भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाले कोर सेक्टर्स की रफ्तार जनवरी 2026 में कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी। Ministry of Commerce and Industry द्वारा जारी कोर उद्योगों के सूचकांक (Index of Core Industries – ICI) के अनुसार, आठ प्रमुख आधारभूत उद्योगों की संयुक्त वृद्धि दर जनवरी में 4% रही। यह दिसंबर 2025 के संशोधित 4.7% के मुकाबले कम है, जिससे संकेत मिलता है कि वर्ष की शुरुआत में औद्योगिक गतिविधियों में कुछ नरमी देखने को मिली।
हालांकि यह मंदी सभी क्षेत्रों में समान नहीं रही। जहां कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा क्षेत्र लगातार दबाव में बने रहे, वहीं स्टील और सीमेंट जैसे निर्माण से जुड़े उद्योगों ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा। यह स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था के भीतर चल रहे दोहरे रुझान को दर्शाती है—ऊर्जा उत्पादन में कमजोरी, लेकिन अवसंरचना और निर्माण गतिविधियों में मजबूती।
जनवरी 2026: सेक्टरवार प्रदर्शन की पूरी तस्वीर
जनवरी के आंकड़ों में कुछ क्षेत्रों ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की, जबकि कुछ लगातार गिरावट से जूझते रहे।
मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र
सीमेंट:
जनवरी में सीमेंट उत्पादन में 10.7% की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह लगातार दूसरा महीना है जब इस सेक्टर ने दो अंकों की वृद्धि हासिल की है, जो निर्माण परियोजनाओं में तेज़ी का साफ संकेत देता है।
स्टील:
स्टील सेक्टर ने 9.9% की मजबूत वृद्धि दिखाई। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, पुलों, एक्सप्रेसवे और रियल एस्टेट में बढ़ती मांग इसके पीछे प्रमुख कारण मानी जा रही है।
बिजली: +3.8%
उर्वरक: +3.7%
कोयला: +3.1%
इन क्षेत्रों में स्थिर लेकिन सीमित वृद्धि रही, जिससे कुल कोर सेक्टर ग्रोथ को कुछ हद तक सहारा मिला।
कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र
कच्चा तेल (Crude Oil):
जनवरी में इसमें 5.8% की गिरावट दर्ज हुई, जो लगातार पाँचवां महीना है जब उत्पादन नकारात्मक क्षेत्र में रहा।
प्राकृतिक गैस:
यह सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में दिखा, जहां 5% की गिरावट के साथ यह लगातार 19वां महीना रहा जब ग्रोथ नकारात्मक रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता में सीमाएं, पुराने फील्ड्स से घटता आउटपुट और निवेश में सुस्ती इन क्षेत्रों की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) क्या दर्शाता है?
कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI) देश के आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों के उत्पादन को मापता है, जिनमें शामिल हैं:
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कोयला
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कच्चा तेल
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प्राकृतिक गैस
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रिफाइनरी उत्पाद
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उर्वरक
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स्टील
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सीमेंट
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बिजली
इन सभी क्षेत्रों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में कुल भार लगभग 40.27% है। इसलिए ICI को भारत की औद्योगिक सेहत का शुरुआती संकेतक माना जाता है। जब कोर सेक्टर मजबूत होता है, तो आमतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और समग्र आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आती है।
कोर सेक्टर में नरमी के बावजूद IIP में मजबूती
दिलचस्प बात यह रही कि कोर सेक्टर की धीमी ग्रोथ के बावजूद भारत का समग्र औद्योगिक उत्पादन बेहतर बना रहा। जनवरी 2026 में IIP वर्ष-दर-वर्ष 7.8% बढ़ा, जो पिछले 26 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है।
इस मजबूती के पीछे प्रमुख कारण रहे—
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विनिर्माण क्षेत्र में तेज़ उत्पादन
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खनन गतिविधियों में सुधार
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बिजली उत्पादन में स्थिर विस्तार
वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी तक के दस महीनों में कोर सेक्टर की औसत वृद्धि 2.8% रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.5% थी। यानी दीर्घकालिक दृष्टि से कोर सेक्टर की गति कुछ कमजोर हुई है।
स्टील और सीमेंट क्यों बने ग्रोथ इंजन?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, स्टील और सीमेंट की मजबूत वृद्धि के पीछे सरकार की अवसंरचना प्राथमिकता सबसे बड़ा कारण है।
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केंद्र सरकार का हाईवे, रेलवे और शहरी परियोजनाओं पर बढ़ता खर्च
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राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय में तेजी
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आवास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिर मांग
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स्मार्ट सिटी और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाएं
प्रमुख रेटिंग एजेंसी ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री Aditi Nayar के अनुसार, स्टील और सीमेंट की मजबूत वृद्धि भारत में निर्माण गतिविधियों की निरंतर मजबूती को दर्शाती है, हालांकि ऊर्जा और कच्चे संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में दबाव बना हुआ है।
आगे क्या संकेत देती है यह स्थिति?
जनवरी के आंकड़े बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल दो गति में आगे बढ़ रही है—
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एक ओर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण आधारित विकास तेज़ है
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दूसरी ओर ऊर्जा उत्पादन और कुछ कच्चे संसाधन क्षेत्र संघर्ष कर रहे हैं
यदि सरकार का पूंजीगत व्यय इसी तरह ऊंचा बना रहता है, तो स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे क्षेत्र आने वाले महीनों में भी मजबूती बनाए रख सकते हैं। हालांकि कच्चे तेल और गैस उत्पादन में सुधार के बिना कोर सेक्टर की समग्र ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है।

