भारत को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council – UNHRC) के लिए 2026–2028 की तीन वर्षीय अवधि के लिए निर्विरोध रूप से निर्वाचित किया गया है। यह भारत की सातवीं पारी है, जो वैश्विक मानवाधिकार मंचों में देश की निरंतर उपस्थिति, प्रभाव और कूटनीतिक शक्ति को दर्शाती है।
यह चुनाव न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बढ़ाता है, बल्कि यह भी प्रमाण है कि भारत वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की सुरक्षा, संवर्धन और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्ध है।
चुनाव और कूटनीतिक प्रतिक्रिया
भारत का यह चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में आयोजित हुआ। यहाँ भारत के उम्मीदवार को सदस्य देशों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।
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एशिया-प्रशांत समूह से कोई प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार नहीं होने के कारण भारत निर्विरोध चुना गया।
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भारत के स्थायी प्रतिनिधि, पी. हरीश (P Harish) ने सभी सदस्य राज्यों का समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि भारत मानवाधिकार और मूलभूत स्वतंत्रताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आगामी कार्यकाल में रचनात्मक योगदान और वैश्विक सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है।
यह निर्विरोध चुनाव भारत की कूटनीतिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत है। भारत ने सदैव वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय और संतुलित भूमिका निभाई है, जो उसे UNHRC में प्रभावी सदस्य बनाती है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) क्या है?
UNHRC संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का मुख्य अंतर-सरकारी निकाय है, जो विश्व स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करता है। इसकी स्थापना 2006 में हुई थी, और यह पूर्व UN Human Rights Commission की जगह आई।
मुख्य विशेषताएँ
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सदस्यता: कुल 47 सदस्य देश, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्वाचित किया जाता है।
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कार्यकाल: प्रत्येक सदस्य देश का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। एक देश लगातार दो कार्यकाल से अधिक नहीं रह सकता।
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कार्य:
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Universal Periodic Review (UPR) प्रक्रिया के माध्यम से सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा।
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मानवाधिकार उल्लंघनों की पहचान और सुधार के सुझाव।
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वैश्विक मानवाधिकार नीतियों और कार्यक्रमों का समन्वय।
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UNHRC का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है और यह विश्वभर में मानवाधिकारों के संरक्षण, सतत् विकास लक्ष्यों और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत की परिषद में पिछली भूमिका
भारत ने अब तक छह कार्यकाल पूरे किए हैं और इस दौरान वह निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रभावशाली रहा है:
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समावेशी बहुपक्षवाद (Inclusive Multilateralism):
भारत ने वैश्विक मंच पर सभी देशों के बराबरी के अधिकार और सहयोग को बढ़ावा दिया। -
Global South–South cooperation का समर्थन:
भारत ने विकासशील देशों के बीच अनुभव और संसाधनों का आदान-प्रदान बढ़ाया। -
शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच:
भारत ने मानवाधिकारों के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य की सार्वभौमिक पहुंच को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया। -
मानवाधिकार मुद्दों के राजनीतिकरण का विरोध:
भारत ने मानवाधिकारों को राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में उपयोग करने का विरोध किया और बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाया।
भारत की यह पिछली भूमिका परिषद में उसकी सक्रिय भागीदारी और नैतिक नेतृत्व की पुष्टि करती है।
2026–28 कार्यकाल: प्राथमिकताएँ और रणनीतियाँ
आगामी कार्यकाल में भारत की रणनीतियाँ संभवतः निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित होंगी:
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समानता और सामाजिक न्याय:
महिलाओं, अल्पसंख्यकों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा। -
बाल और महिला अधिकार:
शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के अधिकार सुनिश्चित करना। -
स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच:
न्यायपालिका और मानवाधिकार संस्थाओं को मजबूत बनाना। -
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रशिक्षण:
मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुभव साझा करना और संयुक्त पहलों को बढ़ावा देना। -
संवेदनशीलता और जागरूकता:
वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संकट क्षेत्रों में त्वरित हस्तक्षेप।
यह कार्यकाल भारत को वैश्विक नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने का एक और अवसर प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| UNHRC मुख्यालय | जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड |
| स्थापना | 2006, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा |
| सदस्य | 47 सदस्य देश, गोपनीय मतदान द्वारा निर्वाचित |
| भारत का वर्तमान कार्यकाल | 2026–28 |
| भारत के कुल कार्यकाल | 7 |
| निर्विरोध चुना गया | एशिया-प्रशांत समूह से |

