भारत ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग और परफॉर्मेंस को मजबूत करने के लिए लॉन्च किया GIRG
भारत ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग और परफॉर्मेंस को मजबूत करने के लिए लॉन्च किया GIRG

भारत ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग और परफॉर्मेंस को मजबूत करने के लिए लॉन्च किया GIRG

भारत सरकार ने देश की वैश्विक रैंकिंग, नीतिगत क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है। अब भारत 26 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों पर अपनी स्थिति को व्यवस्थित रूप से ट्रैक करेगा और सुधार के लिए ठोस रणनीतियाँ तैयार करेगा। यह घोषणा संसद में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने की, जिसके बाद से GIRG प्लेटफ़ॉर्म चर्चा का केंद्र बन गया है।


क्या है GIRG प्लेटफ़ॉर्म?

GIRG का पूरा नाम है — Global Indices for Reforms and Growth
यह प्लेटफ़ॉर्म भारत की अंतरराष्ट्रीय तुलना को वैज्ञानिक और नीतिगत दृष्टिकोण से उपयोग में लाने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • वैश्विक सूचकांकों के आधार पर नीतियों में सुधार करना

  • शासन और प्रशासनिक तंत्र को मजबूत बनाना

  • डेटा रिपोर्टिंग और सांख्यिकीय प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना

  • उन क्षेत्रों की पहचान करना जहां भारत की रैंकिंग में सुधार की व्यापक संभावनाएं हैं

सरकार का मानना है कि पारदर्शी और मजबूत वैश्विक प्रदर्शन एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य और उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की छवि को और मजबूत करेगा।


चार प्रमुख थीम जिन पर नज़र रखी जाएगी

भारत जिन 26 अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स को ट्रैक करेगा उन्हें चार मुख्य वर्गों में बांटा गया है:

1. अर्थव्यवस्था (Economy)

इन सूचकांकों से वैश्विक मंच पर भारत के आर्थिक प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
इसमें व्यापार, प्रतिस्पर्धा, नवाचार, निवेश और विकास दर से जुड़े इंडेक्स शामिल हैं।

2. विकास (Development)

यह श्रेणी सामाजिक और मानव विकास की प्रगति को दर्शाती है।
जैसे—स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन गुणवत्ता, लैंगिक समानता आदि।

3. शासन (Governance)

यह क्षेत्र प्रशासनिक दक्षता, न्याय व्यवस्था, पारदर्शिता, प्रेस स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मानकों का मूल्यांकन करता है।

4. उद्योग और प्रतिस्पर्धात्मकता (Industry)

इसमें Ease of Doing Business, उद्योग वृद्धि, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और विनिर्माण क्षमताओं का विश्लेषण किया जाता है।

प्रत्येक सूचकांक के लिए एक मंत्रालय को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है जो डेटा की वैधता, संकलन और सुधार योजनाओं पर काम करेगा।


केंद्रीय भूमिका निभाएगा नीति आयोग का DMEO

इस व्यापक प्रक्रिया का समन्वय करेगा — NITI Aayog का Development Monitoring and Evaluation Office (DMEO)।

DMEO की जिम्मेदारियाँ होंगी:

  • सभी 26 सूचकांकों की निगरानी

  • विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय

  • डेटा संग्रहण और वैधता की जाँच

  • वैश्विक संस्थानों की कार्यप्रणाली का विश्लेषण

  • रैंकिंग सुधार के लिए नीतिगत सुझाव तैयार करना

यह भारत को “डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस” की दिशा में आगे बढ़ाने वाला बड़ा कदम है।


डेटा गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर विशेष फोकस

भारत पहले से ही GDP, CPI, IIP जैसे प्रमुख संकेतकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करता है।
लेकिन कई वैश्विक एजेंसियों की पद्धतियां भारत की वास्तविक स्थिति को ठीक से परिलक्षित नहीं करतीं।

GIRG के माध्यम से:

  • गलत या पक्षपातपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विधियों की पहचान

  • वैकल्पिक डेटा प्रस्तुत करना

  • भारत की आधिकारिक सांख्यिकी को वैश्विक संस्थानों तक सही तरीके से पहुँचाना

सुनिश्चित किया जाएगा।


डेमोक्रेसी इंडेक्स की खास समीक्षा

भारत ने कई बार आरोप लगाया है कि कुछ वैश्विक सूचकांकों की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं होती और उनमें पूर्वाग्रह की संभावना रहती है।
इसी संदर्भ में Democracy Index पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वर्तमान में भारत इस सूचकांक में:

  • 41वें स्थान पर है

  • और “Flawed Democracy” श्रेणी में शामिल है

जबकि कई छोटे राष्ट्र इससे ऊपर दर्ज हैं।
इसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा भारत का कानून एवं न्याय मंत्रालय करेगा।


GIRG क्यों ज़रूरी है?

भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, लेकिन कई वैश्विक सूचकांकों में इसका प्रदर्शन उस गति से परिलक्षित नहीं होता।

GIRG की मदद से:

  • रैंकिंग सुधार में बाधक कारक पहचाने जाएंगे

  • नीतिगत बदलाव अधिक सटीक और लक्ष्य आधारित होंगे

  • अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा गलत आकलन या डेटा मिसमैच कम होगा

  • भारत की वैश्विक छवि और विश्वसनीयता मजबूत होगी

  • सुधारों और विकास योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी

यह पहल भारत के दीर्घकालिक आर्थिक और वैश्विक आकांक्षाओं के अनुरूप है।


भारत के लिए संभावित फायदे

GIRG प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से दीर्घकालिक लाभ होंगे:

  • निवेश आकर्षण बढ़ेगा

  • Ease of Doing Business और औद्योगिक सुधारों में तेजी आएगी

  • पारदर्शी शासन और मजबूत प्रशासनिक तंत्र

  • वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भारत की आवाज़ मजबूत होगी

  • रैंकिंग सुधार से निजी क्षेत्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उद्योगों को गति मिलेगी

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