ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ समझौतों से भारत के आयुष सिस्टम को वैश्विक बढ़ावा
ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ समझौतों से भारत के आयुष सिस्टम को वैश्विक बढ़ावा

ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ समझौतों से भारत के AYUSH सिस्टम को वैश्विक बढ़ावा

भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ अब वैश्विक मंच पर तेज़ी से अपनी जगह बना रही हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारत की AYUSH प्रणाली को ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में औपचारिक मान्यता दी गई है। दिसंबर 2025 में अंतिम रूप दिए गए इन समझौतों में पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष स्थान दिया गया है।

यह कदम न केवल भारत की सदियों पुरानी चिकित्सा परंपराओं की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि भारतीय हर्बल, वेलनेस और स्वास्थ्य सेवाओं के निर्यात में आई तेज़ वृद्धि को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञ इसे भारत की स्वास्थ्य कूटनीति (Health Diplomacy) और सॉफ्ट पावर के विस्तार की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मान रहे हैं।


खबरों में क्यों है यह घटनाक्रम?

भारत की AYUSH प्रणाली को ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में शामिल किया गया है। ये समझौते दिसंबर 2025 में संपन्न हुए, जिनके तहत—

  • पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को औपचारिक मान्यता

  • स्वास्थ्य और वेलनेस सेवाओं के लिए अलग प्रावधान

  • हर्बल उत्पादों के व्यापार में स्पष्ट नियम

तय किए गए हैं। इससे AYUSH को केवल सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि व्यापार और सेवाओं के एक मान्य क्षेत्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली है।


समझौतों में क्या-क्या घोषित किया गया?

ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों में कई अहम प्रावधान शामिल हैं—

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष परिशिष्ट (Annexures) जोड़े गए

  • AYUSH जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को औपचारिक मान्यता

  • हर्बल दवाओं, सप्लीमेंट्स और वेलनेस सेवाओं में सहयोग का ढांचा

  • नियामक स्पष्टता और व्यापार में आसानी (Ease of Doing Business)

  • पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति मज़बूत

इन प्रावधानों से भारतीय उत्पादों और सेवाओं को नियंत्रित विदेशी बाज़ारों में प्रवेश का एक स्पष्ट और भरोसेमंद रास्ता मिलता है।


AYUSH को मान्यता मिलना क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

AYUSH को औपचारिक मान्यता मिलना भारत के लिए कई स्तरों पर अहम है—

  • AYUSH भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है

  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता से विश्वसनीयता और स्वीकृति बढ़ती है

  • भारतीय निर्यातकों को सख्त नियामक वाले देशों में प्रवेश आसान होता है

  • अनुसंधान, शिक्षा और वेलनेस सेवाओं में सहयोग को बढ़ावा मिलता है

  • भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलती है

यह मान्यता यह भी दर्शाती है कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली अब केवल एलोपैथिक मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि समग्र और निवारक चिकित्सा को भी अपनाने की ओर बढ़ रही है।


AYUSH उत्पादों के निर्यात में तेज़ वृद्धि

वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक, हर्बल और समग्र उपचारों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर भारत के AYUSH निर्यात पर पड़ा है—

  • AYUSH और हर्बल उत्पादों के निर्यात में 6.11% की वृद्धि

  • 2023–24 में निर्यात मूल्य: USD 649.2 मिलियन

  • 2024–25 में निर्यात बढ़कर: USD 688.89 मिलियन

यह वृद्धि दर्शाती है कि—

  • उपभोक्ता रसायन-मुक्त और प्राकृतिक उत्पादों की ओर झुक रहे हैं

  • वेलनेस और निवारक स्वास्थ्य वैश्विक प्राथमिकता बन रहे हैं

  • भारत इस बदलती मांग को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है

ओमान और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते भविष्य में इस निर्यात को और गति दे सकते हैं।


AYUSH क्या है?

AYUSH भारत की पारंपरिक और पूरक चिकित्सा प्रणालियों का समूह है—

  • Ayurveda (आयुर्वेद)

  • Yoga (योग)

  • Naturopathy (प्राकृतिक चिकित्सा)

  • Unani (यूनानी)

  • Siddha (सिद्ध)

  • Homoeopathy (होम्योपैथी)

AYUSH प्रणाली का मूल दर्शन निवारक, समग्र और जीवनशैली-आधारित स्वास्थ्य देखभाल है। इसका उद्देश्य केवल रोग का इलाज नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली में संतुलन स्थापित करना है।


वैश्विक स्वास्थ्य और भारत की रणनीति

भारत AYUSH को केवल घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक समाधान के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है—

  • WHO द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पर बढ़ता ज़ोर

  • कोविड-19 के बाद वेलनेस और इम्युनिटी पर वैश्विक फोकस

  • योग और आयुर्वेद की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता

इन सभी कारकों ने AYUSH को भारत की विदेश नीति और व्यापार रणनीति का अहम हिस्सा बना दिया है। इस दिशा में आयुष मंत्रालय सक्रिय भूमिका निभा रहा है।


आगे की राह: अवसर और चुनौतियाँ

हालाँकि यह उपलब्धि बड़ी है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं—

  • वैज्ञानिक प्रमाण और क्लिनिकल ट्रायल की आवश्यकता

  • अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन

  • गलत दावों और अवैज्ञानिक प्रचार पर नियंत्रण

यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए, तो AYUSH भारत के लिए—

  • निर्यात वृद्धि

  • वैश्विक वेलनेस नेतृत्व

  • और स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक आर्थिक लाभ

का प्रमुख स्रोत बन सकता है।

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