रक्षा मंत्री ने माउंट एकॉनकागुआ अभियान को दिखाई हरी झंडी
रक्षा मंत्री ने माउंट एकॉनकागुआ अभियान को दिखाई हरी झंडी

रक्षा मंत्री ने माउंट एकॉनकागुआ अभियान को दिखाई हरी झंडी

भारत ने वैश्विक पर्वतारोहण मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति को एक बार फिर मजबूती दी है। राजनाथ सिंह ने 05 फ़रवरी 2026 को अर्जेंटीना में स्थित माउंट एकॉनकागुआ के लिए एक प्रतिष्ठित भारतीय पर्वतारोहण अभियान को औपचारिक रूप से रवाना किया। यह कार्यक्रम साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली से आयोजित हुआ, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व मिला।

यह संयुक्त अभियान साहसिक प्रशिक्षण, शारीरिक सहनशक्ति और नेतृत्व क्षमता के विकास पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाता है। साथ ही यह दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक पर भारतीय पर्वतारोहियों की मजबूत उपस्थिति को भी रेखांकित करता है।


माउंट एकॉनकागुआ: एशिया के बाहर सबसे ऊँची चुनौती

लगभग 6,961 मीटर ऊँचा माउंट एकॉनकागुआ न केवल दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी है, बल्कि एशिया के बाहर भी यह दुनिया की सर्वोच्च पर्वत चोटी मानी जाती है। यह पर्वत एंडीज पर्वत श्रृंखला में स्थित है और अपने कठोर मौसम, तीव्र हवाओं और ऑक्सीजन की कमी के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ चढ़ाई करना केवल शारीरिक ताकत की परीक्षा नहीं होती, बल्कि मानसिक दृढ़ता, रणनीतिक योजना और टीमवर्क की भी सख्त परीक्षा होती है। दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए यह एक ड्रीम पीक मानी जाती है, जिसे फतह करना अत्यंत सम्मान की बात समझी जाती है।


NIM और JIM&WS का संयुक्त प्रयास बना मिशन की ताकत

यह ऐतिहासिक अभियान नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।

दोनों संस्थान भारत में उच्च-ऊँचाई प्रशिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। यहाँ सशस्त्र बलों के जवानों के साथ-साथ नागरिक प्रशिक्षुओं को भी पर्वतारोहण, हिम संचालन, आपदा प्रबंधन और सर्वाइवल तकनीकों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब साहसिक खेलों को केवल रोमांच नहीं, बल्कि रणनीतिक क्षमता निर्माण के रूप में भी विकसित कर रहा है।


रक्षा मंत्री का प्रेरणादायक संदेश

अभियान को हरी झंडी दिखाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पर्वतारोहण केवल ऊँचाइयों को छूने का नाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व और सामूहिक प्रयास की जीवंत पाठशाला है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय दल इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करेगा और देश का गौरव बढ़ाएगा। उनके अनुसार ऐसे अभियानों से युवाओं में साहसिक सोच विकसित होती है और सशस्त्र बलों की आपदा प्रतिक्रिया तथा कठिन इलाकों में संचालन क्षमता भी सुदृढ़ होती है।


छह सदस्यीय अनुभवी विशेष दल संभालेगा मोर्चा

इस अभियान में छह अत्यंत अनुभवी प्रशिक्षक शामिल किए गए हैं:

  • कर्नल हेम चंद्र सिंह

  • कैप्टन जी. संतोष कुमार

  • दीप बहादुर साही

  • विनोद गुसाईं

  • नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह

  • हवलदार रमेश कुमार

ये सभी सदस्य पहले भी कई उच्च-ऊँचाई अभियानों का सफल संचालन कर चुके हैं और हिम संचालन व सर्वाइवल प्रशिक्षण में विशेषज्ञ माने जाते हैं। अभियान की शुरुआत 6 फ़रवरी 2026 से होगी और इसके महीने के अंत तक पूर्ण होने की संभावना है।


क्यों रणनीतिक रूप से अहम हैं ऐसे पर्वतारोहण मिशन?

ऐसे अभियानों का महत्व केवल खेल या रिकॉर्ड तक सीमित नहीं होता। ऊँचाई पर शरीर की प्रतिक्रिया, चरम मौसम में निर्णय क्षमता और सीमित संसाधनों में जीवन रक्षा के अनुभव भविष्य में सैन्य अभियानों और आपदा राहत कार्यों में बेहद उपयोगी सिद्ध होते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पर्वतारोहण प्रशिक्षण सैनिकों की मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता और संकट प्रबंधन कौशल को कई गुना बढ़ाता है।


माउंट एकॉनकागुआ से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • यह अर्जेंटीना में एंडीज पर्वत श्रृंखला की प्रिंसिपल कॉर्डिलेरा में स्थित है

  • ऊँचाई लगभग 6,962 मीटर

  • दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी गोलार्ध की सबसे ऊँची चोटी

  • ज्वालामुखीय उत्पत्ति वाला पर्वत (वर्तमान में निष्क्रिय)

  • विश्व की सबसे कठिन गैर-तकनीकी चढ़ाइयों में गिनी जाती है


भारत की बढ़ती वैश्विक साहसिक पहचान

माउंट एकॉनकागुआ अभियान भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश साहसिक प्रशिक्षण को राष्ट्रीय क्षमता निर्माण से जोड़ रहा है। एवरेस्ट से लेकर यूरोप और अफ्रीका की ऊँची चोटियों तक भारतीय दल पहले ही अपनी दक्षता साबित कर चुके हैं।

अब यह नया मिशन भारत को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा।

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