भारत सरकार ने जनवरी 2025 में रबी 2025–26 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient-Based Subsidy – NBS) की दरों को मंज़ूरी देकर किसानों को एक महत्वपूर्ण राहत दी है। ये दरें 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी और फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (P&K) उर्वरकों—जैसे डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और विभिन्न NPKS ग्रेड—पर लागू होंगी।
यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है जब वैश्विक उर्वरक बाज़ार में कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को किफायती और संतुलित उर्वरक उपलब्ध कराना, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना और रबी फसलों की उत्पादकता को स्थिर बनाए रखना है।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
रबी 2025–26 के लिए NBS दरों की घोषणा इसलिए अहम है क्योंकि—
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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में फॉस्फेट और पोटाश की कीमतें अस्थिर हैं
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किसानों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है
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संतुलित उर्वरीकरण के बिना दीर्घकालिक उत्पादकता संभव नहीं
इस फैसले के माध्यम से भारत सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि खाद्य सुरक्षा और किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना क्या है?
NBS योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2010 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग को हतोत्साहित करना और संतुलित पोषक तत्वों (N, P, K, S) के प्रयोग को बढ़ावा देना है।
इस योजना के अंतर्गत—
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नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) और सल्फर (S) पर प्रति किलोग्राम निश्चित सब्सिडी दी जाती है
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सब्सिडी दरें वैश्विक कीमतों और घरेलू आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित होती हैं
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उर्वरकों को पोषक तत्व संरचना के आधार पर सब्सिडी मिलती है, न कि ब्रांड या बाजार मूल्य के आधार पर
इससे उर्वरक बाज़ार में लचीलापन, प्रतिस्पर्धा और दक्षता बढ़ती है।
NBS के अंतर्गत उर्वरकों का विस्तार
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प्रारंभ में: 25 उर्वरक ग्रेड
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वर्तमान में: 28 P&K उर्वरक ग्रेड सब्सिडी के अंतर्गत
खरीफ 2024 से जोड़े गए नए ग्रेड
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NPK (11:30:14) – मैग्नीशियम, जिंक, बोरॉन और सल्फर से फोर्टिफाइड
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यूरिया-SSP (5:15:0:10)
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SSP (0:16:0:11) – मैग्नीशियम, जिंक और बोरॉन से फोर्टिफाइड
रबी 2025–26 का नया समावेशन
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अमोनियम सल्फेट ((NH₄)₂SO₄) को पहली बार NBS के तहत शामिल किया गया
यह कदम फसलों में सल्फर की कमी को दूर करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
रबी 2025–26 के लिए NBS दरें (प्रति किलोग्राम)
सरकार द्वारा स्वीकृत सब्सिडी दरें इस प्रकार हैं—
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नाइट्रोजन (N): ₹43.02/किग्रा
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फॉस्फोरस (P): ₹47.96/किग्रा
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पोटाश (K): ₹2.38/किग्रा
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सल्फर (S): ₹2.87/किग्रा
इन दरों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का बोझ सीधे किसानों पर न पड़े।
DAP सब्सिडी: किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत
DAP भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में से एक है। वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने इसकी सब्सिडी में उल्लेखनीय वृद्धि की है—
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रबी 2024–25: ₹21,911 प्रति मीट्रिक टन
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रबी 2025–26: ₹29,805 प्रति मीट्रिक टन
अन्य प्रमुख उर्वरकों पर सब्सिडी—
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DAP (18-46-0-0): ₹29,805/MT
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MOP (0-0-60-0): ₹1,428/MT
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SSP (0-16-0-11): ₹7,408/MT
अनुपालन और नियामक ढांचा
हालाँकि P&K उर्वरक क्षेत्र डिकंट्रोल्ड है, फिर भी सरकार की कड़ी निगरानी रहती है—
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कंपनियाँ MRP तय करती हैं, लेकिन सरकारी निगरानी में
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लाभ सीमा:
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आयातक: 8%
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निर्माता: 10%
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एकीकृत इकाइयाँ: 12%
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उर्वरक थैलों पर MRP और सब्सिडी का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य
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अधिक मूल्य वसूली पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंड
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ऑडिटेड लागत डेटा प्रस्तुत करना अनिवार्य
बजटीय आवंटन और उत्पादन पर प्रभाव
रबी 2025–26 के लिए अनुमानित बजट: ₹37,952.29 करोड़
यह राशि खरीफ 2025 की तुलना में लगभग ₹736 करोड़ अधिक है।
उत्पादन में सुधार
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P&K उर्वरक उत्पादन:
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2014: 112.19 LMT
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दिसंबर 2025: 168.55 LMT
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खाद्यान्न उत्पादकता
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2010–11: 1,930 किग्रा/हेक्टेयर
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2024–25: 2,578 किग्रा/हेक्टेयर
डिजिटल निगरानी और आपूर्ति प्रबंधन
पूरे उर्वरक तंत्र की निगरानी इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के माध्यम से की जाती है, जो—
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उत्पादन
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परिवहन
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और उपलब्धता
को रियल-टाइम ट्रैक करता है। राज्यों के साथ मासिक आपूर्ति योजना से बुवाई के समय समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

