वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026: किन देशों पर बढ़ा खतरा, क्या कहते हैं आंकड़े
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026: किन देशों पर बढ़ा खतरा, क्या कहते हैं आंकड़े

वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026: किन देशों पर बढ़ा खतरा, क्या कहते हैं आंकड़े

दुनिया भर में सुरक्षा को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। Global Terrorism Index 2026 (GTI 2026) की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि आतंकवाद भले ही कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन यह अब भी एक गंभीर वैश्विक खतरा बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 2,944 आतंकी हमलों में 5,582 लोगों की मौत हुई। हालांकि, यह एक सकारात्मक संकेत है कि पिछले वर्ष की तुलना में मौतों में 28% और घटनाओं में 22% की गिरावट दर्ज की गई है। फिर भी, युवाओं में बढ़ता कट्टरपंथ और सीमा-पार आतंकवाद जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।


वैश्विक आतंकवाद रुझान 2025: राहत, लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं

GTI 2026 रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि आतंकवाद में गिरावट जरूर आई है, लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ है।

मुख्य वैश्विक रुझान:

  • मौतों में 28% की कमी
  • आतंकी घटनाओं में 22% की गिरावट
  • 81 देशों में स्थिति सुधरी
  • 19 देशों में हालात बिगड़े
  • आतंकवाद अब कुछ क्षेत्रों में अधिक केंद्रित हो गया है

यह दर्शाता है कि आतंकवाद अब व्यापक नहीं बल्कि “क्लस्टर आधारित” हो गया है, जहां कुछ विशेष क्षेत्र ज्यादा प्रभावित हैं।


GTI की कार्यप्रणाली: कैसे तय होती है रैंकिंग

Institute for Economics and Peace द्वारा जारी यह रिपोर्ट चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है:

  • आतंकी घटनाओं की संख्या
  • मौतों (Fatalities) की संख्या
  • घायल लोगों की संख्या
  • बंधकों (Hostages) की संख्या

इन सभी कारकों को मिलाकर किसी देश में आतंकवाद के प्रभाव का समग्र आकलन किया जाता है।


शीर्ष 10 देश: सबसे ज्यादा प्रभावित राष्ट्र

GTI 2026 के अनुसार, आतंकवाद का सबसे ज्यादा असर कुछ सीमित देशों में केंद्रित है।

टॉप 10 देश:

  1. पाकिस्तान (8.574)
  2. बुर्किना फासो (8.324)
  3. नाइजर (7.816)
  4. नाइजीरिया (7.792)
  5. माली (7.586)
  6. सीरिया (7.545)
  7. सोमालिया (7.391)
  8. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (7.171)
  9. कोलंबिया (7.116)
  10. इज़राइल (6.79)

इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता, आतंकी संगठनों की सक्रियता और कमजोर शासन व्यवस्था प्रमुख कारण हैं।


भारत और उसके पड़ोसी देशों की स्थिति

भारत इस सूचकांक में 13वें स्थान (स्कोर: 6.428) पर है, जो यह दर्शाता है कि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।

क्षेत्रीय तुलना:

  • पाकिस्तान – 1
  • अफगानिस्तान – 11
  • भारत – 13
  • म्यांमार – 14
  • बांग्लादेश – 42
  • चीन – 54
  • नेपाल – 89
  • भूटान / श्रीलंका – 100

यह डेटा बताता है कि दक्षिण एशिया अब भी आतंकवाद के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है।


सबसे कम प्रभावित देश

कई देशों में आतंकवाद का प्रभाव लगभग शून्य है, जिनका स्कोर 0 दर्ज किया गया:

  • अल्बानिया
  • भूटान
  • कोस्टा रिका
  • क्रोएशिया
  • एस्टोनिया
  • क्यूबा

यह दर्शाता है कि मजबूत शासन और सुरक्षा व्यवस्था आतंकवाद को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


उप-सहारा अफ्रीका: आतंकवाद का नया केंद्र

रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि अब आतंकवाद का केंद्र मध्य-पूर्व से हटकर अफ्रीका, खासकर साहेल (Sahel) क्षेत्र में शिफ्ट हो गया है।

मुख्य तथ्य:

  • वैश्विक मौतों में 50% से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र का
  • 10 अफ्रीकी देशों में मौतों में कमी
  • 4 देशों में वृद्धि
  • साहेल क्षेत्र सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना

यह बदलाव वैश्विक सुरक्षा रणनीतियों के लिए एक बड़ा संकेत है।


सबसे घातक आतंकी संगठन

2025 में कुछ आतंकी संगठन वैश्विक हिंसा के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार रहे:

  • इस्लामिक स्टेट (सबसे घातक)
  • जेएनआईएम (JNIM)
  • तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
  • अल-शबाब

इन संगठनों की गतिविधियां मुख्य रूप से अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में केंद्रित हैं।


बदलता वैश्विक पैटर्न

आतंकवाद के स्वरूप में पिछले दशक में बड़ा बदलाव आया है।

मुख्य परिवर्तन:

  • 2015 में मौतें: 10,882 (सबसे अधिक)
  • 2025 में घटकर: 5,582
  • इराक और अफगानिस्तान में 95–99% गिरावट
  • अफ्रीका नया केंद्र बनकर उभरा

यह दर्शाता है कि आतंकवाद खत्म नहीं हुआ, बल्कि स्थान बदल चुका है।


पश्चिमी देशों में नया खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों में भी आतंकवाद का खतरा बढ़ रहा है, खासकर:

  • लोन-वुल्फ (अकेले हमलावर) हमले
  • ऑनलाइन कट्टरपंथ
  • सोशल मीडिया के जरिए भर्ती

यह एक नया और जटिल खतरा है, जिसे रोकना पारंपरिक तरीकों से मुश्किल हो रहा है।


भारत और विश्व के लिए क्या मायने?

भारत के लिए यह रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण संकेत देती है:

मुख्य चिंताएं:

  • सीमा-पार आतंकवाद
  • डिजिटल कट्टरपंथ
  • क्षेत्रीय अस्थिरता

हालांकि भारत की स्थिति स्थिर है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply