सरकार ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की घोषणा
सरकार ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की घोषणा

सरकार ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय वृद्धि को मंजूरी दी है। यह फैसला किसानों को बेहतर लाभ सुनिश्चित करने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पहल “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़” भी शुरू की है, जिसका लक्ष्य दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना और आयात पर निर्भरता घटाना है।


MSP क्या है और इसका महत्व

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह सुनिश्चित मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी उपज की खरीद करती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं और कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना है। MSP प्रणाली कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती है:

  • किसानों को उत्पादन लागत पर उचित लाभ सुनिश्चित करना

  • बाजार में मूल्य स्थिरीकरण करना

  • फसल विविधीकरण और खाद्य सुरक्षा को प्रोत्साहित करना

  • संकट की स्थिति में किसानों को भरोसा देना कि उनकी उपज न्यूनतम तय मूल्य पर बिक जाएगी

विशेषकर तब, जब बाजार मूल्य उत्पादन लागत से नीचे चला जाता है, MSP किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।


रबी फसलों के MSP में वृद्धि (2026-27)

केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सभी प्रमुख रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की है। इस बार सबसे अधिक वृद्धि कुसुम (Safflower) के MSP में की गई है, जो ₹600 प्रति क्विंटल है। अन्य प्रमुख फसलों के MSP में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

फसल MSP में वृद्धि (₹/क्विंटल)
कुसुम (Safflower) ₹600
मसूर (Lentil) ₹300
सरसों/तोरी (Rapeseed & Mustard) ₹250
चना (Gram) ₹225
जौ (Barley) ₹170
गेहूँ (Wheat) ₹160

सबसे ज़्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला निर्णय गेहूँ का है। गेहूँ का MSP अब ₹2,585 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹2,425 था। यह 6.6% की वृद्धि है। अनुमान है कि इस बढ़ोतरी से विपणन सत्र 2026-27 के दौरान किसानों को लगभग ₹84,263 करोड़ का लाभ होगा।


उत्पादन लागत पर मार्जिन

MSP तय करते समय उत्पादन लागत और किसानों को मिलने वाले लाभ मार्जिन का विशेष ध्यान रखा गया है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी लागत पर पर्याप्त मुनाफा मिले। अनुमानित लाभ मार्जिन इस प्रकार हैं:

  • गेहूँ : 109%

  • रेपसीड और सरसों : 93%

  • मसूर : 89%

  • चना : 59%

  • जौ : 58%

  • कुसुम : 50%

ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि सरकार केवल खाद्यान्न पर ही नहीं, बल्कि तिलहन और दलहन उत्पादन को भी प्रोत्साहन दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों को अधिक लाभ दिलाना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।


मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़

MSP में बढ़ोतरी के साथ ही, मंत्रिमंडल ने दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए एक बड़ी पहल की है — “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़”। यह कार्यक्रम 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों की अवधि के लिए लागू किया जाएगा। इसका मकसद भारत को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

मिशन की प्रमुख विशेषताएँ

बिंदु विवरण
वित्तीय प्रावधान ₹11,440 करोड़ (छह वर्षों में)
उत्पादन लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक 350 लाख टन दालों का उत्पादन
लाभार्थी किसान लगभग 2 करोड़ किसान गुणवत्तापूर्ण बीज, खरीद आश्वासन और फसल कटाई के बाद सहायता से लाभान्वित होंगे
प्रमुख फोकस क्षेत्र उच्च उत्पादकता वाली, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु-अनुकूल दाल किस्मों का प्रचार
राष्ट्रीय लक्ष्य दालों के आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू बाजार को स्थिर करना

यह मिशन न केवल किसानों को नई तकनीक और बेहतर बीज उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें बाज़ार में स्थिर और उचित मूल्य मिलने की गारंटी भी देगा।


स्थैतिक तथ्य (Exam Friendly Points)

  • गेहूँ का MSP अब ₹2,585/क्विंटल, ₹160 की वृद्धि

  • कुसुम के MSP में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी: ₹600/क्विंटल

  • दलहन मिशन: ₹11,440 करोड़ का प्रावधान, लक्ष्य 350 लाख टन

  • मिशन की अवधि: 2025-26 से 2030-31 तक

  • फ़ोकस: उच्च उपज वाली, जलवायु-प्रतिरोधी किस्में

  • लाभार्थी किसान: 2 करोड़ से अधिक

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