सितंबर 2025 में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अनूठी पहल की घोषणा की, जब 10वें राष्ट्रीय आयुष दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), धारगल, गोवा में भारत का पहला इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी रिसर्च एंड केयर सेंटर (IORCC) का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र आयुर्वेद, योग, पंचकर्म और आधुनिक ऑन्कोलॉजी को एकीकृत करता है, जिससे कैंसर रोगियों को न केवल उपचार बल्कि पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य देखभाल भी मिल सके।
IORCC का विजन: परंपरागत और आधुनिक चिकित्सा का संगम
भारत की चिकित्सा परंपरा और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने का यह कदम न सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह कैंसर उपचार के दृष्टिकोण में एक नया अध्याय खोलता है। IORCC का मूल उद्देश्य कैंसर के उपचार के साथ-साथ रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। यह केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को अपनाते हुए रोगियों को समग्र और रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करता है।
कैंसर पुनर्वास में नई क्रांति
कैंसर उपचार के दौरान कीमोथेरपी और रेडिएशन के गंभीर दुष्प्रभावों से राहत देना और रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना IORCC का एक बड़ा मकसद है। यह केंद्र रोगी के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है। आयुर्वेद और पंचकर्म से विषहरण, योग और फिजियोथेरेपी से मानसिक और शारीरिक पुनर्वास, पोषण चिकित्सा के माध्यम से रोगी के आहार को बेहतर बनाना, और आधुनिक चिकित्सा की सटीकता से कीमोथेरपी व सर्जरी का संयोजन इसे विशिष्ट बनाता है।
IORCC के अनोखे पहलू: बहु-विषयक और समग्र देखभाल
IORCC के तहत एक बहु-विषयक उपचार मॉडल विकसित किया गया है, जो भारत में पहली बार वैज्ञानिक ढांचे के भीतर आयुष और आधुनिक ऑन्कोलॉजी को साथ लेकर आता है। केंद्र के प्रमुख घटक हैं:
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आयुर्वेद और पंचकर्म: कैंसर से लड़ने के लिए विषहरण, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को पुनर्संतुलित करने पर विशेष ध्यान।
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योग और फिजियोथेरेपी: मानसिक शांति, तनाव प्रबंधन, और शारीरिक पुनर्वास के लिए योगासन, प्राणायाम और शारीरिक व्यायाम।
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आहार चिकित्सा: रोगी की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार पोषण संबंधी सलाह और आहार योजना।
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आधुनिक ऑन्कोलॉजी: कीमोथेरपी, रेडिएशन और सर्जिकल उपचार के साथ नवीनतम तकनीकों का उपयोग।
इस तरह से रोगी को एक संपूर्ण, संतुलित और प्रभावी उपचार उपलब्ध होता है, जो न केवल बीमारी से लड़ने में मदद करता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।
प्रमुख संस्थान और सहयोग
IORCC की स्थापना में Tata Memorial Centre के Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer (ACTREC) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इस साझेदारी का उद्देश्य पारंपरिक थैरेपी को वैज्ञानिक मानकों के तहत परखना और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप इलाज सुनिश्चित करना है। इससे उपचार की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता दोनों सुनिश्चित होती है।
अनुसंधान और प्रशिक्षण का केंद्र
IORCC सिर्फ एक उपचार केंद्र ही नहीं, बल्कि एक अनुसंधान एवं शैक्षणिक केंद्र भी है। यह केंद्र इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी में नवीनतम शोध करेगा और विभिन्न आयुष प्रणालियों तथा आधुनिक चिकित्सा के समन्वय को बढ़ावा देगा। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
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साक्ष्य-आधारित इंटीग्रेटिव प्रोटोकॉल विकसित करना: जो कैंसर देखभाल को और अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाए।
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आयुष आधारित कैंसर देखभाल में क्षमता निर्माण: चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना।
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स्वास्थ्य पेशेवरों का समन्वय: विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।
यह पहल भारत सरकार के आयुष मिशन के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के लक्ष्य को सशक्त बनाती है और देश में आयुष के प्रति जागरूकता व उपयोग को बढ़ावा देती है।
राष्ट्रीय आयुष दिवस का महत्व
राष्ट्रीय आयुष दिवस हर साल 25 सितंबर को मनाया जाता है, जो आयुष मंत्रालय की स्थापना की वर्षगांठ पर केंद्रित है। यह दिवस आयुष चिकित्सा प्रणालियों—आयुर्वेद, योग, नैचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस वर्ष 10वें राष्ट्रीय आयुष दिवस पर IORCC का उद्घाटन आयुष और आधुनिक चिकित्सा के संयुक्त प्रयास का एक प्रतीक बन गया है।
भविष्य की राह
IORCC की स्थापना से उम्मीद की जा रही है कि भारत में कैंसर उपचार की एक नई दिशा मिलेगी। यह केंद्र न केवल गोवा या पश्चिमी तटीय क्षेत्र में, बल्कि पूरे देश में इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी के विकास का मॉडल बनेगा। आने वाले वर्षों में ऐसे केंद्रों का विस्तार होगा, जिससे देश के हर हिस्से में कैंसर रोगियों को सस्ती, प्रभावी और समग्र देखभाल मिल सकेगी।
सरकार की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र में विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के मेल को स्वीकार करता है और इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

