जून तिमाही में घटा भारत का चालू खाता घाटा, पहुँचा 2.4 अरब डॉलर पर
जून तिमाही में घटा भारत का चालू खाता घाटा, पहुँचा 2.4 अरब डॉलर पर

जून तिमाही में घटा भारत का चालू खाता घाटा, पहुँचा 2.4 अरब डॉलर पर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 01 सितम्बर 2025 को जारी आँकड़ों में बताया कि चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD) वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में घटकर 2.4 अरब डॉलर रह गया है। यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मात्र 0.2% है। एक साल पहले, यानी जून तिमाही 2024 में यह घाटा 8.6 अरब डॉलर (GDP का 0.9%) था।

इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण मजबूत सेवाओं का निर्यात और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाले बढ़े हुए प्रेषण (remittances) रहे।


चालू खाता घाटा (CAD) क्या होता है और क्यों ज़रूरी है?

चालू खाता घाटा तब होता है जब कोई देश जितना निर्यात करता है, उससे अधिक सामान, सेवाएँ और पूंजी का आयात करता है।

  • उच्च CAD → मुद्रा पर दबाव, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, और आर्थिक असंतुलन का संकेत।

  • निम्न या घटता CAD → अर्थव्यवस्था की बाहरी स्थिरता और निवेशकों के लिए भरोसे का प्रतीक।

सरल भाषा में कहें तो, अगर CAD नियंत्रित दायरे में है, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है।


तिमाहीवार प्रदर्शन – अधिशेष से घाटे तक

  • Q1 FY26 (अप्रैल–जून 2025): घाटा 2.4 अरब डॉलर (GDP का 0.2%)

  • Q4 FY25 (जनवरी–मार्च 2025): अधिशेष 13.5 अरब डॉलर (GDP का 1.3%)

  • Q1 FY25 (अप्रैल–जून 2024): घाटा 8.6 अरब डॉलर (GDP का 0.9%)

यानी पिछली तिमाही में जहाँ चालू खाता अधिशेष (surplus) में था, वहीं Q1 FY26 में यह फिर घाटे में आ गया। हालाँकि, यह घाटा अर्थशास्त्रियों के अनुमान (लगभग 7 अरब डॉलर) से कहीं कम रहा।


CAD घटने के प्रमुख कारण

1. प्रवासी भारतीयों से प्रेषण (Remittances) में रिकॉर्ड वृद्धि

  • Q1 FY26: 33.2 अरब डॉलर

  • Q1 FY25: 28.6 अरब डॉलर

  • साल-दर-साल लगभग 18% वृद्धि दर्ज हुई।

यह रकम विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भेजे गए धन से आती है, जिसने CAD को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाई।

2. सेवाओं का मजबूत निर्यात

  • Q1 FY26: 47.9 अरब डॉलर

  • Q1 FY25: 39.7 अरब डॉलर

इसमें विशेष योगदान कंप्यूटर सेवाओं और बिज़नेस सेवाओं का रहा। आईटी क्षेत्र और आउटसोर्सिंग सेवाओं की वैश्विक मांग ने भारत को लाभ पहुँचाया।

3. निवेश प्रवाह में सुधार

  • FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश): 1.6 अरब डॉलर (पिछले वर्ष 0.9 अरब डॉलर)

  • ECB (External Commercial Borrowings): 3.7 अरब डॉलर (पिछले वर्ष 1.6 अरब डॉलर)

विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने से पूंजी प्रवाह बेहतर हुआ।


चिंता के क्षेत्र

हालाँकि CAD का स्तर सकारात्मक संकेत दे रहा है, लेकिन कुछ क्षेत्र चिंता का विषय भी बने हुए हैं।

1. बढ़ता माल व्यापार घाटा

  • Q1 FY26: 68.5 अरब डॉलर

  • Q1 FY25: 56.7 अरब डॉलर

वैश्विक अनिश्चितताओं और मांग में कमी की वजह से निर्यात कमजोर रहा, जबकि आयात का दबाव बढ़ा।

2. कमजोर FDI और NRI जमा

  • FDI प्रवाह: 5.7 अरब डॉलर (पिछले वर्ष 6.2 अरब डॉलर)

  • NRI जमा: 3.6 अरब डॉलर (पिछले वर्ष 4.0 अरब डॉलर)

यानी लंबी अवधि के स्थायी निवेश और प्रवासी भारतीयों की बैंक जमा राशि में गिरावट देखने को मिली।

3. प्राथमिक आय बहिर्वाह में बढ़ोतरी

  • Q1 FY26: 12.8 अरब डॉलर

  • Q1 FY25: 10.9 अरब डॉलर

निवेश आय पर ज्यादा भुगतान होने से यहाँ दबाव देखा गया।


परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए मुख्य बिंदु

  1. चालू खाता घाटा (CAD): तब होता है जब आयात > निर्यात।

  2. CAD के घटक:

    • व्यापार संतुलन (निर्यात – आयात)

    • सेवाएँ

    • शुद्ध आय (विदेश से)

    • शुद्ध अंतरण (Remittances)

  3. भारत का Q1 FY26 CAD: 2.4 अरब डॉलर (GDP का 0.2%)।

  4. मुख्य सकारात्मक कारण: सेवाओं का निर्यात और बढ़ते प्रेषण।

  5. मुख्य चुनौती: माल व्यापार घाटा और कमजोर FDI।

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