भारत के अवसंरचना इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) की बैठक में असम में 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मंज़ूरी दी गई है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है — ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब अंडरवॉटर रोड-कम-रेल सुरंग।
कुल 33.7 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ₹18,662 करोड़ की लागत से EPC मॉडल पर विकसित की जाएगी और इसे भारत की पहली अंडरवॉटर रोड-रेल टनल माना जा रहा है।
क्या है यह ऐतिहासिक ब्रह्मपुत्र अंडरवॉटर टनल परियोजना?
यह आधुनिक कॉरिडोर गोहपुर (NH-15) को नुमालीगढ़ (NH-715) से जोड़ेगा।
प्रमुख विशेषताएँ:
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कुल लंबाई: 33.7 किमी
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अंडरवॉटर सुरंग: 15.79 किमी
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संरचना: ट्विन ट्यूब (हर ट्यूब में 2 लेन)
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एक ट्यूब में रेलवे लाइन का प्रावधान
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लागत: ₹18,662 करोड़
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मॉडल: EPC (Engineering, Procurement & Construction)
यह दुनिया की गिनी-चुनी रोड-रेल अंडरवॉटर सुरंगों में शामिल होगी और पूर्वोत्तर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
अभी क्यों ज़रूरी थी इस टनल की जरूरत?
वर्तमान में गोहपुर से नुमालीगढ़ तक की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है और सफ़र में 6 घंटे तक लगते हैं।
यह रास्ता गुजरता है:
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काजीरंगा नेशनल पार्क
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सिलघाट क्षेत्र
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बिश्वनाथ शहर
इन इलाकों से गुजरता ट्रैफिक:
⚠ वन्यजीवों के लिए खतरा
⚠ पर्यावरणीय दबाव
⚠ जाम और देरी
नई अंडरवॉटर सुरंग से:
दूरी में भारी कमी
समय में तेज़ी
पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव
सालभर निर्बाध संपर्क
रणनीतिक दृष्टि से क्यों है यह प्रोजेक्ट बेहद अहम?
यह टनल सीधे तौर पर इन राज्यों को मजबूत कनेक्टिविटी देगी:
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असम
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अरुणाचल प्रदेश
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नागालैंड
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अन्य पूर्वोत्तर राज्य
इसके रणनीतिक फायदे:
✔ सेना और रक्षा लॉजिस्टिक्स की तेज़ आवाजाही
✔ सीमावर्ती इलाकों तक सुरक्षित सप्लाई
✔ आपदा के समय निर्बाध मार्ग
✔ राष्ट्रीय सुरक्षा में मजबूती
यह पूर्वोत्तर को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाला अब तक का सबसे सुरक्षित परिवहन कॉरिडोर बनेगा।
रोड + रेल = मल्टी-मॉडल सुपर कनेक्टिविटी
यह परियोजना सीधे जुड़ेगी:
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NH-15
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NH-715
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प्रमुख रेलवे लाइनों (NFR नेटवर्क)
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हवाई अड्डों
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अंतर्देशीय जलमार्गों
साथ ही यह कनेक्ट करेगी:
8 लॉजिस्टिक नोड
11 आर्थिक केंद्र
3 सामाजिक केंद्र
2 पर्यटन हब
यानी असम को पूर्वोत्तर का लॉजिस्टिक्स और व्यापार गेटवे बनाने की पूरी तैयारी है।
अत्याधुनिक TBM तकनीक से बनेगी सुरंग
इस अंडरवॉटर टनल में इस्तेमाल होगी विश्व-स्तरीय तकनीक:
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Tunnel Boring Machine (TBM) से ट्विन टनल निर्माण
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NATM तकनीक से क्रॉसओवर
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हाई-लोड ब्रिज डिज़ाइन
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2×25 kV AC रेलवे विद्युतीकरण
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ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम
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ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन
TBM के फायदे:
✔ तेज़ निर्माण
✔ अधिक सुरक्षित
✔ पर्यावरणीय नुकसान बेहद कम
✔ दीर्घकालिक मजबूती
रोज़गार और आर्थिक विकास का बड़ा इंजन
इस परियोजना से लगभग 80 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
फायदे मिलेंगे:
उद्योगों को
पर्यटन क्षेत्र को
व्यापार और लॉजिस्टिक्स को
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को
यह असम को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
