हर वर्ष 3 दिसंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस (International Day of Persons with Disabilities – IDPD) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सम्मान, जागरूकता, अधिकारों और समान अवसरों को बढ़ावा देना है। वर्ष 2025 की थीम — “सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांग-सम्मिलित समाजों का निर्माण” — इस विचार को रेखांकित करती है कि कोई भी समाज वास्तविक विकास तभी प्राप्त कर सकता है, जब हर नागरिक—दिव्यांग जन सहित—समान अधिकारों और अवसरों के साथ जीवन जी सके।
यह थीम UN सदस्य देशों द्वारा किए गए उस नवीनीकृत वादे पर आधारित है, जिसका उद्देश्य एक ऐसे विश्व का निर्माण करना है जहाँ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक و सांस्कृतिक जीवन में दिव्यांगजन को पूर्ण भागीदारी का अधिकार मिले।
दिव्यांग समावेशन क्यों आवश्यक है?
दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग किसी न किसी रूप में दिव्यांगता का अनुभव करते हैं। ऐसे में समावेशन केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आवश्यक विकास रणनीति है।
1. गरीबी का अधिक जोखिम
दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर सीमित रोजगार अवसर, सामाजिक बहिष्कार और अतिरिक्त देखभाल की लागत झेलनी पड़ती है, जिससे वे गरीबी के अधिक जोखिम में रहते हैं।
2. रोजगार में भेदभाव
कार्यस्थलों पर दिव्यांगजन का अनुभव अक्सर कठिन होता है:
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कम वेतन
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नियमित नौकरियों में कम अवसर
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कौशल प्रशिक्षण की सीमित सुविधा
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असंगठित क्षेत्र में अधिक सहभागिता
इन कारणों से उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सीमित रह जाती है।
3. सामाजिक सुरक्षा कवरेज की कमी
हालाँकि सरकारें अनेक कल्याणकारी योजनाएँ चलाती हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र के कई दिव्यांगजन इन योजनाओं तक पहुँच नहीं बना पाते। कई योजनाएँ दिव्यांगता से संबंधित अतिरिक्त खर्चों को पर्याप्त रूप से संबोधित भी नहीं करतीं।
4. सम्मानजनक देखभाल का अभाव
अनेक देखभाल संरचनाएँ दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा, आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने के अधिकार को पर्याप्त महत्व नहीं देतीं। इससे उनका सामाजिक आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
UN के सामाजिक विकास के तीन स्तंभ
संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास के तीन प्रमुख स्तंभों को आगे बढ़ाता है:
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गरीबी उन्मूलन
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सम्मानजनक कार्य और पूर्ण रोजगार
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सामाजिक एकीकरण
ये तीनों स्तंभ सीधे दिव्यांगजन के जीवन की गुणवत्ता से जुड़े हैं। यदि दिव्यांगजन का समावेशन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो इन लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव ही नहीं।
UN Disability Inclusion Strategy (UNDIS): वैश्विक बदलाव की रूपरेखा
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2019 में UN Disability Inclusion Strategy (UNDIS) की शुरुआत की। इसका लक्ष्य था कि हर UN कार्यक्रम, नीति और मिशन में दिव्यांग व्यक्तियों को समान स्थान मिले।
UNDIS की मूल बातें
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दिव्यांगजन के मानवाधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता
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योजना निर्माण से लेकर कार्यक्रमों के क्रियान्वयन तक दिव्यांगजन की सक्रिय भूमिका
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हर विभाग में समावेश के लिए मानक तय करना
2025 की समीक्षा और महासचिव की सिफारिशें
छठी प्रणालीगत रिपोर्ट (2019–2024) के आधार पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने तीन प्रमुख सुझाव दिए:
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मजबूत जवाबदेही ढाँचा
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नीति निर्माण में दिव्यांगजन की सीधी भागीदारी
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वैश्विक कार्यों में दिव्यांग मुद्दों की बेहतर दृश्यता
यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि दीर्घकालीन प्रगति के लिए समावेशन अनिवार्य है।
2025 की थीम का महत्व: समावेशन ही विकास
इस वर्ष का संदेश बेहद स्पष्ट है—
“समावेशन कोई दया नहीं, बल्कि विकास का आधार है।”
जब दिव्यांगजन समाज का सक्रिय हिस्सा बनते हैं, तो:
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श्रम बाजार सम्पन्न और विविध होता है
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गरीबी घटती है
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सामाजिक एकता मजबूत होती है
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सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ती है
दिव्यांग समावेशन न केवल दिव्यांगजन के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए लाभकारी है।
अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम — 3 दिसंबर 2025
संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित वैश्विक स्मरणोत्सव कार्यक्रम न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय से वर्चुअली आयोजित होगा। समय: 10:00–11:30 a.m. (EST)
उद्घाटन सत्र (10:00–10:30 a.m.)
मुख्य फोकस:
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कैसे समावेशन सामाजिक प्रगति को तेज करता है
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दोहा राजनीतिक घोषणा का महत्व
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इसे लागू करने के व्यावहारिक तरीके
पैनल चर्चा (10:30–11:30 a.m.)
चर्चा के प्रमुख मुद्दे:
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दुनिया के विभिन्न देशों के सफल मॉडल
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दोहा घोषणा के प्रभावी प्रयोग के उपाय
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समावेशन की भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर
भविष्य की राह: क्या आवश्यक है?
एक समावेशी समाज बनाने के लिए निम्न पाँच तत्व अनिवार्य हैं:
1. सुलभ और समावेशी शिक्षा
हर बच्चे को उसके अनुरूप सीखने का अवसर मिले।
2. खुले और सुरक्षित रोजगार अवसर
दिव्यांग अनुकूल कार्यस्थलों का निर्माण तेज गति से हो।
3. प्रभावी सामाजिक सुरक्षा
लक्षित योजनाएँ, आसान नियम, और बेहतर कवरेज।
4. गरिमापूर्ण देखभाल प्रणालियाँ
देखभाल मॉडल में सम्मान और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता।
5. नीति निर्माण में दिव्यांगजन की सीधी भागीदारी
“उनके बारे में—पर उनसे बिना बात किए” नीतियाँ खत्म हों।

