फरवरी 2026 में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। सरकार द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यह लगातार चौथा महीना है जब थोक महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में लागत दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है, खासकर उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों में।
इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि जिम्मेदार रही है। हालांकि, कुल मिलाकर यह वृद्धि अभी भी नियंत्रित स्तर पर है, लेकिन यह आने वाले महीनों में उपभोक्ता महंगाई (CPI) पर भी असर डाल सकती है।
WPI महंगाई: प्रमुख हाइलाइट्स
फरवरी 2026 के WPI आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में लागत बढ़ने से थोक कीमतों में उछाल आया है। विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों में वृद्धि ने महंगाई को सकारात्मक बनाए रखा।
मंत्रालय के अनुसार, बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल्स, और खाद्य संबंधित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने इस ट्रेंड को आगे बढ़ाया। यह संकेत है कि उद्योगों में कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर थोक बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
हालांकि, यह वृद्धि बहुत तेज नहीं है, जिससे यह कहा जा सकता है कि महंगाई अभी भी संतुलित दायरे में बनी हुई है।
खाद्य महंगाई में उछाल
फरवरी 2026 में WPI महंगाई को बढ़ाने में खाद्य वस्तुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। खाद्य महंगाई दर जनवरी के 1.55 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 2.19 प्रतिशत हो गई।
दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने इस बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया। ये सभी दैनिक उपयोग की वस्तुएं हैं, इसलिए इनकी कीमतों में बदलाव का असर आम लोगों पर भी पड़ता है।
खाद्य महंगाई में यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन पूरी तरह स्थिर नहीं है।
सब्जियों की कीमतों में राहत
हालांकि कुल खाद्य महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली। फरवरी 2026 में सब्जी महंगाई दर घटकर 4.73 प्रतिशत रह गई, जो जनवरी में 6.78 प्रतिशत थी।
यह गिरावट बाजार में सब्जियों की बेहतर आपूर्ति और मौसमी उत्पादन के कारण आई है। इससे कुल खाद्य महंगाई पर दबाव कुछ हद तक कम हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और नियंत्रित हो सकती है।
विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती लागत
फरवरी 2026 में WPI महंगाई बढ़ने का एक बड़ा कारण विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रहा। इस श्रेणी में महंगाई दर जनवरी के 2.86 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 2.92 प्रतिशत हो गई।
बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों में कीमतों में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादन लागत बढ़ रही है। इससे उद्योगों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है और आगे चलकर यह लागत उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकती है।
यह ट्रेंड इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियां सक्रिय हैं, लेकिन लागत प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
ईंधन और बिजली श्रेणी में गिरावट
जहाँ एक ओर खाद्य और विनिर्माण क्षेत्र में महंगाई बढ़ी, वहीं ईंधन और बिजली श्रेणी में गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
फरवरी 2026 में इस श्रेणी में कीमतें 3.78 प्रतिशत घटीं, जबकि जनवरी में यह गिरावट 4.01 प्रतिशत थी। इसमें बिजली, कोयला और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं।
ईंधन कीमतों में गिरावट से उत्पादन लागत को कुछ राहत मिलती है, जिससे कुल महंगाई पर दबाव कम होता है। यही कारण है कि कुल WPI महंगाई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
थोक महंगाई में लगातार बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि उत्पादन स्तर पर लागत बढ़ रही है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो इसका असर आने वाले समय में खुदरा महंगाई (CPI) पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, अभी स्थिति नियंत्रण में है और ईंधन कीमतों में गिरावट से संतुलन बना हुआ है। सरकार और रिजर्व बैंक के लिए यह जरूरी होगा कि वे महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए उचित कदम उठाएं।

