भारत ने अपनी प्राचीन सभ्यतागत और बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाते हुए ‘ज्ञान भारतम’ नामक एक महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल को संस्कृति मंत्रालय के अधीन लागू किया जा रहा है और इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत की अमूल्य पांडुलिपि विरासत को संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाना है।
हजारों वर्षों से संचित भारतीय ज्ञान—जो विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, खगोलशास्त्र, गणित, साहित्य और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है—मुख्य रूप से पांडुलिपियों में संरक्षित है। लेकिन समय, जलवायु और उपेक्षा के कारण यह विरासत खतरे में रही है। ज्ञान भारतम पहल इसी संकट का उत्तर है।
ज्ञान भारतम क्या है?
ज्ञान भारतम भारत सरकार की प्रमुख सांस्कृतिक संरक्षण पहल है, जिसका लक्ष्य देशभर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों का—
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सर्वेक्षण (Survey)
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दस्तावेज़ीकरण (Documentation)
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संरक्षण (Conservation)
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डिजिटलीकरण (Digitisation)
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और प्रसार (Dissemination)
करना है।
इन पांडुलिपियों में आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान, वास्तु, व्याकरण, दर्शन, धर्म, इतिहास और साहित्य से जुड़ी दुर्लभ रचनाएँ शामिल हैं। सरकार ने इस मेगा परियोजना के लिए वर्ष 2025–2031 के बीच ₹491.66 करोड़ का बजट निर्धारित किया है, जो इस पहल की व्यापकता और गंभीरता को दर्शाता है।
ज्ञान भारतम के प्रमुख उद्देश्य
1️⃣ पांडुलिपियों का बड़े पैमाने पर संरक्षण
कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में उपलब्ध एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और संरक्षण करना है। ये पांडुलिपियाँ—
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संग्रहालयों
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विश्वविद्यालयों
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पुस्तकालयों
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मठों, मंदिरों
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मदरसों
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निजी और सामुदायिक संग्रहों
में बिखरी हुई हैं। कई पांडुलिपियाँ ताड़पत्र, भोजपत्र और हस्तनिर्मित कागज़ पर लिखी होने के कारण अत्यंत नाज़ुक स्थिति में हैं।
2️⃣ राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉज़िटरी का निर्माण
ज्ञान भारतम के तहत अत्याधुनिक तकनीक और Artificial Intelligence (AI) की मदद से एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार तैयार किया जाएगा। इसके लाभ—
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ज्ञान को स्थायी रूप से सुरक्षित रखना
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शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को ऑनलाइन पहुँच
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वैश्विक अकादमिक सहयोग को बढ़ावा
अब तक इस पहल के अंतर्गत 3.5 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।
3️⃣ संस्थागत सहयोग और नेटवर्क
इस मिशन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने 31 संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं, जिनमें शामिल हैं—
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19 क्लस्टर सेंटर
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12 स्वतंत्र सेंटर
ये संस्थान पाँच प्रमुख कार्यक्षेत्रों में काम करेंगे:
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सर्वेक्षण और सूचीकरण
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संरक्षण और क्षमता निर्माण
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डिजिटलीकरण एवं तकनीकी सहयोग
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भाषाविज्ञान और अनुवाद
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शोध, प्रकाशन और जनसंचार
यह संरचना ज्ञान भारतम को एक राष्ट्रीय सहयोगी मॉडल बनाती है।
दिल्ली घोषणा: राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक
ज्ञान भारतम पहल के तहत “दिल्ली घोषणा” (Delhi Declaration / ज्ञान भारतम संकल्प पत्र) को भी अपनाया गया है। यह घोषणा देश की पांडुलिपि विरासत को सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराती है।
दिल्ली घोषणा के मुख्य बिंदु हैं—
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पांडुलिपियाँ भारतीय सभ्यता की जीवित स्मृति हैं
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आधुनिक संरक्षण और डिजिटलीकरण तकनीकों की आवश्यकता
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डिजिटल पहुँच का विस्तार
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नए शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहन
यह घोषणा पांडुलिपि संरक्षण को केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
देशव्यापी दायरा और सहभागिता
ज्ञान भारतम किसी एक क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है। उदाहरणस्वरूप—
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मध्य प्रदेश का डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय
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देश के विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालय
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क्षेत्रीय सांस्कृतिक संस्थान
इसमें शामिल किए गए हैं। यह दर्शाता है कि कार्यक्रम का विस्तार पूरे भारत में किया जा रहा है।
संरक्षण के साथ सांस्कृतिक संवर्धन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पांडुलिपि संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक संवर्धन पर भी समानांतर रूप से काम किया जा रहा है।
संगीत नाटक अकादमी
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उत्सव, कार्यशालाएँ और प्रदर्शनियाँ आयोजित करती है
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शास्त्रीय, लोक और जनजातीय कलाओं को बढ़ावा
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प्रमुख सम्मान:
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संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
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उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार
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ईस्टर्न ज़ोनल कल्चरल सेंटर (EZCC), कोलकाता
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पूर्वी भारत की लोक परंपराओं का संरक्षण
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ओडिशा की संबलपुरी नृत्य शैली को सक्रिय समर्थन

