भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 28 नवंबर 2025 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $1.877 अरब की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही देश का कुल फॉरेक्स रिज़र्व घटकर $686.227 अरब पर आ गया। यह कमी ऐसे समय आई है जब हाल के कई हफ्तों से विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। हालांकि, पूरे साल के परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत के रिज़र्व में अब भी मज़बूत सकारात्मक वृद्धि बनी हुई है।
इस सप्ताह की गिरावट का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets – FCA) में आई तेज कमी रही, जबकि इसके विपरीत स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह मिश्रित रुझान भारत की फॉरेक्स मैनेजमेंट रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों — दोनों को एक साथ दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चार प्रमुख हिस्सों से मिलकर बनता है—
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विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA)
इसमें डॉलर, यूरो, पाउंड, येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियाँ शामिल होती हैं। यह फॉरेक्स रिज़र्व का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। -
स्वर्ण भंडार (Gold Reserves)
RBI द्वारा सुरक्षित रखे गए सोने का मूल्य, जो वैश्विक कीमतों के अनुसार बदलता रहता है। -
विशेष आहरण अधिकार (SDRs)
IMF द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रिज़र्व संपत्ति। -
IMF में रिज़र्व पोज़िशन
IMF में भारत की वित्तीय हिस्सेदारी, जिसे आपात स्थिति में निकाला जा सकता है।
साप्ताहिक आंकड़े: 28 नवंबर 2025 को समाप्त सप्ताह
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सप्ताहवार बदलाव इस प्रकार रहे—
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FCA:
$3.569 अरब की गिरावट
कुल FCA → $557.031 अरब -
स्वर्ण भंडार:
$1.613 अरब की बढ़ोतरी
कुल स्वर्ण भंडार → $105.795 अरब -
SDRs:
$0.063 अरब (63 मिलियन डॉलर) की वृद्धि
कुल SDR → $18.628 अरब -
IMF रिज़र्व पोज़िशन:
$0.016 अरब (16 मिलियन डॉलर) की बढ़ोतरी
कुल पोज़िशन → $4.772 अरब
स्पष्ट है कि FCA में आई बड़ी गिरावट ही कुल फॉरेक्स रिज़र्व में कमी का मुख्य कारण बनी, जबकि सोना और अन्य घटकों ने नुकसान को आंशिक रूप से संतुलित किया।
2025 में अब तक का प्रदर्शन: बड़ी तस्वीर
हालिया साप्ताहिक गिरावट के बावजूद, 2025 में अब तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग $48 अरब की बढ़त दर्ज की गई है।
पिछले वर्षों का रुझान देखें तो—
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2023: $58 अरब की वृद्धि
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2024: $20 अरब का इज़ाफ़ा
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2022: $71 अरब की तेज गिरावट (वैश्विक संकट के कारण)
इसका मतलब है कि भारत ने 2022 की बड़ी गिरावट के बाद लगातार दो वर्षों से फॉरेक्स रिज़र्व को मज़बूती से पुनर्निर्मित किया है।
विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव क्यों होता है?
फॉरेक्स रिज़र्व स्थिर आंकड़ा नहीं होता। इसमें बदलाव कई कारणों से होता है—
1. RBI का बाज़ार में हस्तक्षेप
जब रुपया तेज़ी से गिरता है, तब RBI डॉलर बेचता है — जिससे रिज़र्व घटता है।
जब रुपया मजबूत होता है, तब RBI डॉलर खरीदता है — जिससे रिज़र्व बढ़ता है।
2. वैल्यूएशन प्रभाव
डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड या येन में गिरावट आने पर FCA का कुल मूल्य घट जाता है, भले ही RBI ने डॉलर बेचे न हों।
3. सोने की कीमतों में बदलाव
सोने के वैश्विक भाव बढ़ने पर स्वर्ण भंडार का मूल्य अपने-आप बढ़ जाता है।
4. विदेशी निवेश प्रवाह
FPI/FII निवेश आने पर रिज़र्व बढ़ता है और पूंजी निकलने पर दबाव आता है।
स्वर्ण भंडार में तेज़ बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
इस सप्ताह $1.613 अरब की सोने में बढ़ोतरी कई अहम संकेत देती है—
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वैश्विक स्तर पर भूराजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है
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निवेशक और केंद्रीय बैंक सेफ हेवन एसेट के रूप में सोना बढ़ा रहे हैं
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RBI की रणनीति अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डाइवर्सिफ़ाई करने की है, ताकि केवल डॉलर पर निर्भरता न रहे
पिछले कुछ वर्षों में RBI ने लगातार सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिहाज़ से अहम मानी जाती है।
विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए क्यों अहम है?
मजबूत फॉरेक्स रिज़र्व—
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रुपये की स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है
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आयात (विशेषकर कच्चा तेल) के भुगतान को सुरक्षित बनाता है
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विदेशी कर्ज़ और वैश्विक झटकों से सुरक्षा देता है
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अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है
वर्तमान स्तर पर भारत का रिज़र्व 10–11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम है, जो वैश्विक मानकों के अनुसार एक मजबूत स्थिति मानी जाती है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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कुल विदेशी मुद्रा भंडार: $686.227 अरब
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साप्ताहिक गिरावट: $1.877 अरब
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FCA में कमी: $3.569 अरब
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स्वर्ण भंडार में वृद्धि: $1.613 अरब
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2025 में अब तक कुल बढ़त: लगभग $48 अरब
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RBI की भूमिका: रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करना और आर्थिक सुरक्षा बनाए रखना

