रूप में पुनर्गठित करने में मील का पत्थर साबित हुई है। सरकार ने इसे 2025–26 तक उसी वित्तीय संरचना के साथ विस्तार भी दिया है, ताकि भारत की “नीली क्रांति” (Blue Revolution) को और गहराई मिल सके।


योजना का मुख्य उद्देश्य

PMMSY की परिकल्पना मत्स्य उत्पादन, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी और पश्च-फसल (Post-Harvest) अवसंरचना में मौजूद अंतरालों को दूर करने के लिए की गई। इसके तीन मुख्य आयाम रहे –

  1. उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना

  2. निर्यात क्षमता और प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ करना

  3. मछुआरों व मत्स्य किसानों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना


पाँच वर्षों की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

1. उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि

  • 2024–25 में भारत का कुल मत्स्य उत्पादन 195 लाख टन तक पहुँच गया।

  • यह उपलब्धि 2013–14 की तुलना में 104% की वृद्धि को दर्शाती है।

  • आंतरिक मत्स्य क्षेत्र (Inland Fisheries) में वृद्धि और भी प्रभावशाली रही, जहाँ इसी अवधि में 142% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

2. वैश्विक स्थिति

भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश बन चुका है। यह उपलब्धि न केवल उत्पादन क्षमता का प्रतीक है बल्कि वैश्विक मत्स्य व्यापार में भारत की मज़बूत स्थिति को भी दर्शाती है।

3. निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता

  • मत्स्य निर्यात में निरंतर वृद्धि हुई है।

  • भारत की झींगा (Shrimp) और अन्य समुद्री उत्पादों ने वैश्विक बाजार में अपनी पहचान और मजबूत की।

  • इससे न केवल विदेशी मुद्रा आय बढ़ी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी भी मजबूत हुई।


वित्तीय प्रतिबद्धताएँ और अवसंरचना विकास

PMMSY के पाँच वर्षों में सरकार ने बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश और अवसंरचना विकास सुनिश्चित किया –

  • अब तक ₹21,274 करोड़ मूल्य की परियोजनाएँ राज्यों और एजेंसियों को स्वीकृत की गईं।

  • ₹9,189 करोड़ केंद्रीय अंश में से ₹5,587 करोड़ व्यय हेतु जारी किए गए।

  • मत्स्य बंदरगाहों, कोल्ड स्टोरेज चेन और बाजार अवसंरचना हेतु ₹17,210 करोड़ का आवंटन किया गया।

पीएम-मत्य्स किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY)

वर्ष 2024 में एक नई उप-योजना शुरू की गई — PM-MKSSY

  • इसका बजट ₹6,000 करोड़ रखा गया।

  • मुख्य उद्देश्य :

    • मत्स्य क्षेत्र का औपचारिककरण,

    • बीमा कवरेज का विस्तार,

    • मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत बनाना।


मछुआरों का सशक्तिकरण और डिजिटल आधार

PMMSY ने केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ाया, बल्कि मछुआरों और मत्स्य किसानों को सशक्त बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया –

  • 26 लाख मछुआरे, उद्यमी और FFPOs राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (NFDP) पर पंजीकृत हुए।

  • 4.76 लाख किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) मछुआरों व मत्स्य कृषकों को प्रदान किए गए।

  • ₹3,214 करोड़ की राशि ऋण एवं वित्तीय सहायता के रूप में वितरित की गई।

  • सहकारी संस्थाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विपणन अवसरों के माध्यम से मछुआरों को संगठित और आत्मनिर्भर बनाया गया।


योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  1. आय में वृद्धि :
    मछुआरों और किसानों की आय में औसतन 30–40% तक वृद्धि हुई, क्योंकि उन्हें संगठित बाजार और बेहतर मूल्य श्रृंखला का लाभ मिला।

  2. महिला सशक्तिकरण :
    मत्स्य प्रसंस्करण, विपणन और सहकारी संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने उन्हें नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर प्रदान किए।

  3. क्षेत्रीय विकास :
    पूर्वोत्तर राज्यों और तटीय क्षेत्रों में मत्स्य क्षेत्र ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी।

  4. डिजिटल परिवर्तन :
    NFDP और KCC जैसे प्लेटफॉर्म्स ने मत्स्य क्षेत्र को औपचारिक और तकनीक-सक्षम बनाया।


स्थायी तथ्य और मुख्य बिंदु

  • योजना प्रारम्भ : 10 सितम्बर 2020

  • निष्पादन मंत्रालय : मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय

  • लक्ष्य अवधि : 2025–26 तक विस्तार

  • स्वीकृत परियोजनाएँ : ₹21,274 करोड़ (2025 तक)

  • प्रमुख उप-योजना : PM-MKSSY, ₹6,000 करोड़ (2024)

  • उत्पादन (2024–25) : 195 लाख टन (2013–14 से 104% वृद्धि)

  • वैश्विक स्थान : विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश


चुनौतियाँ और आगे की राह

हालाँकि PMMSY ने ऐतिहासिक सफलता पाई है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ अभी शेष हैं –

  • जलवायु परिवर्तन और समुद्री प्रदूषण से मत्स्य संसाधनों को खतरा।

  • छोटे मछुआरों के पास अभी भी आधुनिक उपकरणों की कमी

  • वैश्विक मानकों और गुणवत्ता प्रमाणन में सुधार की आवश्यकता।

भविष्य की दिशा

  • सतत मत्स्य पालन और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा।

  • निर्यात उत्पादों में विविधता और मूल्य वर्धन पर बल।

  • IoT, ब्लॉकचेन और AI जैसी स्मार्ट तकनीकों का समावेश।

  • मछुआरा समुदायों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच को और मजबूत करना।

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