भारत-ब्रिटेन नए समझौते से कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का बोझ कम
भारत-ब्रिटेन नए समझौते से कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का बोझ कम

भारत-ब्रिटेन नए समझौते से कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का बोझ कम

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने हाल ही में एक सामाजिक सुरक्षा समझौते (Social Security Agreement – SSA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Double Social Security Contribution) से बचाना है। यह समझौता 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

यह पहल भारत–यूके व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (Comprehensive Economic Trade Agreement – CETA) का हिस्सा है और इसे दोनों देशों के बीच पेशेवर गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


भारत–यूके सामाजिक सुरक्षा समझौता क्या है?

SSA के तहत, यदि किसी कर्मचारी को अधिकतम 36 महीनों के लिए अस्थायी रूप से दूसरे देश में नियुक्त किया जाता है, तो उसे दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान नहीं देना होगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी अपने मूल देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अंतर्गत संरक्षित रहेगा और दूसरे देश में दोहरी भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी।

इस पहल से पहले, भारत या ब्रिटेन में अस्थायी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को दोनों देशों की पेंशन और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान देना पड़ता था, जिससे उनके मासिक वेतन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था और नियोक्ताओं की लागत भी बढ़ती थी। अब इस समझौते के लागू होने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी।


अस्थायी कर्मचारियों के लिए लाभ

  1. आर्थिक राहत और वेतन संरक्षण
    दोहरी अंशदान की बाधा समाप्त होने से कर्मचारियों को मासिक वेतन में अधिक राहत मिलेगी। भारतीय पेशेवर जो यूके में अल्पकालिक परियोजनाओं पर काम करते हैं, अब अपने मूल देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के तहत सुरक्षित रहेंगे, जबकि ब्रिटेन में उन्हें दोहरी भुगतान नहीं करना होगा।

  2. प्रशासनिक स्पष्टता
    इससे नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी। कंपनियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा भुगतान और उससे जुड़ी रिपोर्टिंग की जटिलताओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह अल्पकालिक अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को और अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बनाएगा।

  3. अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों में वृद्धि
    आईटी, वित्तीय सेवाएँ, शिक्षा, कंसल्टिंग और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अस्थायी विदेशी नियुक्तियाँ आम हैं। इस समझौते से भारत और यूके में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर विकल्प खुलेंगे, क्योंकि उन्हें वित्तीय और कानूनी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।


व्यापक भारत–यूके व्यापार समझौते का हिस्सा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह सामाजिक सुरक्षा समझौता भारत–यूके व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते का अभिन्न अंग है। आधुनिक व्यापार समझौतों में अब केवल वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान ही नहीं, बल्कि श्रम गतिशीलता, पेशेवर अवसर और सामाजिक सुरक्षा को भी केंद्रीय महत्व दिया जा रहा है।

इस समझौते का महत्व इस बात में भी है कि यह दो देशों के पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को सुगम बनाता है। कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करने में अधिक लचीलापन महसूस करेंगी, जिससे दोनों देशों के व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूती मिलेगी।


श्रमिक गतिशीलता और आर्थिक प्रभाव

यह समझौता अस्थायी नियुक्तियों पर काम कर रहे कर्मचारियों को निरंतर सामाजिक सुरक्षा कवरेज सुनिश्चित करता है। इससे वित्तीय सुरक्षा के साथ-साथ कामगारों के मानसिक तनाव में भी कमी आएगी।

इसके अलावा, इस समझौते से भारत की अंतरराष्ट्रीय पेशेवर नीति को भी बल मिलेगा। विदेशों में काम कर रहे कुशल भारतीय पेशेवर अब सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे के बिना अपने कौशल का उपयोग कर सकेंगे। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहभागिता को और सशक्त बनाएगा, क्योंकि कंपनियों के लिए कर्मचारी तैनाती की लागत कम होगी और पेशेवर गतिशीलता बढ़ेगी।


सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) क्या होते हैं?

सामाजिक सुरक्षा समझौते द्विपक्षीय व्यवस्थाएँ होती हैं, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों को एक ही अवधि के लिए दो देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने से बचाना है। भारत ने अब तक कई देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं।

इन समझौतों के प्रमुख लाभ हैं:

  • पेंशन अधिकारों की सुरक्षा

  • कर्मचारियों के लिए वित्तीय राहत

  • नियोक्ताओं के अनुपालन व्यय में कमी

  • अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों की सुविधा और आकर्षण

SSA से कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को लाभ मिलता है, और यह वैश्विक रोजगार बाजार में भारत के पेशेवरों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करता है।


अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक संदर्भ

इसी दिन, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत–चीन रणनीतिक संवाद में भी भाग लिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा की और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की। सामाजिक सुरक्षा समझौते और आर्थिक सहयोग की पहल भारत की सक्रिय और संतुलित कूटनीतिक भूमिका को दर्शाती हैं।

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