भारत में पहली मोबाइल टेम्पर्ड ग्लास फैक्ट्री की शुरुआत
भारत में पहली मोबाइल टेम्पर्ड ग्लास फैक्ट्री की शुरुआत

भारत में पहली मोबाइल टेम्पर्ड ग्लास फैक्ट्री की शुरुआत

भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मोबाइल उपकरणों के लिए अपनी पहली टेम्पर्ड ग्लास निर्माण इकाई का उद्घाटन किया है। यह फैक्ट्री नोएडा में स्थापित की गई है और इसका उद्घाटन 30 अगस्त 2025 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया।

यह पहल न केवल भारत को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी, बल्कि “मेक इन इंडिया” विजन और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी।


साझेदारी और ब्रांडिंग

यह अत्याधुनिक संयंत्र ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स और अमेरिका की प्रसिद्ध कंपनी कॉर्निंग इन्कॉरपोरेटेड की साझेदारी से स्थापित किया गया है। यहां बनने वाला टेम्पर्ड ग्लास “Engineered by Corning” ब्रांड के अंतर्गत तैयार होगा।

यह ग्लास न केवल भारतीय स्मार्टफोन निर्माताओं को उपलब्ध कराया जाएगा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी इसकी आपूर्ति की जाएगी। इससे भारत की पहचान एक विश्वसनीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातक देश के रूप में और मजबूत होगी।


मेक इन इंडिया और घरेलू क्षमता निर्माण

अब तक टेम्पर्ड ग्लास जैसी महत्वपूर्ण सामग्री का आयात किया जाता था। स्मार्टफोन निर्माण में यह एक अहम कंपोनेंट है, और आयात पर निर्भरता के कारण उत्पादन लागत भी अधिक हो जाती थी।

नई फैक्ट्री की शुरुआत के साथ भारत का लक्ष्य है कि मोबाइल उपकरणों का हर हिस्सा—चाहे वह चिप्स हों, सर्वर कंपोनेंट्स हों या टेम्पर्ड ग्लास—सबका निर्माण देश के भीतर ही किया जाए।

यह कदम न केवल आयात पर निर्भरता को कम करेगा बल्कि भारत को एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की दिशा में भी बड़ा योगदान देगा।


आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पिछले 11 वर्षों में तेजी से बढ़ा है।

  • 11 साल पहले के मुकाबले यह उद्योग 6 गुना बढ़कर ₹11.5 लाख करोड़ का हो गया है।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ₹3 लाख करोड़ से अधिक का आंकड़ा पार कर चुका है।

  • इस सेक्टर ने अब तक लगभग 25 लाख रोजगार पैदा किए हैं।

नई इकाई का आर्थिक योगदान भी उल्लेखनीय होगा।

  • प्रारंभिक निवेश: ₹70 करोड़

  • फेज-1 उत्पादन क्षमता: 2.5 करोड़ यूनिट प्रति वर्ष

  • फेज-1 रोजगार: 600 लोगों को सीधा रोजगार

  • फेज-2 निवेश: ₹800 करोड़

  • भविष्य की उत्पादन क्षमता: 20 करोड़ यूनिट/वर्ष

  • संभावित रोजगार: 4,500+

इससे स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में यह फैक्ट्री भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जाएगी।


विश्वस्तरीय निर्माण और गुणवत्ता

नोएडा स्थित यह फैक्ट्री पूरी तरह से अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है। यहां टेम्पर्ड ग्लास बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया इन चरणों में पूरी की जाएगी:

  1. स्क्राइबिंग और चैम्फरिंग – ग्लास को काटने और किनारों को मजबूत करने की प्रक्रिया।

  2. पॉलिशिंग और डुअल-स्टेज रिंसिंग – सतह को चमकदार और स्वच्छ बनाने के लिए।

  3. केमिकल टेम्परिंग – मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए।

  4. कोटिंग, प्रिंटिंग और लैमिनेशन – स्मार्टफोन की डिजाइन और सुरक्षा के लिए अंतिम टच।

इसके अलावा, हर उत्पाद पर कड़े क्वालिटी टेस्ट किए जाएंगे ताकि यह बीआईएस (BIS) प्रमाणन और फॉग मार्किंग मानकों पर खरा उतर सके।

इसका मतलब है कि भारतीय उपभोक्ताओं को अब विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाला, भारत में बना टेम्पर्ड ग्लास उपलब्ध होगा।


आत्मनिर्भर भारत की ओर

यह पहल केवल एक फैक्ट्री के उद्घाटन तक सीमित नहीं है। यह भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें देश को इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना शामिल है।

सरकार का लक्ष्य है कि भारत केवल मोबाइल असेंबली हब न बने, बल्कि यहां सभी महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का भी उत्पादन हो। इससे भारत के पास एंड-टू-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन तैयार करने की क्षमता होगी।

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