मैंगलोर की छात्रा रेमोना परेरा ने 170 घंटे लगातार भरतनाट्यम कर रचा विश्व रिकॉर्ड
मैंगलोर की छात्रा रेमोना परेरा ने 170 घंटे लगातार भरतनाट्यम कर रचा विश्व रिकॉर्ड

मैंगलोर की छात्रा रेमोना परेरा ने 170 घंटे लगातार भरतनाट्यम कर रचा विश्व रिकॉर्ड

कर्नाटक के मैंगलोर की रहने वाली बीए अंतिम वर्ष की छात्रा रेमोना परेरा ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे सुनकर दुनिया दंग रह गई। उन्होंने लगातार 170 घंटे तक भरतनाट्यम प्रस्तुत कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि मैंगलोर के सेंट एलोयसियस कॉलेज के रॉबर्ट सेक्वेरा हॉल में सात दिनों तक चले नृत्य प्रदर्शन के बाद 28 जुलाई 2025 को पूरी हुई।

पिछले रिकॉर्ड को पछाड़ा

इससे पहले यह रिकॉर्ड 127 घंटे का था, जो वर्ष 2023 में 16 वर्षीय सुधीर जगपत द्वारा बनाया गया था। लेकिन रेमोना ने इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए कुल 10,200 मिनट यानी 170 घंटे तक भरतनाट्यम नृत्य कर नया इतिहास रच दिया। यह केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं, बल्कि सहनशक्ति, साधना और समर्पण की प्रतीकात्मक मिसाल बन गई है।

महासमर का अंतिम क्षण

जैसे-जैसे अंतिम घंटे नजदीक आता गया, कॉलेज परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल बनता गया। छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और सांस्कृतिक प्रेमियों ने तालियों और जयघोष के साथ इस पल को यादगार बना दिया। समापन के समय गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के एशिया प्रमुख डॉ. मनीष विष्णोई ने मंच पर आकर इस रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से मान्यता दी और इसे “कल्पनातीत” करार देते हुए रेमोना के संकल्प की सराहना की।

नृत्य बना साधना और श्रद्धा का माध्यम

रेमोना का यह प्रदर्शन केवल भौतिक शक्ति का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समर्पण और सांस्कृतिक आस्था का भी प्रतीक था। विश्वविद्यालय के कुलपति फादर प्रवीन मार्टिस ने इस अवसर को “170 घंटे की कृपा और संकल्प” की संज्ञा दी।

नृत्य के दौरान रेमोना ने जपमाला (Rosary) धारण की हुई थी, जिसे उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति का स्रोत बताया। यह पहल स्पष्ट करती है कि उनके लिए भरतनाट्यम केवल कला नहीं, एक ध्यान और भक्ति का माध्यम है।

धार्मिक और सांस्कृतिक समरसता की मिसाल

मैंगलोर के बिशप पीटर पॉल साल्डान्हा सहित कई चर्च नेताओं ने इस आयोजन में भाग लिया और रेमोना की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रसिद्ध बांसुरी वादिका क्लारा डी’कुन्हा ने कहा, “संगीत और नृत्य धार्मिक सीमाओं से परे होते हैं। वे एकता और आपसी सम्मान का संदेश फैलाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मैंगलोर के कई कैथोलिक युवा अब भारतीय शास्त्रीय कलाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो सांस्कृतिक समावेशिता का शुभ संकेत है।

13 वर्षों की सतत साधना

रेमोना पिछले 13 वर्षों से भरतनाट्यम का अभ्यास कर रही हैं। वे गुरु श्री विद्या के मार्गदर्शन में निरंतर साधना कर रही हैं। इस विश्व रिकॉर्ड के लिए उन्होंने कई महीनों तक हर दिन 5 से 6 घंटे तक अभ्यास किया। यह अभ्यास केवल शारीरिक नहीं, मानसिक अनुशासन और ध्यान का भी अभ्यास था।

केवल भरतनाट्यम ही नहीं – एक बहुआयामी कलाकार

रेमोना की कला केवल भरतनाट्यम तक सीमित नहीं है। वे सेमी-क्लासिकल, वेस्टर्न और कंटेम्पररी डांस शैलियों में भी पारंगत हैं, जो उन्हें एक बहुआयामी कलाकार बनाता है। उनके प्रदर्शन में विविधता, लय, ताल और भाव की समृद्धता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

पहले भी बना चुकी हैं कई रिकॉर्ड

रेमोना को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित रिकॉर्डों में जगह मिल चुकी है, जिनमें शामिल हैं:

  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स

  • गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – लंदन

  • भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (2017)

इन सभी उपलब्धियों से यह सिद्ध होता है कि रेमोना केवल प्रतिभाशाली नहीं, बल्कि लगातार सीखने और आगे बढ़ने वाली कलाकार हैं।


निष्कर्ष: रेमोना की उपलब्धि कला और आस्था की जीत

रेमोना परेरा की यह उपलब्धि सिर्फ एक विश्व रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय शास्त्रीय कला आज भी युवाओं में जीवित है और वह नई ऊंचाइयों को छू रही है। रेमोना की यह साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि संस्कार, साधना और समर्पण से कुछ भी असंभव नहीं है।

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