भारत ने अपनी ऊर्जा संक्रमण यात्रा में एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है। 31 अक्टूबर 2025 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 5,05,023 मेगावाट तक पहुँच गई है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि भारत की गैर-जीवाश्म (Non-Fossil) आधारित क्षमता 2,59,423 मेगावाट हो गई है — जो पहली बार जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 2,45,600 मेगावाट से अधिक है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब एक स्वच्छ, सुरक्षित और दीर्घकालिक ऊर्जा भविष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है।
यह उपलब्धि न केवल पेरिस समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, बल्कि यह भी बताती है कि देश नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ उभार
भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता में सबसे बड़ा योगदान नवीकरणीय ऊर्जा का है।
नवीनतम डेटा के अनुसार, देश में कुल 2,50,643 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित है, जो 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है।
नवीकरणीय क्षमता का ब्योरा
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सौर ऊर्जा: 1,29,924 मेगावाट
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पवन ऊर्जा: 53,600 मेगावाट
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स्मॉल हाइड्रो, बायोमास, वेस्ट-टू-एनर्जी: शेष क्षमता
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परमाणु ऊर्जा: 8,780 मेगावाट
इससे स्पष्ट है कि भारत बड़े पैमाने पर ऊर्जा आपूर्ति को स्वच्छ स्रोतों पर निर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
ऊर्जा परिवर्तन को गति देने वाली प्रमुख सरकारी नीतियाँ
भारत की नवीकरणीय क्षमता वृद्धि तेज़ करने के पीछे सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ प्रमुख कारण रही हैं। इनका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, आयात-निर्भरता कम करना, टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना और डीकार्बोनाइजेशन को गति देना है।
1. ISTS शुल्क माफी
सौर और पवन परियोजनाओं के लिए इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) चार्ज माफी दी गई है, जिससे बड़ी परियोजनाओं को आर्थिक प्रोत्साहन मिला।
2. प्रतिस्पर्धी टैरिफ-आधारित बिडिंग
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिजली दरें कम करने के लिए टैरिफ-आधारित बिडिंग अनिवार्य की गई।
3. प्रति वर्ष 50 गीगावाट नवीकरणीय खरीद योजना
सरकार ने 2023–28 के लिए प्रति वर्ष 50 GW नवीकरणीय ऊर्जा खरीद का लक्ष्य तय किया, जिससे निवेश प्रवाह बढ़ा।
4. 100% FDI अनुमति
स्वचालित मार्ग के तहत विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया, जिससे भारत वैश्विक नवीकरणीय निवेश का प्रमुख गंतव्य बना।
5. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर और बड़े सौर पार्क परियोजनाओं ने ग्रिड स्थिरता और बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाया।
हाल की प्रमुख योजनाएँ जो परिवर्तन का नेतृत्व कर रही हैं
1. पीएम-कुसुम योजना
कृषि क्षेत्र में सौर पंप, सोलराइजेशन और कृषक ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा।
2. पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना
शहरी और ग्रामीण घरों के लिए रूफटॉप सोलर की तेज़ी से बढ़ोतरी।
3. उच्च दक्षता वाले सोलर PV मॉड्यूल का राष्ट्रीय कार्यक्रम
भारत को सौर विनिर्माण हब बनाने का लक्ष्य।
4. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
डीकार्बोनाइजेशन, निर्यात और हरित उद्योगों को बढ़ावा देने की बड़ी योजना।
5. ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट VGF सहायता
1 गीगावाट की शुरुआती ऑफशोर पवन परियोजनाओं को वित्तीय समर्थन।
6. अनिवार्य RPO और RCO
राज्यों को नवीकरणीय ऊर्जा खरीद अनिवार्य, ताकि मांग स्थिर रहे।
इसके परिणामस्वरूप भारत ने जून 2025 में अपनी स्थापित क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया—पेरिस समझौते के NDCP लक्ष्य से 5 वर्ष पहले।
परमाणु ऊर्जा: भारत का भविष्य का ऊर्जा स्तंभ
भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह देश को बेस-लोड स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराएगा।
प्रमुख पहलें
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20,000 करोड़ रुपये का न्यूक्लियर एनर्जी मिशन
SMRs (Small Modular Reactors) विकसित करने के लिए। -
कानूनी सुधार
निजी क्षेत्र को परमाणु क्षेत्र में भागीदारी की अनुमति देने की तैयारी। -
220 MW भारत स्मॉल रिएक्टर
औद्योगिक उपयोग के लिए स्वदेशी मॉडल। -
ASHVINI JV (NPCIL–NTPC)
परमाणु परियोजनाओं के तेज़ विस्तार के लिए विशेष संयुक्त उद्यम।
भंडारण और ग्रिड स्थिरता: नवीकरणीय ऊर्जा की भविष्य सुरक्षा
भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा जोड़ रहा है, इसलिए ऊर्जा भंडारण बेहद महत्वपूर्ण है।
Battery Energy Storage Systems (BESS)
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VGF सहायता के तहत 13.22 GWh क्षमता निर्माणाधीन
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जून 2025 में अतिरिक्त 30 GWh को मंजूरी
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ
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10 परियोजनाएँ
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11,870 मेगावाट क्षमता
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ग्रिड स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण
ऑफशोर विंड और ग्रीन हाइड्रोजन: भारत का अगला ऊर्जा भविष्य
भारत ने ऑफशोर विंड स्थापना के लिए स्पष्ट नीति जारी की है और शुरुआती 1 GW परियोजनाओं को VGF के साथ समर्थन दिया है।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य:
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5 MMT वार्षिक उत्पादन
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125 GW नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान
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भारी उद्योग, उर्वरक, रसायन और परिवहन क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन
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लाखों ग्रीन जॉब्स का सृजन

