भारत और फिलीपींस ने 5 अगस्त 2025 को अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक घोषणा की। यह ऐतिहासिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद की गई। राष्ट्रपति मार्कोस भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर आए हैं, जो दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि वे अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
इस मौके पर भारत और फिलीपींस के बीच 9 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जो द्विपक्षीय सहयोग के एक नए और व्यापक चरण की शुरुआत का संकेत देते हैं।
रणनीतिक साझेदारी: दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में कदम
भारत और फिलीपींस ने पहली बार रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का औपचारिक ऐलान किया। इसके तहत एक विस्तृत कार्य योजना (Action Plan) भी तैयार की गई है, जो 2025 से 2029 तक की अवधि में सहयोग को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन करेगी।
यह साझेदारी रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल बदलाव, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी।
भारत–फिलीपींस के बीच हुए 9 प्रमुख समझौते
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रणनीतिक साझेदारी की घोषणा और एक्शन प्लान
यह समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग को संस्थागत रूप देने वाला है। -
वायु, थल और नौसेना के बीच स्टाफ वार्ताओं के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms of Reference)
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भारतीय वायु सेना और फिलीपीनी वायु सेना
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भारतीय सेना और फिलीपीनी सेना
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भारतीय नौसेना और फिलीपीनी नौसेना
इन तीनों समझौतों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद और संयुक्त अभ्यासों की संभावनाएं और बढ़ेंगी।
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आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर संधि
यह समझौता दोनों देशों को अपराधियों की जांच, प्रत्यर्पण और न्यायिक सहयोग में मदद करेगा। -
सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण पर संधि
इस समझौते से भारतीय और फिलीपीनी नागरिक जो दूसरे देश में सजा काट रहे हैं, उन्हें अपने देश में स्थानांतरित करने का विकल्प मिलेगा। -
विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम (2025–2028)
भारत और फिलीपींस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभागों के बीच यह साझेदारी संयुक्त शोध, तकनीकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देगी। -
पर्यटन सहयोग कार्यक्रम (2025–2028)
पर्यटन मंत्रालयों के बीच यह कार्यक्रम दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और पर्यटन को बढ़ाने का माध्यम बनेगा। -
डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन (MoU)
फिनटेक, डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए यह MoU महत्वपूर्ण है। -
बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर आशय वक्तव्य (Statement of Intent)
ISRO और फिलीपीनी स्पेस एजेंसी के बीच यह समझौता बाह्य अंतरिक्ष के उपयोग, उपग्रह डेटा साझाकरण, और अनुसंधान में सहयोग को बढ़ाएगा। -
भारतीय और फिलीपीनी तट रक्षकों के बीच समुद्री सहयोग के लिए संदर्भ की शर्तें
समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी और संयुक्त अभ्यासों के लिए यह समझौता अहम भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा, भारत और फिलीपींस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम भी तय किया गया है, जो दोनों देशों की सभ्यताओं को करीब लाएगा।
ब्रह्मोस मिसाइल: रणनीतिक रक्षा सहयोग की मिसाल
फिलीपींस भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल खरीदने वाला पहला देश है। इस डील ने भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित किया है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मार्कोस की बैठक में यह चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा।
बैठक के बाद भारत सरकार ने बताया कि फिलीपींस ने भारत के अन्य रक्षा प्लेटफार्मों और उपकरणों में भी गहरी रुचि दिखाई है। इससे आने वाले वर्षों में और भी रक्षा समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत–फिलीपींस व्यापार संबंध: नई संभावनाएं
भारत और फिलीपींस ने वरीयतापूर्ण व्यापार समझौता (Preferential Trade Agreement) पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है।
हालांकि भारत का ASEAN के साथ पहले से ही FTA (Free Trade Agreement) है, लेकिन इसके बावजूद वह फिलीपींस के साथ अलग से द्विपक्षीय व्यापार समझौता करना चाहता है।
यह कदम दर्शाता है कि भारत अब उन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक लचीला और रणनीतिक बनाने के पक्ष में है जो उसके भू-राजनीतिक हितों के करीब हैं।
निष्कर्ष: एशिया–प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका होगी और मजबूत
भारत और फिलीपींस के बीच हुए ये 9 समझौते न केवल दोनों देशों के आपसी रिश्तों को मजबूती देंगे, बल्कि एशिया–प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेंगे।
चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और फिलीपींस की यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यह सहयोग आने वाले वर्षों में एशिया में नए प्रकार के कूटनीतिक और रक्षा संतुलन की नींव रखेगा, जिसमें भारत की भूमिका एक अग्रणी साझेदार की होगी।

