वित्त वर्ष 2025 में भारत के विदेशी निवेश में 67% की जबरदस्त बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2025 में भारत के विदेशी निवेश में 67% की जबरदस्त बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2025 में भारत के विदेशी निवेश में 67% की जबरदस्त बढ़ोतरी

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2024–25 कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है। इस दौरान भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश परिदृश्य में नाटकीय बदलाव देखने को मिला है। आँकड़ों के अनुसार, भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश (Overseas Direct Investment) 67.74% की तेज़ वृद्धि दर्ज करते हुए पिछले वर्ष के 24.8 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।

यह उछाल न केवल भारत की वैश्विक निवेश क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय कंपनियाँ अब दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में अपना मजबूत आधार स्थापित करने के लिए अधिक रणनीतिक और टिकाऊ दृष्टिकोण अपना रही हैं।

ईवाई (EY) की ताज़ा रिपोर्ट “India Abroad: Navigating the Global Landscape for Overseas Investment – 2025” इस बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारणों को रेखांकित करती है। रिपोर्ट बताती है कि यह उछाल ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक) सिद्धांतों, गिफ्ट सिटी सुधारों, और वैश्विक कर पुनर्संरेखन के संगम का नतीजा है, जिसने भारतीय कंपनियों की ग्लोबल एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी को नया रूप दिया है।


निवेश वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण

1. ईएसजी और रणनीतिक विविधीकरण पर ध्यान

आज की दुनिया में ईएसजी (Environment, Social, Governance) सिद्धांत सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि निवेश का अनिवार्य मानक बन चुके हैं। भारतीय कंपनियाँ अब अपने विदेशी विस्तार में ईएसजी को शामिल कर रही हैं।

  • यूरोपीय संघ में कार्बन प्राइसिंग

  • अमेरिका में सप्लाई चेन ऑडिट

  • निवेशकों की स्थिरता संबंधी अपेक्षाएँ

ये सभी कारक कंपनियों को सतत निवेश के लिए मजबूर कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय कंपनियाँ अब सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सतत विकास को ध्यान में रखते हुए निवेश कर रही हैं।

👉 सबसे अधिक निवेश पाने वाले क्षेत्र:

  • सूचना प्रौद्योगिकी

  • ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी

  • दवा और स्वास्थ्य क्षेत्र

  • ऑटोमोबाइल और मोबिलिटी

  • आतिथ्य और लाइफ़स्टाइल अवसंरचना


2. गिफ्ट सिटी का उदय

गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी (Gujarat International Finance Tec-City) अब विदेशी निवेश संरचना का अहम केंद्र बन चुका है।

  • आरबीआई के आँकड़ों के अनुसार गिफ्ट सिटी के माध्यम से निवेश FY23 के 0.04 अरब डॉलर से बढ़कर FY25 में 0.81 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

गिफ्ट सिटी कंपनियों को कई बड़े फायदे प्रदान कर रही है:

  • कर-कुशल संरचनाएँ

  • पारदर्शी नियमन

  • परिचालन और लागत लाभ

  • POEM (Place of Effective Management) पर नियंत्रण

इससे यह स्पष्ट है कि भारत अब केवल निवेश आकर्षित करने वाला देश ही नहीं, बल्कि निवेश संरचना तैयार करने का भी एक ग्लोबल हब बन रहा है।


3. नए निवेश गंतव्य

भारतीय कंपनियों के लिए पारंपरिक निवेश केंद्र जैसे सिंगापुर, मॉरीशस और नीदरलैंड्स अब नए गंतव्यों के साथ पूरक हो रहे हैं।

उभरते हुए नए केंद्र हैं:

  • यूएई (UAE): CEPA समझौते के तहत ऊर्जा, अवसंरचना, फिनटेक और डिजिटल टेक में निवेश।

  • लक्ज़मबर्ग: फंड मैनेजमेंट और ग्रीन फाइनेंस का प्रमुख केंद्र।

  • स्विट्ज़रलैंड: बौद्धिक संपदा अधिकार और मजबूत कानूनी-वित्तीय ढाँचे की वजह से पसंदीदा।

इन नए निवेश गंतव्यों ने भारतीय कंपनियों को विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाने और जोखिम कम करने का अवसर दिया है।


4. वैश्विक कर सुधारों का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय कर सुधार, खासकर BEPS 2.0 और OECD का ग्लोबल मिनिमम टैक्स, भारतीय कंपनियों की निवेश रणनीति को बदल रहे हैं।

अब कंपनियाँ अधिक पारदर्शी और सब्सटेंस-बेस्ड मार्ग अपनाने लगी हैं। इससे कर चोरी या जटिल टैक्स स्ट्रक्चर के बजाय कंपनियाँ लंबे समय तक टिकाऊ निवेश की ओर बढ़ रही हैं।


व्यापक प्रभाव

इस बढ़ते विदेशी निवेश का असर सिर्फ रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि लेन-देन की संख्या में भी 15% की वृद्धि दर्ज की गई है।

इससे साफ है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय कंपनियाँ सीमा-पार निवेश को लेकर अधिक आत्मविश्वास और स्थिरता महसूस कर रही हैं।


निष्कर्ष

वित्त वर्ष 2025 भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक विस्तार का टर्निंग पॉइंट साबित हो रहा है। 67% से अधिक की वृद्धि सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि यह भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, वैश्विक निवेशकों के भरोसे और सतत विकास की दिशा में गंभीर प्रतिबद्धता का संकेत है।

गिफ्ट सिटी जैसे सुधार, ईएसजी पर ध्यान और नए निवेश गंतव्यों की तलाश यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियाँ वैश्विक बाजार में और भी सशक्त खिलाड़ी बनकर उभरेंगी।

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