केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान सुधार तकनीकी शिक्षा योजना (MERITE) को मंजूरी दी है। यह ₹4,200 करोड़ की एक महत्वाकांक्षी केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसका उद्देश्य भारत में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और सुशासन को मजबूत करना है। योजना का क्रियान्वयन 2025-26 से 2029-30 के बीच पांच वर्षों तक किया जाएगा और इसमें कुल 275 सरकारी संस्थानों — जिनमें 175 इंजीनियरिंग कॉलेज और 100 पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल होंगे — को जोड़ा जाएगा।
योजना की मुख्य विशेषताएं
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कुल व्यय: ₹4,200 करोड़
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विश्व बैंक सहायता: ₹2,100 करोड़ का ऋण
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अवधि: 5 वर्ष (2025–2030)
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कवरेज: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थान
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मुख्य साझेदार: IIT, IIM, AICTE, NBA और अन्य नियामक संस्थाएं
उद्देश्य और रणनीति
1. अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
MERITE योजना के तहत देशभर में अनुसंधान केंद्र, इनक्यूबेशन सेंटर और नवाचार प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इससे छात्रों और शिक्षकों को उच्च स्तरीय अनुसंधान करने और नई तकनीकों के विकास में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
साथ ही, उद्योग–शैक्षणिक संस्थान सहयोग को मजबूत किया जाएगा, ताकि शोध सीधे उद्योग की जरूरतों से जुड़ सके और उत्पादक परिणाम दे सके।
2. रोजगार क्षमता में सुधार
तकनीकी शिक्षा को बाजार की मांगों के अनुरूप बनाने के लिए पाठ्यक्रम का अद्यतन किया जाएगा।
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इंटर्नशिप और स्किल लैब की व्यवस्था
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मेकर स्पेस और प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग को बढ़ावा
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भाषा एवं संचार कार्यशालाएं आयोजित कर छात्रों की सॉफ्ट स्किल्स में सुधार
3. सुशासन और गुणवत्ता आश्वासन
योजना के तहत मान्यता और गुणवत्ता मानकों के लिए नया ढांचा तैयार होगा। इसमें महिला संकाय पर विशेष ध्यान देते हुए शैक्षणिक प्रशासकों का प्रशिक्षण भी शामिल होगा। इससे संस्थानों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी।
4. बहु-विषयक शिक्षा का प्रोत्साहन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तकनीकी पाठ्यक्रमों में बहु-विषयक कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा। इससे इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य विषयों के बीच बेहतर सहयोग संभव होगा और छात्रों को व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा।
प्रमुख अपेक्षित परिणाम
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, MERITE योजना से—
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7.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को सीधा लाभ होगा।
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तकनीकी संस्थानों की मान्यता दर में वृद्धि होगी।
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तकनीकी पाठ्यक्रम अधिक आधुनिक और बाजार-उन्मुख बनेंगे।
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संकाय का अनुसंधान उत्पादन और उद्योग–शैक्षणिक संबंध मजबूत होंगे।
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राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शिक्षा के डिजिटल परिवर्तन के लिए तैयार किया जाएगा।
सरकारी दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत में “अनुसंधान, नवाचार और स्किलिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने वाला कदम” बताया।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, MERITE सरकार की “भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन और क्रांति लाने की प्रतिबद्धता” का प्रतीक है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह नीति हस्तक्षेप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
पृष्ठभूमि और आवश्यकता
विश्व बैंक की 2023 मूल्यांकन रिपोर्ट ने भारतीय इंजीनियरिंग संस्थानों में कम अनुसंधान उत्पादन और कमजोर नवाचार संबंधों की पहचान की थी। यह भी पाया गया कि उद्योग और शिक्षा जगत के बीच का अंतर छात्रों के कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को सीमित कर रहा है।
MERITE योजना इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है—
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अनुसंधान सुविधाओं के लिए धन उपलब्ध कराना
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संकाय विकास कार्यक्रम लागू करना
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उद्योग साझेदारी को बढ़ावा देना
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डिजिटल लर्निंग और ई-गवर्नेंस को अपनाना
निष्कर्ष
MERITE योजना भारत के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े सुधार का रोडमैप है। यह केवल छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार नहीं करेगी, बल्कि देश को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने में भी मदद करेगी। अनुसंधान, नवाचार, बहु-विषयक शिक्षा और रोजगार क्षमता पर इसका जोर आने वाले वर्षों में भारतीय युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा।

