भारत ने हरित नौवहन (Green Maritime Mobility) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली पूरी तरह स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री नौका का शुभारंभ कर दिया है। यह अत्याधुनिक नौका वाराणसी के नमो घाट से व्यावसायिक रूप से संचालित होना शुरू हुई, जिसे केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह पहल भारत के स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर जल परिवहन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। साथ ही, यह देश के नेशनल हाइड्रोजन मिशन, मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है।
हरित जल परिवहन की ओर भारत का निर्णायक कदम
वाराणसी, जो गंगा नदी के तट पर स्थित भारत का प्राचीनतम शहर है, अब आधुनिक और भविष्य-उन्मुख हरित तकनीक का भी प्रतीक बन गया है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल नौका का संचालन यह दर्शाता है कि भारत पारंपरिक डीज़ल-आधारित नौवहन से आगे बढ़कर शून्य-उत्सर्जन परिवहन प्रणाली को अपनाने के लिए तैयार है।
यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करने की दिशा में सहायक है, बल्कि यह भारत को वैश्विक हरित समुद्री परिवहन मानचित्र पर एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है।
नौका की तकनीकी विशेषताएँ: स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल
यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री नौका कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित की गई है और इसका स्वामित्व भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के पास है।
नौका में लो-टेम्परेचर प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) आधारित हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करती है और इस प्रक्रिया में केवल पानी उप-उत्पाद के रूप में निकलता है।
मुख्य विशेषताएँ
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डिज़ाइन: 24-मीटर लंबा कैटामरैन → अधिक स्थिरता और सुरक्षा
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यात्री क्षमता: 50 यात्री (एयर-कंडीशन्ड केबिन)
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सेवा गति: 6.5 नॉट्स
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संचालन अवधि: एक बार हाइड्रोजन भरने पर लगभग 8 घंटे
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हाइब्रिड प्रणाली: हाइड्रोजन फ्यूल सेल + बैटरी + सोलर पावर
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उत्सर्जन: शून्य कार्बन, न धुआँ, न शोर
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प्रमाणन: इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS)
इन विशेषताओं के साथ वाराणसी दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन-चालित यात्री नौकाओं का व्यावसायिक संचालन शुरू हुआ है।
पायलट तैनाती और मजबूत सुरक्षा ढांचा
इस नौका (FCV Pilot-01) के संचालन के लिए IWAI, CSL और Inland & Coastal Shipping Ltd. के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया है। इसके अंतर्गत:
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तकनीकी पर्यवेक्षण
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सुरक्षा मानक और आपातकालीन प्रक्रियाएँ
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वित्तीय प्रबंधन
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निरंतर निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था
शामिल हैं।
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नौका वास्तविक परिस्थितियों में सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय ढंग से संचालित हो तथा भविष्य में ऐसे और प्रोजेक्ट्स के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराया जा सके।
वाराणसी और अंतर्देशीय जलमार्गों को होने वाले लाभ
यह हाइड्रोजन-चालित नौका गंगा नदी पर यात्रा को स्वच्छ, शांत और अधिक आरामदायक बनाएगी।
प्रमुख लाभ
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पर्यावरण संरक्षण: शून्य-उत्सर्जन, प्रदूषण में कमी
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यात्री अनुभव: शोर-रहित और स्मूथ सफर
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यातायात दबाव में कमी: सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी
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पर्यटन को बढ़ावा: आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल जल परिवहन से पर्यटन आकर्षण बढ़ेगा
इस पहल से वाराणसी की पहचान एक फ्यूचर-रेडी और सतत तकनीक अपनाने वाले वैश्विक शहर के रूप में और मजबूत होगी।
पहली व्यावसायिक यात्रा: नमो घाट से ललिता घाट
नौका की पहली व्यावसायिक यात्रा लगभग 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर नमो घाट से ललिता घाट तक की गई। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल
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राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल
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उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह और डॉ. दयाशंकर मिश्रा
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वाराणसी नगर निगम की मेयर
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वरिष्ठ IAS अधिकारी और IWAI के शीर्ष अधिकारी
यह यात्रा इस अत्याधुनिक नौका की क्षमताओं का लाइव प्रदर्शन थी और इसके सार्वजनिक संचालन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बनी।
मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल 2047 से जुड़ाव
यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल नौका IWAI की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है, जिसके अंतर्गत:
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अंतर्देशीय जल परिवहन का डी-कार्बोनाइजेशन
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इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड नौकाओं का विस्तार
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नदी-आधारित यात्री परिवहन का आधुनिकीकरण
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ऊर्जा-कुशल और जलवायु-संवेदनशील नौवहन प्रणाली
को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह परियोजना भारत के Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

