भारत-ब्रिटेन संयुक्त वक्तव्य 2025: रणनीतिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी
भारत-ब्रिटेन संयुक्त वक्तव्य 2025: रणनीतिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी

भारत-ब्रिटेन संयुक्त वक्तव्य 2025: रणनीतिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी

9 अक्टूबर 2025 को भारत और यूनाइटेड किंगडम ने द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर चिह्नित किया। इस दिन जारी किए गए व्यापक संयुक्त बयान ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को उजागर किया। यह ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर का भारत का पहला आधिकारिक दौरा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई 2025 में यूके दौरे का प्रतिपूरक माना गया। उस दौरे के दौरान भारत–यूके समग्र आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) और Vision 2035 रोडमैप पर हस्ताक्षर हुए थे।


आर्थिक और व्यापारिक सहयोग

दोनों प्रधानमंत्रियों ने आर्थिक सहयोग की गति को संतोषजनक बताया और CETA के शीघ्र अनुमोदन की अपेक्षा जताई। इस समझौते के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (JETCO) को पुनः प्रारंभ किया गया ताकि CETA के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सके और द्विपक्षीय आर्थिक गवर्नेंस को गतिशील बनाया जा सके।

शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित CEO फोरम में 125 से अधिक ब्रिटिश CEOs, उद्यमी और विश्वविद्यालय प्रमुख शामिल हुए। मुख्य सहयोग क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • स्वच्छ ऊर्जा

  • उन्नत विनिर्माण

  • रक्षा और एयरोस्पेस

  • विज्ञान और नवाचार

  • खाद्य और उपभोक्ता वस्तुएं

साथ ही, UK–India Infrastructure Financing Bridge (UKIIFB) को सतत अवसंरचना सहयोग का मॉडल बताया गया।


नवाचार और तकनीकी साझेदारी

दोनों देशों ने Tech Security Initiative (TSI) के तहत कई संयुक्त तकनीकी परियोजनाओं की घोषणा की। प्रमुख पहलें:

  1. India–UK Connectivity and Innovation Centre: 6G, नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क और टेलीकॉम साइबरसिक्योरिटी के लिए £24 मिलियन फंडिंग।

  2. India–UK Joint Centre for AI: स्वास्थ्य, जलवायु और फिनटेक में नैतिक और स्केलेबल AI को बढ़ावा देना।

  3. Critical Minerals Collaboration Guild और IIT-ISM धनबाद में Satellite Campus के साथ क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी का चरण 2।

  4. बायोटेक साझेदारी: Henry Royce Institute और Oxford Nanopore जैसे UK संस्थान भारतीय साझेदारों के साथ जीनोमिक्स, बायोमैन्युफैक्चरिंग और 3D बायोप्रिंटिंग में सहयोग करेंगे।


रक्षा और सुरक्षा सहयोग

द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। मुख्य परिणाम:

  • नौसेना सहयोग: Royal Navy का Exercise KONKAN और Indo-Pacific Oceans Initiative के तहत Regional Maritime Security Centre of Excellence।

  • वायु सेना प्रशिक्षण: भारतीय वायु सेना प्रशिक्षकों का RAF प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समावेश।

  • साझा विकास: समुद्री इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियाँ।

  • हथियार आपूर्ति: Lightweight Multirole Missiles (LMM) आत्मनिर्भर भारत उद्देश्यों के अनुरूप।

  • आतंकवाद-विरोधी सहयोग: अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए हमले की निंदा और काउंटरटेररिज्म, इंटेलिजेंस साझा और वित्तीय ट्रैकिंग पर सहमति।


जलवायु और हरित ऊर्जा

दोनों राष्ट्रों ने अपने नेट-जीरो लक्ष्यों की पुष्टि करते हुए कई पहलें शुरू कीं:

  • India–UK Climate Finance Initiative

  • Joint Climate Tech Start-up Fund

  • Offshore Wind Taskforce

  • Global Clean Power Alliance (GCPA) के माध्यम से सहयोग

इन पहलों का उद्देश्य हरित निवेश बढ़ाना और AI-संचालित जलवायु समाधानों में नवाचार को बढ़ावा देना है।


शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

शिक्षा क्षेत्र को प्रमुख स्तंभ माना गया। कुछ प्रमुख पहलें:

  • भारत में UK विश्वविद्यालयों के नए कैंपस: University of Southampton (गुरुग्राम) और University of Liverpool, York, Aberdeen, Bristol।

  • GIFT City और Bengaluru में Lancaster University और University of Surrey के नए कैंपस।

  • पहला Ministerial Strategic Education Dialogue संस्थागत सहयोग को मजबूती देगा।

  • Migration and Mobility Partnership (MMP) के तहत भारतीय प्रवासियों को समर्थन और अवसर प्रदान करना।


क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग

नेताओं ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन की पुष्टि की।

  • भारत के संशोधित UN Security Council में स्थायी सदस्य बनने के समर्थन की UK ने पुष्टि की।

  • यूक्रेन में शांति की अपील और वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत।

  • गाजा के लिए अमेरिका की शांति योजना का समर्थन, जिसमें संघर्षविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता शामिल।

  • Commonwealth सुधार, जलवायु कार्रवाई और युवा भागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

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