भारत ने जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) के तहत अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7) प्रस्तुत कर दी है। यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 26 फरवरी 2026 को निर्धारित वैश्विक समय-सीमा (28 फरवरी 2026) से पहले जमा की गई।
यह रिपोर्ट न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि देश जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है।
क्या है सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7)?
सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7) एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो यह बताता है कि भारत जैव विविधता संरक्षण के लिए किस प्रकार के कदम उठा रहा है और उसकी प्रगति क्या है।
यह रिपोर्ट CBD के तीन प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित है:
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जैव विविधता का संरक्षण
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प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग
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आनुवंशिक संसाधनों से लाभ का न्यायसंगत वितरण
इस रिपोर्ट के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह CBD के अनुच्छेद 26 के तहत अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन कर रहा है।
वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप भारत
भारत की 2026 की यह रिपोर्ट कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF) के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना है।
इस रिपोर्ट में कुल 142 राष्ट्रीय संकेतकों (indicators) का उपयोग किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को मापते हैं। ये संकेतक भारत के 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBTs) से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सभी 23 लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं एक-दूसरे के अनुरूप हैं।
जैव विविधता संरक्षण में भारत की प्रगति
रिपोर्ट में वन और पारिस्थितिकी प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दर्शाया गया है:
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दर्ज वन क्षेत्र: 7,75,377 वर्ग किमी (23.59%)
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वन आवरण: 5,20,365 वर्ग किमी (15.83%)
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कुल वन एवं वृक्ष आवरण: 8,27,356.95 वर्ग किमी (25.17%)
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रामसर आर्द्रभूमि स्थल: 2014 में 26 से बढ़कर 2026 में 98
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत ने दीर्घकालिक योजना और मजबूत प्रशासनिक ढांचे के जरिए पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति की है।
वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धियां
भारत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल की है। रिपोर्ट में संरक्षित क्षेत्रों और प्रजातियों की संख्या में वृद्धि को प्रमुख उपलब्धि के रूप में बताया गया है।
संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क:
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58 टाइगर रिजर्व
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33 एलीफेंट रिजर्व
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18 बायोस्फीयर रिजर्व
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106 राष्ट्रीय उद्यान
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574 वन्यजीव अभयारण्य
प्रमुख वन्यजीव आंकड़े:
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बाघ: 3,682 (दुनिया के 70% से अधिक)
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एक सींग वाले गैंडे: 4,014
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जंगली हाथी: 22,446
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एशियाई शेर: 891
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हिम तेंदुआ: 718 (पहली राष्ट्रीय गणना)
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नदी डॉल्फिन: 6,327
ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि भारत ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण पेश किया है।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने बुनियादी ढांचा, कृषि, वानिकी और तटीय पारिस्थितिकी जैसे क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण को एकीकृत किया है।
इसका मतलब है कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।
जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) क्या है?
जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) एक वैश्विक पर्यावरणीय संधि है, जिसे 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में अपनाया गया था।
इसका उद्देश्य है:
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जैव विविधता का संरक्षण
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संसाधनों का सतत उपयोग
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आनुवंशिक संसाधनों से लाभ का समान वितरण
CBD के तहत सभी सदस्य देशों को समय-समय पर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है, ताकि वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण की निगरानी की जा सके।
भारत के लिए क्या है इसका महत्व?
भारत की 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट यह दर्शाती है कि देश पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर है और वैश्विक मंच पर अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहा है।
यह रिपोर्ट न केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि यह देश के अंदर नीति निर्माण और भविष्य की रणनीतियों के लिए भी एक मार्गदर्शक के रूप में काम करती है।

