वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को एक नई पहचान मिली है। रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (Responsible Nations Index – RNI) में भारत को 154 देशों में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत की राष्ट्रीय भूमिका अब केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं, बल्कि नैतिक शासन, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में भी उसकी पहचान मजबूत हो रही है।
यह रैंकिंग ऐसे समय में आई है, जब दुनिया जलवायु संकट, युद्ध, असमानता और संस्थागत कमजोरियों जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में भारत का शीर्ष 20 देशों में शामिल होना उसे एक जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करता है।
क्यों खबर में है?
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भारत को रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में 154 देशों में 16वां स्थान मिला है।
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यह सूचकांक देशों का मूल्यांकन
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केवल आर्थिक आकार या सैन्य शक्ति से नहीं,
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बल्कि नैतिक शासन, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और वैश्विक स्थिरता में योगदान के आधार पर करता है।
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भारत कई समृद्ध और विकसित देशों से आगे रहा है, जिससे उसकी वैश्विक साख को नई मजबूती मिली है।
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) क्या है?
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक वैश्विक मूल्यांकन ढांचा है, जिसे वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य यह मापना है कि कोई देश:
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अपनी शक्ति का उपयोग
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अपने नागरिकों के प्रति,
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पर्यावरण के प्रति,
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और वैश्विक समुदाय के प्रति
कितनी जिम्मेदारी से करता है।
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पारंपरिक वैश्विक रैंकिंग जहाँ मुख्यतः:
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GDP,
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प्रति व्यक्ति आय,
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या सैन्य क्षमता
पर केंद्रित होती हैं, वहीं RNI इस सोच को चुनौती देता है कि
केवल आर्थिक मजबूती ही राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का पैमाना है।
RNI:
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154 देशों की तुलना करता है,
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पारदर्शी और विश्वसनीय वैश्विक डेटा स्रोतों का उपयोग करता है,
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और देशों के प्रदर्शन को
नैतिक शासन, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर मापता है।
इसका मूल उद्देश्य है:
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जवाबदेही को बढ़ावा देना,
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नीति-निर्माताओं को जन-केंद्रित नीतियों के लिए प्रेरित करना,
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और वैश्विक शासन में नैतिकता को केंद्रीय स्थान देना।
सूचकांक में भारत का प्रदर्शन
भारत की 16वीं रैंक कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है।
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भारत कई उच्च आय वाले विकसित देशों से आगे रहा है।
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यह दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद
भारत ने-
सामाजिक कल्याण,
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पर्यावरणीय प्रयास,
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और वैश्विक सहयोग
में संतुलित प्रदर्शन किया है।
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सूचकांक यह भी संकेत देता है कि:
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कई विकासशील देश
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अपनी आंतरिक चुनौतियों के बावजूद
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नैतिक और सामाजिक परिणामों में
बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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भारत की यह स्थिति निम्न क्षेत्रों में उसके फोकस को उजागर करती है:
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नागरिक कल्याण योजनाएँ
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जलवायु कार्रवाई और नवीकरणीय ऊर्जा पहल
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय कूटनीति
इस रैंकिंग से भारत की छवि:
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केवल एक उभरती आर्थिक शक्ति नहीं,
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बल्कि एक जिम्मेदार और स्थिर वैश्विक भागीदार के रूप में सुदृढ़ होती है।
RNI के तीन प्रमुख आयाम
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स तीन मुख्य आयामों पर आधारित है:
1. आंतरिक उत्तरदायित्व (Internal Responsibility)
यह आयाम मापता है:
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नागरिक गरिमा और अधिकारों की रक्षा
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न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता
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सामाजिक सुरक्षा और कल्याण
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असमानता और गरीबी से निपटने के प्रयास
यह दर्शाता है कि कोई देश अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
2. पर्यावरणीय उत्तरदायित्व (Environmental Responsibility)
इसमें आकलन होता है:
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प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन
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कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण
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जलवायु कार्रवाई
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जैव विविधता संरक्षण
यह आयाम आज के दौर में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि
जलवायु परिवर्तन वैश्विक अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।
3. बाह्य उत्तरदायित्व (External Responsibility)
यह मापता है:
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग में योगदान
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शांति स्थापना प्रयास
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मानवीय सहायता
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वैश्विक स्थिरता में भूमिका
यानी कोई देश वैश्विक समुदाय के लिए कितना जिम्मेदार भागीदार है।
इन तीनों आयामों के माध्यम से RNI
राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का एक समग्र और बहुआयामी चित्र प्रस्तुत करता है।
शीर्ष देशों की सूची में भारत की स्थिति
शीर्ष 20 देशों में भारत का स्थान विशेष ध्यान आकर्षित करता है:
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रैंक 1: सिंगापुर
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रैंक 2: स्विट्ज़रलैंड
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रैंक 3: डेनमार्क
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…
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रैंक 16: भारत (स्कोर 0.551513)
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भारत फ्रांस, नीदरलैंड्स जैसे देशों से आगे रहा है।
वहीं निचले पायदान पर:
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अफ़ग़ानिस्तान,
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उत्तर कोरिया,
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सोमालिया,
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सीरिया,
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मध्य अफ्रीकी गणराज्य
जैसे देश हैं, जहाँ आंतरिक संघर्ष, शासन संकट और मानवीय समस्याएँ गंभीर हैं।
यह तुलना दर्शाती है कि:
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स्थिर संस्थाएँ, लोकतंत्र और नीतिगत निरंतरता
जिम्मेदार राष्ट्र बनने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
भारत के लिए इस रैंकिंग का महत्व
भारत के लिए यह रैंकिंग कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
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वैश्विक छवि में सुधार
भारत को एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में मान्यता मिलती है। -
कूटनीतिक लाभ
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर-
जलवायु,
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विकास,
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और शांति
से जुड़े मुद्दों पर भारत की आवाज मजबूत होती है।
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नीति-निर्माण के लिए संकेत
यह रैंकिंग सरकार को यह दिखाती है कि-
किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है,
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और किन नीतियों को और मजबूत किया जाना चाहिए।
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