"नई दिल्ली में आयोजित तीसरे मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत और सिंगापुर ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
"नई दिल्ली में आयोजित तीसरे मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत और सिंगापुर ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

नई दिल्ली में आयोजित तीसरे मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत और सिंगापुर ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

नई दिल्ली में आयोजित तीसरे भारत–सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे और लगातार विकसित हो रहे रिश्तों को एक नई मजबूती प्रदान की। इस उच्च-स्तरीय बैठक में भारत और सिंगापुर के शीर्ष मंत्रियों ने भाग लिया और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत सहयोग के नए क्षेत्रों पर गहन चर्चा की। यह सम्मेलन दोनों देशों के साझा लक्ष्यों — क्षेत्रीय विकास, नवाचार और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक तालमेल — का जीवंत उदाहरण है।


उच्च-स्तरीय भागीदारी और नेतृत्व

भारत की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया। उनके साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, और रेल एवं सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे।
सिंगापुर की ओर से इस बैठक का नेतृत्व उप प्रधानमंत्री एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्री गान किम योंग ने किया।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत–सिंगापुर रिश्तों के अगले चरण के लिए सरकार और उद्योग के बीच तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत–सिंगापुर बिजनेस गोलमेज सम्मेलन (ISBR) के सदस्यों के साथ हुई सार्थक चर्चा ने व्यापार और निवेश संवाद को और मजबूत बनाया है।


छह रणनीतिक स्तंभों पर आधारित सहयोग

ISMR 2025 का मुख्य फोकस सहयोग को गहरा करने के लिए तय किए गए छह रणनीतिक स्तंभों पर रहा:

  1. डिजिटलीकरण – फिनटेक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और साइबर सुरक्षा में साझेदारी।

  2. कौशल विकास – संयुक्त प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से आधुनिक कार्यबल तैयार करना।

  3. सतत विकास – नवीकरणीय ऊर्जा, हरित वित्त और जलवायु लचीलापन पर जोर।

  4. स्वास्थ्य और औषधि – फार्मा व्यापार और स्वास्थ्य नवाचार को प्रोत्साहन।

  5. उन्नत विनिर्माण – उच्च-स्तरीय औद्योगिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार।

  6. कनेक्टिविटी – भौतिक, डिजिटल और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करना।

ये सभी स्तंभ न केवल दोनों देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं, बल्कि एक मजबूत इंडो-पैसिफिक ढांचे के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।


रणनीतिक महत्व और पृष्ठभूमि

भारत और सिंगापुर के रिश्ते आर्थिक, रणनीतिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सभी क्षेत्रों में गहराई से जुड़े हुए हैं। सिंगापुर, भारत के सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है और भारत के लिए आसियान बाजारों का प्रमुख प्रवेश द्वार भी है।
इसके अलावा, सिंगापुर भारत की Act East Policy, महासागर विज़न और इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। रक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं।


सम्मेलन का महत्व और आगे का रास्ता

भारत–सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन का प्रारूप पारंपरिक बैठकों से अलग है। यह केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि भविष्य के सहयोग का रोडमैप तैयार करने वाला रणनीतिक मंच है।
तेजी से बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में यह मंच नई संभावनाओं को पहचानने और उन्हें हकीकत में बदलने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

इस सम्मेलन से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत और सिंगापुर न केवल मौजूदा साझेदारी को बनाए रखना चाहते हैं, बल्कि इसे और गहराई और विविधता भी देना चाहते हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में होने वाले समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे।


निष्कर्ष

नई दिल्ली में आयोजित तीसरा भारत–सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन, दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा और गति देने वाला साबित हुआ। छह रणनीतिक स्तंभों पर आधारित यह सहयोग मॉडल आने वाले वर्षों में न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, विकास और नवाचार को भी प्रोत्साहित करेगा।

भारत और सिंगापुर की यह साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि जब साझा दृष्टि, रणनीतिक योजना और आपसी विश्वास साथ आते हैं, तो वैश्विक मंच पर उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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