भारत और ग्रीस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती: पांच साल के गेम प्लान पर सहमति
भारत और ग्रीस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती: पांच साल के गेम प्लान पर सहमति

भारत और ग्रीस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती: पांच साल के गेम प्लान पर सहमति

भारत और ग्रीस ने अपनी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी को नई मजबूती देते हुए रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent – JDI) पर हस्ताक्षर किए हैं। 10 फरवरी 2026 को अंतिम रूप दिए गए इस समझौते के तहत दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के लिए एक पाँच वर्षीय रोडमैप तय किया है।

इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (Bilateral Military Cooperation Plan – BMCP) का भी आदान-प्रदान किया। यह कदम न केवल रक्षा उत्पादन में सहयोग को संरचित रूप देता है, बल्कि क्षेत्रीय और समुद्री सुरक्षा में भी अधिक समन्वित भागीदारी का संकेत देता है।


संयुक्त आशय घोषणा: रक्षा उद्योग में दीर्घकालिक सहयोग

संयुक्त आशय घोषणा का उद्देश्य भारत और ग्रीस के स्वदेशी रक्षा उद्योगों के बीच व्यापक और संरचित सहयोग स्थापित करना है। पाँच वर्षीय रोडमैप भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को ग्रीस की ‘एजेंडा 2030’ रक्षा सुधार रणनीति के साथ जोड़ता है।

इस समझौते के प्रमुख बिंदु हैं:

  • रक्षा उपकरणों का संयुक्त विकास

  • सह-उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण

  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सहयोग

  • रक्षा स्टार्टअप और MSMEs के लिए अवसर

इस पहल से दोनों देशों की आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारत, जो हाल के वर्षों में रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर चुका है, ग्रीस जैसे यूरोपीय साझेदार के साथ सहयोग से अपनी वैश्विक उपस्थिति और सुदृढ़ कर सकता है।


2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (BMCP)

इस बैठक का एक महत्वपूर्ण परिणाम 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (BMCP) का आदान-प्रदान रहा। यह योजना भारत और ग्रीस की सशस्त्र सेनाओं के बीच सहयोग की रूपरेखा तय करती है।

BMCP के अंतर्गत संभावित गतिविधियाँ शामिल हैं:

  • संयुक्त सैन्य अभ्यास (थल, जल और वायु)

  • प्रशिक्षण और स्टाफ कॉलेज आदान-प्रदान

  • विशेषज्ञता और सामरिक अनुभव साझा करना

  • रक्षा कूटनीति को बढ़ावा देना

इस प्रकार की संरचित योजना से नियमित संपर्क और विश्वास निर्माण को बढ़ावा मिलता है। इससे न केवल परिचालन समन्वय मजबूत होता है, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी स्थायित्व मिलता है।


समुद्री सुरक्षा में सहयोग: IFC-IOR में ग्रीक अधिकारी की तैनाती

समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करते हुए ग्रीस ने गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) में एक ग्रीक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी तैनात करने की घोषणा की है।

IFC-IOR हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी, सूचना साझा करने और समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ग्रीस की भागीदारी से:

  • समुद्री मार्गों की सुरक्षा मजबूत होगी

  • सूचना साझा करने की प्रक्रिया बेहतर होगी

  • हिंद महासागर और भूमध्यसागर के बीच रणनीतिक समन्वय बढ़ेगा

यह कदम वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा और समुद्री स्थिरता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


नई दिल्ली में उच्चस्तरीय रक्षा वार्ता

यह समझौता नई दिल्ली में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया।

दोनों नेताओं ने दोहराया कि भारत–ग्रीस रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, विशेषकर समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के संदर्भ में सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।


इंडो–मेडिटेरेनियन संपर्क और रणनीतिक अभिसरण

भारत और ग्रीस दोनों स्वयं को प्राचीन समुद्री सभ्यताओं के रूप में पहचानते हैं। हिंद महासागर और भूमध्यसागर के बीच रणनीतिक संपर्क को बढ़ावा देना दोनों देशों के साझा हितों में शामिल है।

चर्चाओं में नौवहन की स्वतंत्रता, सुरक्षित समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर विशेष बल दिया गया। यह समुद्री दृष्टिकोण न केवल रक्षा सहयोग को पूरक बनाता है, बल्कि इंडो–मेडिटेरेनियन क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच संतुलित साझेदारी का संकेत भी देता है।


रणनीतिक साझेदारी का व्यापक आयाम

भारत और ग्रीस के संबंध केवल रक्षा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध, लोकतांत्रिक मूल्यों की समानता और बढ़ता आर्थिक सहयोग इस साझेदारी को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

हाल के वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग इस संबंध का प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है। संयुक्त आशय घोषणा और BMCP जैसे संरचित तंत्र यह संकेत देते हैं कि दोनों देश अब केवल संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ठोस और क्रियान्वयन-उन्मुख सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply