IIT पटना ने अनुसंधान को नई गति देने के लिए अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर किया लॉन्च
IIT पटना ने अनुसंधान को नई गति देने के लिए अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर किया लॉन्च

IIT पटना ने अनुसंधान को नई गति देने के लिए अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर किया लॉन्च

बिहार के शैक्षणिक और वैज्ञानिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए IIT पटना ने राज्य के पहले सुपरकंप्यूटर ‘परम रुद्र’ का औपचारिक उद्घाटन किया है। यह अत्याधुनिक प्रणाली राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत स्थापित की गई है, जिसका उद्देश्य देशभर में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (High Performance Computing – HPC) को बढ़ावा देना है। इस पहल से न केवल IIT पटना, बल्कि पूरे बिहार और आसपास के क्षेत्रों में अनुसंधान क्षमताओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

परम रुद्र सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और शोधार्थी उपस्थित रहे। यह सुपरकंप्यूटर बिहार में किसी भी शैक्षणिक संस्था या सरकारी कार्यालय में स्थापित पहला सुपरकंप्यूटर है, जो राज्य के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है।

क्या है ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर?

‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर विशाल डेटा प्रोसेसिंग, जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन और उन्नत मॉडलिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है। अब तक जिन शोध परियोजनाओं को सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों के कारण या तो बाहरी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था या लंबा समय लगता था, वे अब IIT पटना के परिसर में ही तेज़ी और अधिक सटीकता के साथ पूरी की जा सकेंगी।

यह प्रणाली विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगी, जहाँ बड़े पैमाने पर गणनाएँ, मल्टी-डायमेंशनल मॉडलिंग और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत महत्वपूर्ण योगदान

परम रुद्र, भारत सरकार के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) का हिस्सा है। इस मिशन के तहत देशभर में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता लगभग 39 पेटाफ्लॉप्स है। आने वाले समय में 10 और सुपरकंप्यूटर प्रणालियाँ जुड़ने के बाद यह क्षमता 100 पेटाफ्लॉप्स से अधिक होने की उम्मीद है।

NSM का मुख्य उद्देश्य भारत को सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और शिक्षा, अनुसंधान तथा शासन में उन्नत कंप्यूटिंग का उपयोग सुनिश्चित करना है।

स्वदेशी तकनीक की ताकत

परम रुद्र सुपरकंप्यूटर की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें शामिल हैं—

  • हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) प्रोसेसर

  • स्वदेशी सर्वर और स्टोरेज सिस्टम

  • उन्नत कूलिंग सॉल्यूशंस

  • हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट्स

  • भारतीय सॉफ्टवेयर स्टैक

यह पहल न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है, बल्कि भारत के सुपरकंप्यूटिंग इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।

किन क्षेत्रों में मिलेगा अनुसंधान को बढ़ावा?

परम रुद्र सुपरकंप्यूटर से कई अत्याधुनिक और उभरते हुए अनुसंधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें प्रमुख हैं—

  • कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोबायोलॉजी और एस्ट्रोकेमिस्ट्री

  • रिएक्शन डायनेमिक्स

  • कम्प्यूटेशनल मैटेरियल डिज़ाइन और मॉलिक्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स

  • कम्प्यूटेशनल फ्लूड मैकेनिक्स

  • कम्प्यूटेशनल नैनो-बायो इंटरफेसेज़

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस

  • क्वांटम कंप्यूटिंग

इन क्षेत्रों में उच्च-स्तरीय सिमुलेशन और मॉडलिंग से शोध की गुणवत्ता, गति और वैश्विक प्रभाव — तीनों में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

छात्रों और फैकल्टी के लिए क्या मायने?

IIT पटना के लगभग 10 विभागों के 60 फैकल्टी सदस्य और 400 से अधिक छात्र इस सुपरकंप्यूटर सुविधा से सीधे लाभान्वित होंगे। इससे—

  • पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च को गति मिलेगी

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की जर्नल पब्लिकेशन्स की संभावना बढ़ेगी

  • इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग को मजबूती मिलेगी

  • स्टार्टअप और डीप-टेक इनोवेशन को तकनीकी समर्थन मिलेगा

संस्थान का मानना है कि परम रुद्र IIT पटना को देश के प्रमुख रिसर्च-ड्रिवन संस्थानों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करेगा।

बिहार के लिए क्यों है यह उपलब्धि खास?

अब तक सुपरकंप्यूटिंग जैसी उन्नत सुविधाएँ मुख्य रूप से देश के चुनिंदा महानगरों और पुराने IITs तक सीमित थीं। परम रुद्र की स्थापना से बिहार और पूर्वी भारत में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के नए अवसर खुलेंगे। इससे न केवल प्रतिभाओं का पलायन रुकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

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