भारत और मालदीव के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास एकुवेरिन (EKUVERIN) का 14वाँ संस्करण 2 दिसंबर 2025 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में शुरू हुआ। यह अभ्यास 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। हर वर्ष दोनों देशों में बारी-बारी से होने वाला यह अभ्यास न केवल द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को मजबूत करता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
EKUVERIN क्या है?
“EKUVERIN” धिवेही भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है — “मित्र”। यह नाम भारत और मालदीव के बीच की गहरी दोस्ती, विश्वास और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
2009 में शुरू किया गया यह वार्षिक सैन्य अभ्यास आज भारत की Neighbourhood First Policy और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में उसकी SAGAR — Security and Growth for All in the Region नीति का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
यह अभ्यास भारत के ऐसे प्रयासों को भी प्रतिबिंबित करता है, जिनका उद्देश्य छोटे पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा-संबंधी साझेदारी को मजबूत करना और क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देना है।
कौन-कौन भाग ले रहे हैं?
2025 के EKUVERIN अभ्यास में दोनों देशों से समान संख्या में सैनिक भाग ले रहे हैं, जो आपसी सम्मान और संतुलित साझेदारी का प्रतीक है।
भारतीय दल:
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भारतीय सेना के 45 सैनिक, जो प्रतिष्ठित गढ़वाल राइफल्स की एक बटालियन का हिस्सा हैं।
मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF):
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MNDF के 45 प्रशिक्षित सैनिक, जिन्होंने पूर्व के संयुक्त अभियानों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
दोनों सेनाओं के बीच यह बराबरी की भागीदारी सामरिक सहयोग, समान क्षमता विकास और संयुक्त प्रशिक्षण की भावना को दर्शाती है।
अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभ्यास कई महत्वपूर्ण सैन्य कौशलों और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है। मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं:
1. काउंटर-इंसर्जेंसी (CI) और काउंटर-टेररिज्म (CT) ऑपरेशन
दोनों देशों की सेनाएँ:
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उग्रवाद विरोधी अभियानों
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आतंकवाद-रोधी रणनीतियों
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छोटे दलों में त्वरित कार्रवाई (Quick Reaction Techniques)
में संयुक्त रूप से कार्य करना सीखेंगी।
2. भौगोलिक विविध इलाकों में संयुक्त प्रशिक्षण
अभ्यास में शामिल होंगे:
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जंगल युद्ध (Jungle Warfare)
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अर्ध-शहरी इलाकों में अभियान (Semi-Urban Combat)
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तटीय क्षेत्रों में सामरिक अभ्यास
यह प्रशिक्षण दोनों सेनाओं को विविध परिस्थितियों में कार्य करने की स्थिति में बेहतर बनाता है।
3. संयुक्त परिचालन योजना (Joint Operational Planning)
सैनिक मिलकर अभ्यास करेंगे:
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मिशन योजना (Mission Planning)
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इंटेलिजेंस शेयरिंग
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संयुक्त कमांड एवं नियंत्रण
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सामरिक सिमुलेशन
इससे वास्तविक अभियानों में तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी।
4. अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान
दोनों देशों की सेनाएँ:
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आपदा प्रबंधन
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मानवीय सहायता एवं राहत संचालन
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समुद्री सुरक्षा
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सैन्य अनुशासन और प्रशिक्षण तकनीक
जैसे क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करेंगी।
अभ्यास EKUVERIN का महत्व क्यों है?
भारत और मालदीव का भू-रणनीतिक महत्व हिंद महासागर की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में EKUVERIN कई स्तरों पर अहम भूमिका निभाता है।
1. क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता
हिंद महासागर क्षेत्र नई चुनौतियों से गुजर रहा है, जैसे—
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समुद्री चोरी (Piracy)
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आतंकवादी संगठन
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समुद्री सीमा सुरक्षा
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समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता
इस अभ्यास से दोनों देशों की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूती मिलती है।
2. रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy) को बढ़ावा
EKUVERIN भारत की रक्षा कूटनीति को मजबूत करता है और यह संदेश देता है कि भारत अपने पड़ोसियों को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
3. मालदीव के लिए सुरक्षा आश्वासन
मालदीव, एक द्वीपीय राष्ट्र होने के कारण:
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समुद्री सुरक्षा
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आपदा प्रबंधन
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त्वरित सैन्य सहायता
के क्षेत्रों में भारत पर भरोसा करता है। अभ्यास उनकी रक्षा क्षमता को आधुनिक और मजबूत बनाता है।
4. मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन (HADR) सुधार
दोनों सेनाएँ आपातकालीन स्थितियों में:
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राहत ऑपरेशन
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मेडिकल सहायता
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बचाव अभियान
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निकासी प्रक्रियाएँ
को अधिक दक्षता से अंजाम दे सकेंगी।
भारत–मालदीव संबंध: भरोसे की साझेदारी
दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध दशकों पुराने हैं। भारत ने:
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1988 के ‘ऑपरेशन कैक्टस’
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आपदा के समय त्वरित सहायता
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तटीय निगरानी
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MNDF को सैन्य प्रशिक्षण
जैसे कई मौकों पर मालदीव को समर्थन दिया है।
EKUVERIN इसी निरंतर साझेदारी का हिस्सा है।

