सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवंबर तक बढ़ाया
सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवंबर तक बढ़ाया

सरकार ने 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवंबर तक बढ़ाया

भारत सरकार ने 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) के कार्यकाल को एक माह के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट 30 नवंबर 2025 तक प्रस्तुत करनी होगी। पहले यह समयसीमा 31 अक्टूबर 2025 तय थी।
यह विस्तार आयोग को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने और विभिन्न राज्यों से मिले इनपुट का गहन विश्लेषण करने का अवसर देगा।

वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 (Article 280) के तहत किया जाता है। यह आयोग केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे, राजकोषीय संतुलन, और आपदा प्रबंधन से संबंधित वित्तीय तंत्र पर सिफारिशें देता है।


16वें वित्त आयोग की पृष्ठभूमि

  • गठन तिथि: 31 दिसंबर 2023

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 280

  • कार्यकाल: 2023–2025

  • अवधि के लिए सिफारिशें: 2026–2031

यह आयोग अगले पांच वर्षों (2026–2031) के लिए भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के विभाजन की दिशा तय करेगा।


आयोग की संरचना

पद नाम
अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (पूर्व उपाध्यक्ष, नीति आयोग)
पूर्णकालिक सदस्य एनी जॉर्ज मैथ्यू (सेवानिवृत्त नौकरशाह)
मनोज पांडा (अर्थशास्त्री)
अंशकालिक सदस्य सौम्यकांति घोष (मुख्य आर्थिक सलाहकार, एसबीआई)
टी. रबी शंकर (उप-गवर्नर, आरबीआई)
सचिव ऋत्विक पांडे

इसके अतिरिक्त, आयोग के पास दो संयुक्त सचिव और एक आर्थिक सलाहकार सहयोगी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।


मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

16वें वित्त आयोग का कार्यभार कई महत्वपूर्ण वित्तीय पहलुओं पर केंद्रित है:

  1. केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करना।

  2. राजस्व वृद्धि के नए उपाय सुझाना, ताकि विकासशील राज्यों को अतिरिक्त संसाधन मिल सकें।

  3. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आपदा प्रत्युत्तर कोष (Disaster Response Fund) और आपदा शमन कोष (Disaster Mitigation Fund) की वित्त व्यवस्था की समीक्षा करना।

  4. राज्य सरकारों की राजकोषीय स्वायत्तता को बढ़ावा देना और उनकी ऋण-प्रबंधन प्रणाली को संतुलित करना।

  5. प्रदर्शन आधारित अनुदान मॉडल (Performance-Based Grants) की सिफारिश करना।


प्रमुख फोकस क्षेत्र

16वें वित्त आयोग की सिफारिशें भारतीय संघीय वित्तीय ढांचे के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होंगी:

  • राजकोषीय समानता (Fiscal Equity):
    राज्यों के बीच संसाधनों का समान और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना ताकि पिछड़े राज्य भी विकास की मुख्यधारा में आ सकें।

  • वित्तीय स्वायत्तता (Fiscal Autonomy):
    राज्यों को उनकी आवश्यकताओं और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार वित्तीय निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करना।

  • राजकोषीय स्थिरता (Debt Sustainability):
    केंद्र और राज्यों दोनों के ऋण स्तरों की स्थिरता का आकलन करना और दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन की रूपरेखा तैयार करना।

  • आपदा प्रबंधन (Disaster Financing):
    जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आपदा प्रतिक्रिया और शमन के लिए अधिक लचीली और त्वरित वित्तीय व्यवस्था बनाना।


पूर्ववर्ती आयोगों की सिफारिशें और संदर्भ

15वें वित्त आयोग (अध्यक्ष: एन.के. सिंह) ने 2021–2026 की अवधि के लिए केंद्र के विभाज्य करों में से 41% हिस्सा राज्यों को देने की सिफारिश की थी।
यह प्रतिशत 14वें आयोग (अध्यक्ष: वाई.वी. रेड्डी) की सिफारिशों के समान था, जिससे राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता मिली।

इन सिफारिशों के बाद राज्यों ने राजकोषीय अनुशासन, केंद्र-राज्य वित्तीय समन्वय, और नीतिगत स्पष्टता के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया।
अब 16वें आयोग से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस प्रक्रिया को और अधिक संतुलित एवं पारदर्शी बनाएगा।


राज्यों की अपेक्षाएँ और नई संभावनाएँ

भारत के कई राज्य चाहते हैं कि राजस्व साझा करने की मौजूदा व्यवस्था में उनकी जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और विकास स्तर के अनुसार अधिक न्यायसंगत सूत्र लागू किए जाएं।
साथ ही, कुछ विकसित राज्य यह भी चाहते हैं कि केंद्र कर संग्रह और व्यय नीति में अधिक साझी जिम्मेदारी निभाए।

16वें आयोग की रिपोर्ट से उम्मीद है कि यह:

  • राज्यों के वित्तीय अनुशासन को मजबूत करेगा,

  • नीतिगत स्पष्टता लाएगा,

  • और राजकोषीय पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

इसके अलावा, आयोग प्रदर्शन-आधारित अनुदान और जलवायु वित्तपोषण जैसे नए मॉडल पर भी विचार कर सकता है।


स्थिर तथ्य (Static Facts)

बिंदु विवरण
आयोग का नाम 16वां वित्त आयोग
अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया
गठन तिथि 31 दिसंबर 2023
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 280
मूल समयसीमा 31 अक्टूबर 2025
नई समयसीमा 30 नवंबर 2025
सिफारिश अवधि 2026–2031

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