भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 07 जनवरी 2026 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक चिकित्सक के अनुसार, उन्हें कुछ दिन पहले स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।
उनके निधन से न केवल असम बल्कि पूरे देश की राजनीति, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत में, शोक की लहर दौड़ गई है। उन्हें एक अनुशासित संगठनकर्ता, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध नेता और सरल व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
कबींद्र पुरकायस्थ के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। उनके पुत्र कनाद पुरकायस्थ वर्तमान में असम से राज्यसभा सांसद हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में परिवार की सक्रिय उपस्थिति उनके सार्वजनिक जीवन की विरासत को आगे बढ़ाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री पद
कबींद्र पुरकायस्थ ने 1998–99 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार में संचार राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने देश में संचार अवसंरचना के विस्तार और सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दिया।
यह वह दौर था जब दूरसंचार क्षेत्र में तेज़ बदलाव शुरू हो रहे थे और पुरकायस्थ ने पूर्वोत्तर भारत जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक संचार सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया।
प्रारंभिक जीवन और आरएसएस से जुड़ाव
कबींद्र पुरकायस्थ का जन्म 1931 में तत्कालीन सिलहट ज़िले के कमरखाल में हुआ था (वर्तमान में बांग्लादेश में स्थित)। प्रारंभिक जीवन में वे शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े और शिक्षक के रूप में कार्य किया।
वर्ष 1951 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में उत्तर-पूर्व भारत में संघ के प्रचारक (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) के रूप में कार्य किया। उन्हें एक प्रखर बौद्धिक, अनुशासित संगठनकर्ता और विचारधारा के प्रति समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। संघ के माध्यम से उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को मज़बूत करने का कार्य किया।
संसदीय करियर: सिलचर से तीन बार सांसद
कबींद्र पुरकायस्थ की पहचान असम की बराक घाटी में भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही। वे सिलचर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद चुने गए—
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1991
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1998
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2009
दशकों तक सिलचर का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया। चाहे बुनियादी ढांचा हो, शिक्षा, स्वास्थ्य या क्षेत्रीय विकास—वे हमेशा बराक घाटी की आवाज़ बनकर उभरे। जनता से उनका सीधा और भावनात्मक जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता था।
भाजपा के संस्थापक नेताओं में शामिल
कबींद्र पुरकायस्थ भारतीय जनता पार्टी के उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत में पार्टी की नींव मजबूत की। ऐसे समय में जब इस क्षेत्र में भाजपा की मौजूदगी सीमित थी, उन्होंने संगठन विस्तार, कैडर निर्माण और वैचारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया।
पार्टी के भीतर उन्हें एक वैचारिक स्तंभ और मार्गदर्शक के रूप में सम्मान प्राप्त था। कई पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं ने उन्हें अपना मेंटर माना।
सामाजिक सरोकार और जनसेवा
राजनीति के साथ-साथ कबींद्र पुरकायस्थ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने—
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शरणार्थियों के पुनर्वास कार्यक्रमों
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सामाजिक जागरूकता अभियानों
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क्षेत्रीय विकास से जुड़ी पहलों
में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका मानना था कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य समाज का समग्र कल्याण होना चाहिए। इसी सोच के चलते वे सत्ता से अधिक सेवा को महत्व देते थे।
असम और पूर्वोत्तर के लिए अपूरणीय क्षति
कबींद्र पुरकायस्थ का निधन असम और पूर्वोत्तर भारत की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। वे ऐसे नेता थे, जिन्होंने संगठन, विचारधारा और जनसेवा—तीनों को समान महत्व दिया।
राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर उन्हें एक सम्मानित, शालीन और सिद्धांतवादी नेता के रूप में स्वीकार किया जाता था।

