भारत सरकार ने एशियाई विकास बैंक (ADB) के साथ मिलकर 10 सितंबर 2025 को एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों पक्षों ने 126.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1050 करोड़) के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में सतत, समावेशी और जलवायु–लचीले पर्यटन को बढ़ावा देना है।
यह परियोजना “सस्टेनेबल, इन्क्लूसिव एंड क्लाइमेट-रेज़िलिएंट टूरिज्म डेवलपमेंट एट टिहरी लेक एरिया प्रोजेक्ट” के नाम से लागू होगी। समझौते पर भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और ADB के भारत निवासी मिशन के प्रभारी अधिकारी काई वेई यिओ ने हस्ताक्षर किए।
टिहरी गढ़वाल क्यों है खास?
उत्तराखंड का टिहरी झील क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यह इलाका अभी भी आर्थिक अविकास, सीमित अवसंरचना और जलवायु जोखिमों से जूझ रहा है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को परियोजना का प्राथमिक फोकस बनाया गया है।
परियोजना का उद्देश्य टिहरी को एक सालभर पर्यटन योग्य गंतव्य के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही, स्थानीय निवासियों के लिए रोज़गार और आय के नए अवसर पैदा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किसे मिलेगा लाभ?
इस परियोजना से सीधा फायदा होगा –
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87,000 से अधिक स्थानीय निवासियों को, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि और मौसमी पर्यटन पर निर्भर है।
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हर साल टिहरी झील क्षेत्र में आने वाले करीब 27 लाख पर्यटकों को, जिन्हें अब बेहतर सुविधाएँ और सुरक्षित पर्यटन अनुभव मिल सकेगा।
इसके अलावा, परियोजना के तहत बनने वाली नई अवसंरचना और सेवाओं से रोज़गार सृजन, आय में विविधता और आपदा जोखिमों से निपटने की स्थानीय क्षमता भी मज़बूत होगी।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ
परियोजना एक बहु-क्षेत्रीय और समावेशी दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें निम्नलिखित हस्तक्षेप शामिल हैं:
1. पर्यटन अवसंरचना का विकास
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इको–पार्क, ट्रेल्स, व्यू-प्वाइंट और विश्राम स्थलों का निर्माण
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पर्यावरण–अनुकूल पर्यटन ढाँचा तैयार करना
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साहसिक खेलों और जल पर्यटन को सुरक्षित और आकर्षक बनाना
2. स्वच्छता और कचरा प्रबंधन
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स्मार्ट और आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली
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स्वच्छ शौचालय और सार्वजनिक स्थान
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स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप सतत सफाई मॉडल
3. जलवायु–लचीला ढांचा
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बाढ़ और भूस्खलन जैसे आपदाओं से बचाव के लिए सुरक्षित अवसंरचना
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जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले डिज़ाइन और तकनीक
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हरित बफर और कैचमेंट बहाली
4. संस्थागत क्षमता में सुधार
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स्थानीय शासन और पंचायतों की योजना क्षमता को मजबूत करना
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ग्रामीण समुदायों को निर्णय–निर्माण में शामिल करना
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डिजिटल टूल्स और ई-गवर्नेंस के उपयोग को बढ़ावा देना
5. दिव्यांगजनों के लिए सार्वभौमिक पहुंच
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सभी सुविधाओं को समावेशी और सुलभ बनाना
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दिव्यांग पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएँ
समुदाय और समावेशिता पर ज़ोर
इस परियोजना की एक बड़ी विशेषता है कि यह स्थानीय समुदाय–नेतृत्व वाला पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देती है।
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चयनित गाँवों में महिला–नेतृत्व वाली आपदा प्रबंधन पहलें शुरू की जाएंगी।
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महिलाओं, युवाओं और छोटे–मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए लाइवलीहुड मैचिंग ग्रांट्स प्रदान किए जाएंगे।
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निजी क्षेत्र की भागीदारी से पर्यटन सेवाओं और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।
इससे मौसमी पर्यटन पर निर्भरता कम होगी और एक सतत व विविधीकृत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।
राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों से तालमेल
यह परियोजना न केवल उत्तराखंड बल्कि भारत की कई प्रमुख नीतियों और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों से मेल खाती है:
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राष्ट्रीय पर्यटन नीति 2022 – सतत, समावेशी और लचीले पर्यटन पर जोर
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डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत मिशन – स्मार्ट स्वच्छता और डिजिटल समाधान
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पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत के जलवायु लक्ष्य – कम-कार्बन अवसंरचना और आपदा प्रतिरोधी ढाँचा
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सतत विकास लक्ष्य (SDGs) – गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, जलवायु कार्रवाई और सतत समुदाय
परीक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु मुख्य तथ्य
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समझौता तिथि: 10 सितंबर 2025
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संलिप्त पक्ष: भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB)
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ऋण राशि: 126.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर
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परियोजना फोकस: टिहरी झील क्षेत्र, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
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लाभार्थी: 87,000 निवासी और 27 लाख पर्यटक
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मुख्य विशेषताएँ: सतत पर्यटन, जलवायु–लचीला ढांचा, महिला–नेतृत्व वाली पहल, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी

