भारत के श्रम बाज़ार से 2025 की दूसरी तिमाही में उत्साहजनक संकेत मिले हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, जुलाई–सितंबर 2025 के दौरान देश की कुल बेरोज़गारी दर (Unemployment Rate) घटकर 5.2% रही, जो कि पहली तिमाही (अप्रैल–जून) के 5.4% की तुलना में कम है। यह सुधार खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला श्रमिकों की बढ़ती भागीदारी के कारण देखने को मिला है।
तिमाही तुलना: बेरोज़गारी दर में गिरावट
| अवधि | बेरोज़गारी दर |
|---|---|
| Q1 2025 (अप्रैल–जून) | 5.4% |
| Q2 2025 (जुलाई–सितंबर) | 5.2% |
यह डेटा Current Weekly Status (CWS) पद्धति पर आधारित है, जो यह मापता है कि संदर्भित सात दिनों के भीतर कोई व्यक्ति कार्यरत था या काम की तलाश में था।
इस गिरावट से स्पष्ट है कि भारत का श्रम बाजार धीरे-धीरे महामारी के प्रभाव से उबर रहा है और रोजगार सृजन में निरंतर सुधार हो रहा है।
शहरी–ग्रामीण रोजगार परिदृश्य
| क्षेत्र | बेरोज़गारी दर |
|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्र | 4.4% |
| शहरी क्षेत्र | 6.9% |
ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। कृषि कार्यों, मनरेगा जैसी योजनाओं, और मौसमी रोजगार अवसरों ने बड़ी संख्या में श्रमिकों को काम प्रदान किया। ग्रामीण इलाकों में रोजगार सृजन में सरकारी निवेश और स्थानीय उद्योगों की भागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं दूसरी ओर, शहरी इलाकों में बेरोज़गारी दर 6.9% पर बनी रही, जो अपेक्षाकृत अधिक है। शहरी रोजगार बाजार अभी भी संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा है, जैसे– उद्योगों में सीमित नई नौकरियाँ, स्टार्टअप्स में लागत कटौती, और अस्थायी कार्य अवसरों का बढ़ना।
महिलाओं की श्रम भागीदारी में सुधार
| तिमाही | महिला श्रम भागीदारी दर |
|---|---|
| Q1 2025 | 33.4% |
| Q2 2025 | 33.7% |
महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में 0.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह धीरे-धीरे लेकिन स्थायी सुधार का संकेत है।
इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं —
-
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) की सक्रिय भूमिका
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डिजिटल वर्क, गिग इकॉनमी और घरेलू आधारित कार्यों में बढ़ते अवसर
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सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाएँ, जैसे – मिशन शक्ति, स्टैंड अप इंडिया और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि महिलाएँ अब केवल पारंपरिक कृषि कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमशीलता के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका मज़बूती से स्थापित कर रही हैं।
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में मामूली सुधार
| तिमाही | LFPR |
|---|---|
| Q1 2025 | 55.0% |
| Q2 2025 | 55.1% |
श्रम बल भागीदारी दर (Labour Force Participation Rate) बताती है कि 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के कितने लोग या तो कार्यरत हैं या रोजगार की तलाश में हैं।
0.1 प्रतिशत की वृद्धि मामूली जरूर है, लेकिन यह एक स्थिर और सकारात्मक संकेत है कि श्रम बाजार में लोगों की भागीदारी बनी हुई है।
रोजगार में सुधार के प्रमुख कारण
-
महामारी के बाद आर्थिक स्थिरीकरण:
कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था में आई स्थिरता ने उद्योगों को नई नौकरियाँ सृजित करने के लिए प्रेरित किया। -
सरकारी योजनाओं का प्रभाव:
PMEGP, MGNREGA और Startup India जैसी योजनाओं ने रोजगार के अवसरों को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुँचाया। -
कृषि और निर्माण क्षेत्र में वृद्धि:
मानसून के बेहतर रहने और निर्माण गतिविधियों में तेजी ने ग्रामीण मजदूरों को मौसमी काम उपलब्ध कराया। -
डिजिटल और गिग इकॉनमी का विस्तार:
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आधारित नौकरियाँ (जैसे डिलीवरी, ड्राइविंग, फ्रीलांस सेवाएँ) युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार स्रोत बनी हैं।
भारत के श्रम बाज़ार के मुख्य संकेतक (Q2 2025)
| सूचक | मान |
|---|---|
| भारत की कुल बेरोज़गारी दर (15+) | 5.2% |
| ग्रामीण बेरोज़गारी | 4.4% |
| शहरी बेरोज़गारी | 6.9% |
| महिला श्रम भागीदारी दर | 33.7% |
| श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) | 55.1% |
| डेटा स्रोत | MoSPI – PLFS (CWS) |
विश्लेषण: आगे की राह
हालाँकि बेरोज़गारी दर में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन रोजगार की गुणवत्ता और आय असमानता जैसे मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को केवल “रोजगार की मात्रा” नहीं, बल्कि “गुणवत्ता” पर भी ध्यान देना होगा — यानी ऐसे स्थायी और कौशल-आधारित रोजगार जिनसे आय में स्थिरता बनी रहे।
भविष्य के लिए, कौशल विकास (Skill Development), लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) का विस्तार, और हरित रोजगार (Green Jobs) जैसे क्षेत्रों पर नीतिगत फोकस बढ़ाना आवश्यक है।

