भारत के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर इंडस्ट्रीज़) ने जुलाई 2025 में वर्ष-दर-वर्ष (YoY) आधार पर केवल 2% की वृद्धि दर्ज की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि यह मामूली बढ़त मिश्रित प्रदर्शन को दर्शाती है। जहाँ इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और बिजली जैसे सेक्टरों ने वृद्धि दर्ज की, वहीं कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों में गिरावट देखने को मिली।
कोर सेक्टर को समझना
भारत के औद्योगिक स्वास्थ्य का आकलन करने में कोर सेक्टर की अहम भूमिका होती है। इसमें आठ उद्योग शामिल हैं:
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कोयला (Coal)
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कच्चा तेल (Crude Oil)
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प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
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पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (Petroleum Refinery Products)
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उर्वरक (Fertilisers)
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इस्पात (Steel)
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सीमेंट (Cement)
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बिजली (Electricity)
इन आठों उद्योगों का संयुक्त भार 40.27% है सूचकांक औद्योगिक उत्पादन (IIP) में। यानी कोर सेक्टर का सीधा असर देश के औद्योगिक उत्पादन और समग्र आर्थिक गति पर पड़ता है।
जुलाई 2025 का प्रदर्शन
सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर
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इस्पात (Steel): 12.8% की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। यह सबसे ऊँचा प्रदर्शन रहा, जिसका श्रेय सरकार के बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग को जाता है।
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सीमेंट (Cement): 11.7% की बढ़त दर्ज की गई। निर्माण गतिविधियों, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने इस क्षेत्र को मजबूती दी।
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उर्वरक (Fertilisers): 2% की वृद्धि रही। खरीफ बुवाई सीजन और अनुकूल मानसून ने मांग को सहारा दिया।
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बिजली (Electricity): 0.5% की मामूली बढ़त हुई। उत्पादन स्थिर रहा, हालांकि मौसम संबंधी कारणों से आपूर्ति में कुछ बाधा आई।
जिन सेक्टरों में गिरावट आई
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कोयला (Coal): 12.3% की भारी गिरावट देखने को मिली। भारी मानसून बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियों ने खनन कार्य को प्रभावित किया।
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कच्चा तेल (Crude Oil): 1.3% की गिरावट आई। घरेलू उत्पादन लंबे समय से ठहराव का सामना कर रहा है, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भरता बनी हुई है।
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प्राकृतिक गैस (Natural Gas): 3.2% की कमी दर्ज हुई। अपस्ट्रीम गतिविधियों में कमी और उत्पादन की चुनौतियों ने इस पर असर डाला।
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पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (Petroleum Refinery Products): 1% की गिरावट हुई। डाउनस्ट्रीम गतिविधियों की सुस्ती और मांग में कमी इसकी वजह रही।
संचयी प्रदर्शन (अप्रैल–जुलाई 2025-26)
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली चार महीनों (अप्रैल से जुलाई) में कोर सेक्टर ने कुल 1.6% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कमज़ोर मानी जा रही है।
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सीमेंट: 8.9% की वृद्धि, जो निर्माण और शहरीकरण की मांग को दर्शाती है।
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इस्पात: 8.5% की वृद्धि, जिसे सरकारी पूंजीगत व्यय और पीएम गति शक्ति योजना के तहत बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का समर्थन मिला।
हालांकि ऊर्जा से जुड़े सेक्टर—कोयला, कच्चा तेल और गैस—की कमजोरी ने समग्र वृद्धि को सीमित कर दिया।
क्या कहता है यह प्रदर्शन?
जुलाई के आँकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का कोर सेक्टर फिलहाल दो अलग दिशाओं में खिंच रहा है।
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एक ओर निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उद्योग (सीमेंट, इस्पात) तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
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दूसरी ओर ऊर्जा से जुड़े सेक्टर (कोयला, तेल, गैस) कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसका सीधा असर औद्योगिक उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है क्योंकि ऊर्जा सेक्टर की कमजोरी से लागत बढ़ेगी और उत्पादन की गति धीमी हो सकती है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि मानसून की स्थिति सामान्य रही और सरकार के पूंजीगत व्यय की गति बनी रही, तो इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टरों में मजबूती बनी रहेगी।
हालांकि ऊर्जा सेक्टर की कमजोरी चिंता का विषय है। भारत अभी भी कोयला और तेल पर भारी निर्भर है, ऐसे में उत्पादन में गिरावट आयात बिल बढ़ा सकती है और मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती है।
निष्कर्ष
जुलाई 2025 में कोर सेक्टर की ग्रोथ घटकर सिर्फ 2% रही। यह मिश्रित तस्वीर बताती है कि जहाँ एक ओर निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिल रही है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियाँ अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
यदि आने वाले महीनों में ऊर्जा उत्पादन में सुधार नहीं होता, तो समग्र औद्योगिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत व्यय की रफ्तार भारत की औद्योगिक गतिविधियों को संतुलन प्रदान कर सकती है।

